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Kaithal News: अभियान सुस्त, 8409 में से केवल 74 किशोरियों को लगा टीका

संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Wed, 18 Mar 2026 01:27 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
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कैथल। जिले में एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) वैक्सीनेशन अभियान की रफ्तार बेहद धीमी नजर आ रही है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार 8409 किशोरियों को यह वैक्सीन लगाई जानी थी, लेकिन अब तक केवल 74 को ही टीका लगाया जा सका है। इससे अभियान की प्रभावशीलता और जागरूकता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

यह अभियान 28 फरवरी से शुरू किया गया था, जिसमें 14 से 15 वर्ष आयु वर्ग की बालिकाओं को शामिल किया गया। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार शुरुआत में वैक्सीन को लेकर कई भ्रांतियां फैलाई गईं। वहीं, वर्तमान में 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं के चलते भी टीकाकरण की गति प्रभावित हुई है।
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अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित है और व्यापक शोध के बाद ही इसे लागू किया गया है। भारत सरकार की ओर से पहली बार इसे निशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है, जबकि बाजार में इसकी कीमत करीब 3500 से 4000 रुपये तक है। जिले में जिन किशोरियों को यह टीका लगाया गया है, उनमें कोई दुष्प्रभाव सामने नहीं आया है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा स्कूलों और स्वास्थ्य केंद्रों के माध्यम से अभियान चलाया जा रहा है, लेकिन लक्ष्य के मुकाबले अब तक काफी कम प्रगति हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अभिभावकों में जागरूकता की कमी और वैक्सीन को लेकर फैली भ्रांतियां इसके प्रमुख कारण हैं।

हाल ही में आयोजित एक कार्यक्रम में स्वास्थ्य कर्मियों ने छात्राओं को वैक्सीनेशन के महत्व के बारे में जागरूक किया और टीकाकरण भी किया। विभाग का कहना है कि आने वाले दिनों में अभियान को तेज किया जाएगा।
एचपीवी वैक्सीनेशन के फायदे

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार यह वैक्सीन सर्वाइकल कैंसर (गर्भाशय ग्रीवा कैंसर) से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।



यह टीका गुदा, योनि, वल्वा, लिंग और गले के कैंसर के जोखिम को भी कम करता है।



युवतियों में होने वाले जननांग मस्सों से भी सुरक्षा प्रदान करता है।



14 से 15 वर्ष की आयु में लगवाने पर यह वैक्सीन लगभग 97 प्रतिशत तक प्रभावी मानी जाती है।



अपनी बेटियों को इस महत्वपूर्ण वैक्सीन से वंचित न रखें और सरकारी अभियान का लाभ उठाएं, ताकि भविष्य में कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से बचाव संभव हो सके। यह टीका पूरी जांच के बाद विश्व स्तर पर उपयोग में लाया जा रहा है। यदि किसी अभिभावक को कोई शंका है तो वह स्वास्थ्य विभाग से संपर्क कर पूरी जानकारी प्राप्त कर सकता है। इसे लगवाने में घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है। -डॉ. रेनू चावला, जिला चिकित्सा अधिकारी
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