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Kaithal News: ग्रामीण रूटों पर पिंक बसों की कमी से छात्राएं परेशान
Mon, 17 Aug 2026 03:08 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Mon, 17 Aug 2026 03:08 AM IST
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बस अड्डा पर खड़ी पिंक बसें। संवाद
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कैथल। रोडवेज की ओर संचालित पिंक बसों की संख्या कम होने से ग्रामीण क्षेत्रों से स्कूल-कॉलेज आने वाली छात्राओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। छात्राओं का कहना है कि ग्रामीण रूटों पर मात्र पांच बसें लगाई गईं हैं।
बसों की संख्या कम होने से उन्हें सामान्य बसों पर निर्भर रहना पड़ता है। स्कूल और कॉलेज के समय सुबह शहर की ओर आने वाले रूटों पर यात्रियों की संख्या बढ़ जाती है। ऐसे में बसों में भीड़ होने के कारण छात्राओं को सीट मिलने में दिक्कत होती है। कई बार बस छूट जाने पर अगली बस के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है, जिससे शिक्षण संस्थानों में पहुंचने में देरी की आशंका रहती है।
ग्रामीण क्षेत्र की छात्राएं रजनी, मनीषा, सुशीला, राजवंती, पूजा और सुमन ने बताया कि प्रतिदिन बड़ी संख्या में छात्राएं गांवों से शहर पढ़ने आती हैं। पिंक बसों की संख्या बढ़ाने के साथ ग्रामीण रूटों पर इनके फेरे भी छात्राओं के स्कूल-कॉलेज समय के अनुसार निर्धारित किए जाने चाहिए। इससे उन्हें सुरक्षित और सुविधाजनक परिवहन मिल सकेगा। अभिभावक राजेश, मनफूल और राजेंद्र ने कहा कि बेटियों की पढ़ाई के लिए सुरक्षित आवागमन जरूरी है। पर्याप्त परिवहन सुविधा मिलने से अभिभावकों की चिंता कम होगी और छात्राओं को भी पढ़ाई के लिए आने-जाने में आसानी रहेगी।
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इस संबंध में टीएम विपुल कुमार ने बताया कि पिंक बसों के साथ डिपो से अन्य बसें भी संचालित की जा रही हैं। छात्र-छात्राओं को किसी तरह की परेशानी नहीं आने दी जा रही है। सुबह व शाम को अतिरिक्त बसों के चक्कर छात्राओं के लिए लगाए जा रहे हैं। संवाद
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बसों की संख्या कम होने से उन्हें सामान्य बसों पर निर्भर रहना पड़ता है। स्कूल और कॉलेज के समय सुबह शहर की ओर आने वाले रूटों पर यात्रियों की संख्या बढ़ जाती है। ऐसे में बसों में भीड़ होने के कारण छात्राओं को सीट मिलने में दिक्कत होती है। कई बार बस छूट जाने पर अगली बस के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है, जिससे शिक्षण संस्थानों में पहुंचने में देरी की आशंका रहती है।
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ग्रामीण क्षेत्र की छात्राएं रजनी, मनीषा, सुशीला, राजवंती, पूजा और सुमन ने बताया कि प्रतिदिन बड़ी संख्या में छात्राएं गांवों से शहर पढ़ने आती हैं। पिंक बसों की संख्या बढ़ाने के साथ ग्रामीण रूटों पर इनके फेरे भी छात्राओं के स्कूल-कॉलेज समय के अनुसार निर्धारित किए जाने चाहिए। इससे उन्हें सुरक्षित और सुविधाजनक परिवहन मिल सकेगा। अभिभावक राजेश, मनफूल और राजेंद्र ने कहा कि बेटियों की पढ़ाई के लिए सुरक्षित आवागमन जरूरी है। पर्याप्त परिवहन सुविधा मिलने से अभिभावकों की चिंता कम होगी और छात्राओं को भी पढ़ाई के लिए आने-जाने में आसानी रहेगी।
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इस संबंध में टीएम विपुल कुमार ने बताया कि पिंक बसों के साथ डिपो से अन्य बसें भी संचालित की जा रही हैं। छात्र-छात्राओं को किसी तरह की परेशानी नहीं आने दी जा रही है। सुबह व शाम को अतिरिक्त बसों के चक्कर छात्राओं के लिए लगाए जा रहे हैं। संवाद