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Kaithal News: टेंडर प्रक्रिया में उलझी म्हारी सड़क एप की शिकायतें
Sat, 15 Aug 2026 12:53 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sat, 15 Aug 2026 12:53 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। शहर की सड़कों पर गड्ढों से परेशान लोगों को राहत देने के लिए शुरू की गई म्हारी सड़क एप खुद टेंडर प्रक्रिया में उलझ गई है। एप पर आने वाली गड्ढों की शिकायतों को भी अब विभाग टेंडर लगाकर निपटा रहे हैं। इससे शिकायत करने वालों की गड्ढे भरने की उम्मीदें टूट रही हैं, क्योंकि टेंडर प्रक्रिया को पूरी होने में ही कम से कम 90 दिन का समय लग रहा है।
दावा था कि एप पर शिकायत करते ही समाधान होगा और गड्ढे भरकर फोटो तक एप पर अपलोड होगी लेकिन ऐसा धरातल पर नहीं हो रहा है। विभागों की ओर से लगाए जा रहे टेंडर को पूरा करने में 13 महीने तक का समय एजेंसी को दिया जा रहा है। ऐसे में तुरंत गड्ढा भरने की शिकायतें निपटना मुमकिन ही नहीं है। इसका ताजा उदाहरण नगर परिषद की ओर से लगाया गया टेंडर है।
नगर परिषद ने एप पर आई शिकायतों के गड्ढे भरने के लिए शहर के वार्ड 1 से लेकर वार्ड 10 की सड़कों का 43.59 लाख रुपये का टेंडर लगाया है। टेंडर में कार्यों को पूरा करने के लिए एक साल से भी अधिक समय एजेंसी को दिया जा रहा है। ऐसे में तत्काल गड्ढे कैसे भरे जाएंगे और एप पर शिकायत करने का क्या फायदा मिलेगा इसका जवाब अधिकारियों के पास भी नहीं है।
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नगर परिषद के कार्यकारी अभियंता ज्ञान प्रकाश वधवा के अनुसार किसी सड़क की मरम्मत का टेंडर तैयार करने से लेकर पूरी प्रक्रिया पूरी होने में ही करीब 90 दिन तक का समय लग जाता है। अब ऐसे में म्हारी सड़क एप पर गड्ढे की फोटो अपलोड करने के बाद उसके तुरंत भरने की उम्मीद करना बेमानी है।
म्हारी सड़क एप का उद्देश्य लोगों को सड़क संबंधी समस्या सीधे विभाग तक पहुंचाने का माध्यम देना है। लोग सड़क के गड्ढे की फोटो और स्थान की जानकारी अपलोड कर शिकायत दर्ज कर सकते हैं। लेकिन शहर में सामने आ रही स्थिति यह है कि बड़ी सड़क मरम्मत से जुड़ी शिकायतों का समाधान विभागीय टेंडर प्रक्रिया पर निर्भर हो जाता है। टेंडर प्रक्रिया में जाने से काम फंस जाते हैं और कई बार तो ये सालों-साल तक पूरे नहीं होते हैं, क्योंकि कभी एजेंसी भाग जाती है और कभी भुगतान संबंधी दिक्कतें होने से ठेकेदार काम रोक देते हैं।
एक-एक गड्ढे की बजाय पूरी सड़क की मरम्मत
अधिकारियों से जुड़े सूत्रों के अनुसार म्हारी सड़क एप पर आने वाली शिकायतों में अक्सर केवल एक गड्ढे की समस्या नहीं होती। कई जगह सड़क का बड़ा हिस्सा या कई किलोमीटर तक सड़क खराब मिलती है। ऐसे में एक-एक गड्ढे की अलग-अलग मरम्मत करवाना व्यावहारिक नहीं होता। इसकी लागत भी बढ़ जाती है। इसलिए विभाग अब एक साथ संबंधित सड़कों के खराब हिस्सों की मरम्मत का टेंडर लगा रहा है। मौजूदा टेंडर में भी वार्ड 1 से वार्ड 10 तक की सड़कों पर गड्ढों और शिकायतों की मरम्मत को शामिल किया गया है। इसके लिए अलग-अलग निर्माण कार्यों के साथ पक्की सड़क और फुटपाथ से जुड़े कार्य भी रखे गए हैं।
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कैथल। शहर की सड़कों पर गड्ढों से परेशान लोगों को राहत देने के लिए शुरू की गई म्हारी सड़क एप खुद टेंडर प्रक्रिया में उलझ गई है। एप पर आने वाली गड्ढों की शिकायतों को भी अब विभाग टेंडर लगाकर निपटा रहे हैं। इससे शिकायत करने वालों की गड्ढे भरने की उम्मीदें टूट रही हैं, क्योंकि टेंडर प्रक्रिया को पूरी होने में ही कम से कम 90 दिन का समय लग रहा है।
दावा था कि एप पर शिकायत करते ही समाधान होगा और गड्ढे भरकर फोटो तक एप पर अपलोड होगी लेकिन ऐसा धरातल पर नहीं हो रहा है। विभागों की ओर से लगाए जा रहे टेंडर को पूरा करने में 13 महीने तक का समय एजेंसी को दिया जा रहा है। ऐसे में तुरंत गड्ढा भरने की शिकायतें निपटना मुमकिन ही नहीं है। इसका ताजा उदाहरण नगर परिषद की ओर से लगाया गया टेंडर है।
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नगर परिषद ने एप पर आई शिकायतों के गड्ढे भरने के लिए शहर के वार्ड 1 से लेकर वार्ड 10 की सड़कों का 43.59 लाख रुपये का टेंडर लगाया है। टेंडर में कार्यों को पूरा करने के लिए एक साल से भी अधिक समय एजेंसी को दिया जा रहा है। ऐसे में तत्काल गड्ढे कैसे भरे जाएंगे और एप पर शिकायत करने का क्या फायदा मिलेगा इसका जवाब अधिकारियों के पास भी नहीं है।
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नगर परिषद के कार्यकारी अभियंता ज्ञान प्रकाश वधवा के अनुसार किसी सड़क की मरम्मत का टेंडर तैयार करने से लेकर पूरी प्रक्रिया पूरी होने में ही करीब 90 दिन तक का समय लग जाता है। अब ऐसे में म्हारी सड़क एप पर गड्ढे की फोटो अपलोड करने के बाद उसके तुरंत भरने की उम्मीद करना बेमानी है।
म्हारी सड़क एप का उद्देश्य लोगों को सड़क संबंधी समस्या सीधे विभाग तक पहुंचाने का माध्यम देना है। लोग सड़क के गड्ढे की फोटो और स्थान की जानकारी अपलोड कर शिकायत दर्ज कर सकते हैं। लेकिन शहर में सामने आ रही स्थिति यह है कि बड़ी सड़क मरम्मत से जुड़ी शिकायतों का समाधान विभागीय टेंडर प्रक्रिया पर निर्भर हो जाता है। टेंडर प्रक्रिया में जाने से काम फंस जाते हैं और कई बार तो ये सालों-साल तक पूरे नहीं होते हैं, क्योंकि कभी एजेंसी भाग जाती है और कभी भुगतान संबंधी दिक्कतें होने से ठेकेदार काम रोक देते हैं।
एक-एक गड्ढे की बजाय पूरी सड़क की मरम्मत
अधिकारियों से जुड़े सूत्रों के अनुसार म्हारी सड़क एप पर आने वाली शिकायतों में अक्सर केवल एक गड्ढे की समस्या नहीं होती। कई जगह सड़क का बड़ा हिस्सा या कई किलोमीटर तक सड़क खराब मिलती है। ऐसे में एक-एक गड्ढे की अलग-अलग मरम्मत करवाना व्यावहारिक नहीं होता। इसकी लागत भी बढ़ जाती है। इसलिए विभाग अब एक साथ संबंधित सड़कों के खराब हिस्सों की मरम्मत का टेंडर लगा रहा है। मौजूदा टेंडर में भी वार्ड 1 से वार्ड 10 तक की सड़कों पर गड्ढों और शिकायतों की मरम्मत को शामिल किया गया है। इसके लिए अलग-अलग निर्माण कार्यों के साथ पक्की सड़क और फुटपाथ से जुड़े कार्य भी रखे गए हैं।