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Kaithal News: लैंगिक संवेदनशीलता, यौन उत्पीड़न से बचाव पर मंथन
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Fri, 10 Apr 2026 02:20 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। आरकेएसडी कॉलेज में आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ के तत्वावधान में जेंडर सेंसिटाइजेशन कमेटी, लीगल लिटरेसी सेल और वूमेन सेल के संयुक्त सहयोग से जेंडर सेंसिटाइजेशन विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें लैंगिक संवेदनशीलता, यौन उत्पीड़न से बचाव आदि के विषय पर मंथन हुआ।
कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों और कर्मचारियों में लैंगिक समानता, संवेदनशीलता तथा सुरक्षित एवं सम्मानजनक वातावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाना रहा।
कार्यशाला में मुख्य वक्ता के रूप में एडवोकेट अरविंद खुरानिया ने 7 अप्रैल को गैर-शिक्षण कर्मचारियों तथा 8 अप्रैल को विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने कार्यस्थल पर लैंगिक संवेदनशीलता, यौन उत्पीड़न की रोकथाम और आंतरिक शिकायत समिति की भूमिका व कार्यप्रणाली पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कार्यस्थल से जुड़ी समस्याओं का समाधान समिति के माध्यम से किस प्रकार प्रभावी ढंग से किया जा सकता है। उन्होंने जेंडर सेंसिटाइजेशन को केवल कानूनी विषय न मानते हुए इसे सामाजिक और नैतिक जिम्मेदारी बताया। सभी लिंगों के प्रति समान सम्मान, सहानुभूति और गरिमापूर्ण व्यवहार अपनाने पर विशेष बल दिया गया।
दूसरे दिन आयोजित सत्र में विद्यार्थियों के लिए पीपीटी के माध्यम से विषय को सरल और प्रभावी तरीके से प्रस्तुत किया गया। साथ ही ट्रांसजेंडर समुदाय, परित्यक्त बच्चों और डिजिटल अरेस्ट जैसे समसामयिक मुद्दों पर भी चर्चा की गई।
कार्यक्रम में लगभग 200 विद्यार्थियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई, जबकि पहले दिन करीब 100 गैर-शिक्षण कर्मचारी उपस्थित रहे। इस अवसर पर श्याम बंसल, डॉ. राजबीर पराशर (संयोजक, जेंडर सेंसिटाइजेशन कमेटी), डॉ. हरेंद्र गुप्ता आदि उपस्थित रहे।
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कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों और कर्मचारियों में लैंगिक समानता, संवेदनशीलता तथा सुरक्षित एवं सम्मानजनक वातावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाना रहा।
कार्यशाला में मुख्य वक्ता के रूप में एडवोकेट अरविंद खुरानिया ने 7 अप्रैल को गैर-शिक्षण कर्मचारियों तथा 8 अप्रैल को विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने कार्यस्थल पर लैंगिक संवेदनशीलता, यौन उत्पीड़न की रोकथाम और आंतरिक शिकायत समिति की भूमिका व कार्यप्रणाली पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कार्यस्थल से जुड़ी समस्याओं का समाधान समिति के माध्यम से किस प्रकार प्रभावी ढंग से किया जा सकता है। उन्होंने जेंडर सेंसिटाइजेशन को केवल कानूनी विषय न मानते हुए इसे सामाजिक और नैतिक जिम्मेदारी बताया। सभी लिंगों के प्रति समान सम्मान, सहानुभूति और गरिमापूर्ण व्यवहार अपनाने पर विशेष बल दिया गया।
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दूसरे दिन आयोजित सत्र में विद्यार्थियों के लिए पीपीटी के माध्यम से विषय को सरल और प्रभावी तरीके से प्रस्तुत किया गया। साथ ही ट्रांसजेंडर समुदाय, परित्यक्त बच्चों और डिजिटल अरेस्ट जैसे समसामयिक मुद्दों पर भी चर्चा की गई।
कार्यक्रम में लगभग 200 विद्यार्थियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई, जबकि पहले दिन करीब 100 गैर-शिक्षण कर्मचारी उपस्थित रहे। इस अवसर पर श्याम बंसल, डॉ. राजबीर पराशर (संयोजक, जेंडर सेंसिटाइजेशन कमेटी), डॉ. हरेंद्र गुप्ता आदि उपस्थित रहे।