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US-ईरान युद्ध का असर:बासमती चावल निर्यात पर ब्रेक, कंसाइनमेंट बंदरगाहों पर अटके; भुगतान में देरी से बढ़ी चिंता

संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल (हरियाणा) Updated Sat, 07 Mar 2026 09:48 AM IST
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सार

कारोबारियों का कहना है कि जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने और बीमा कंपनियों की ओर से जोखिम बढ़ने के कारण कई कंसाइनमेंट बंदरगाहों पर ही रुक गए हैं। इसका असर घरेलू बाजार में भी दिखाई देने लगा है और मंडियों में बासमती के दामों में गिरावट दर्ज की गई है।

Basmati rice exports hit by war in haryana
बासमती चावल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

पश्चिम एशिया में अमेरिका-इस्राइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध का असर अब बासमती चावल के निर्यात पर भी दिखाई देने लगा है। इसका सीधा प्रभाव प्रमुख चावल व्यापार केंद्रों पर पड़ा है, जिनमें कैथल भी शामिल है। यहां के चावल कारोबारियों का कहना है कि निर्यात की रफ्तार धीमी पड़ गई है और कई कंसाइनमेंट बंदरगाहों पर ही अटके हुए हैं, जिससे व्यापार में अनिश्चितता बढ़ गई है।

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भारत से बासमती चावल का बड़ा हिस्सा खाड़ी और पश्चिम एशियाई देशों में निर्यात किया जाता है। इनमें सऊदी अरब, ईरान, इराक, यूएई और यमन प्रमुख हैं। मौजूदा हालात में युद्ध के कारण समुद्री मार्ग प्रभावित होने से निर्यात प्रक्रिया में रुकावट आ रही है। कारोबारियों के अनुसार सबसे अधिक असर ईरान को होने वाले निर्यात पर पड़ा है। ईरान भारत का बड़ा खरीदार है और हर साल वहां बड़ी मात्रा में बासमती चावल भेजा जाता है।
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कारोबारियों का कहना है कि जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने और बीमा कंपनियों की ओर से जोखिम बढ़ने के कारण कई कंसाइनमेंट बंदरगाहों पर ही रुक गए हैं। इसका असर घरेलू बाजार में भी दिखाई देने लगा है और मंडियों में बासमती के दामों में गिरावट दर्ज की गई है। यदि निर्यात जल्द सामान्य नहीं हुआ तो किसानों को भी इसका नुकसान उठाना पड़ सकता है।

कारोबारियों के अनुसार
जिले से हर साल बड़ी मात्रा में बासमती चावल विदेशों में भेजा जाता है। आमतौर पर कैथल और आसपास के क्षेत्रों से तैयार चावल को करनाल और अन्य निर्यात केंद्रों के जरिए विदेश भेजा जाता है। अब भुगतान रुकने की भी आशंका बनी हुई है। -अमित गोयल, स्थानीय व्यापारी।

युद्ध के कारण सबसे बड़ी समस्या भुगतान में देरी की है। कई देशों से आने वाली रकम समय पर नहीं मिल रही, जिससे व्यापारियों की पूंजी फंस रही है। यदि हालात लंबे समय तक ऐसे ही रहे तो छोटे व्यापारियों के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं। -अजय, चावल कारोबारी।

पश्चिम एशिया में युद्ध क्षेत्र के आसपास से गुजरने वाले जहाजों के बीमा को लेकर भी परेशानी आ रही है। बीमा कंपनियां आसानी से कवर नहीं दे रही हैं या प्रीमियम काफी बढ़ गया है। ऐसे में निर्यात करना जोखिम भरा होता जा रहा है। -विवेक, चावल कारोबारी।

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