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Kaithal News: सरकारी अस्पतालों में दांतों के चिकित्सक नहीं, 32 पदों में से नौ पर ही चिकित्सक
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सिविल अस्पताल में ओपीडी में मरीजों को देखते दांतों के डॉक्टर। संवाद
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कैथल। स्वास्थ्य विभाग के पास दांतों के मरीजों का इलाज करने के लिए चिकित्सकों का टोटा है। जिले में दांतों के चिकित्सकों के 32 पद हैं और इनमें से 25 पद खाली पड़े हैं। जिन 9 पदों पर चिकित्सक काम कर रहे हैं, उनमें से भी एक डेपुटेशन पर पंचकूला आयुष्मान में और एक सिविल सर्जन कार्यालय कैथल में तैनात है।
हालात ये हैं कि दो उपमंडल अस्पताल, 4 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और 18 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर एक भी डेंटल सर्जन उपलब्ध नहीं है। जबकि दांतों का इलाज दिनों दिन महंगा होता जा रहा है। बाहर प्राइवेट अस्पताल में एक बार डॉक्टर से परामर्श और दांतों की सफाई जैसा मामूली इलाज करवाने पर भी 1000 से 1500 रुपये का खर्च आ रहा है। दांतों से संबंधित कुछ बीमारियों में तो यह खर्च एक हजार से लेकर 10 से 20 हजार रुपये तक हो रहा है। किसी भी इलाज के लिए एक बार की सीटिंग का खर्च ही कम से कम एक हजार रुपये आ रहा है।
दांतों की आम बीमारी
निजी क्लीनिक में अनुमानित खर्च
दांतों में कीड़ा (कैविटी) भराई 500 से 1000
दांतों की सफाई (स्केलिंग) 500 से 2000
दांत निकालना 500 से 3000
सामान्य दाढ़ निकालना 500 से 700
अकल दाढ़ निकालना (सर्जिकल)
3000 से 5000
रूट कैनाल (आरसीटी) 2000 से 4000
आसीटी के बाद कैप
2000 से 10000
नकली दांत/डेंचर 10000 से 15000
दांतों का इम्प्लांट
15000 से 60000 प्रति दांत
नोट : हर बार डॉक्टर का परामर्श शुल्क 200 या 300 रुपये अलग से रहता है।
सरकारी अस्पताल से बीच में ही छोड़ना पड़ा इलाज
- सीवन अस्पताल में दांतों का डॉक्टर नहीं होने पर कैथल सिविल अस्पताल में इलाज के लिए आए थे। दांतों की सफाई करवाई थी तो सिर्फ 5 रुपये की पर्ची में ही काम चल गया था। जबकि बाहर एक हजार रुपये दांतों की सफाई और डॉक्टर की फीस अलग से देनी पड़ती है। हर बार कैथल आना संभव नहीं है। अगर आसपास ही डॉक्टर उपलब्ध होंगे तो आम लोगों को ज्यादा फायदा मिलेगा।
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- गुरप्रीत सिंह, निवासी गांव प्रभावत।
- कहने को तो कलायत में उपलमंडल अस्पताल है लेकिन वहां एक भी दांतों का डॉक्टर मौजूद नहीं है। उन्हें मजबूरी में हर बार कैथल आना पड़ता है। आने जाने का खर्च ही बहुत आता है। संभव नहीं है कि हम हर बार इतना खर्च कर पाएं।
राजेश मौण, निवासी गांव मटौर।
सिर्फ यहां मौजूद हैं दांतों के चिकित्सक
कैथल जिले में स्वास्थ्य विभाग के पास जिला नागरिक अस्पताल में ही चार पदों पर तीन चिकित्सक मौजूद हैं। इनमें एक सीनियर डेंटल सर्जन का पद है जो भरा हुआ है और तीन डेंटल सर्जन के पद हैं, जिन पर दो डॉक्टर इस समय सेवाएं दे रहे हैं। इसके अलावा गांव क्योड़क, मूंदड़ी और हाबड़ी व पाडला पीएचसी में डॉक्टरों के पद भरे हुए हैं। कागजों में तो गुहला उपमंडल अस्पताल में भी डेंटल सर्जन का पद भरा हुआ है लेकिन यहां मौजूद डॉ. मनप्रीत पंचकुला आयुष्मान में डेपुटेशन पर हैं और उनका वेतन कैथल स्वास्थ्य विभाग दे रहा है। वहीं सीवन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर तैनात डेंटल सर्जन डॉ. पारुल भी कागजों में ही सीवन में ड्यूटी पर हैं, उन्हें भी सिविल सर्जन कार्यालय कैथल में लगाया हुआ है।
.......
डॉक्टरों की मांग समय-समय पर मुख्यालय को भेज दी जाती है। डॉक्टरों की भर्ती प्रक्रिया भी चल रही है और जल्द ही डॉक्टरों के मिलने की उम्मीद है। जैसे ही डॉक्टर मिलेंगे उन्हें जहां ज्यादा जरूरत है, उसके अनुसार स्टेशन दिए जाएंगे।
- डॉ. रेणु चावला, सिविल सर्जन, स्वास्थ्य विभाग, कैथल।
हालात ये हैं कि दो उपमंडल अस्पताल, 4 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और 18 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर एक भी डेंटल सर्जन उपलब्ध नहीं है। जबकि दांतों का इलाज दिनों दिन महंगा होता जा रहा है। बाहर प्राइवेट अस्पताल में एक बार डॉक्टर से परामर्श और दांतों की सफाई जैसा मामूली इलाज करवाने पर भी 1000 से 1500 रुपये का खर्च आ रहा है। दांतों से संबंधित कुछ बीमारियों में तो यह खर्च एक हजार से लेकर 10 से 20 हजार रुपये तक हो रहा है। किसी भी इलाज के लिए एक बार की सीटिंग का खर्च ही कम से कम एक हजार रुपये आ रहा है।
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दांतों की आम बीमारी
निजी क्लीनिक में अनुमानित खर्च
दांतों में कीड़ा (कैविटी) भराई 500 से 1000
दांतों की सफाई (स्केलिंग) 500 से 2000
दांत निकालना 500 से 3000
सामान्य दाढ़ निकालना 500 से 700
अकल दाढ़ निकालना (सर्जिकल)
3000 से 5000
रूट कैनाल (आरसीटी) 2000 से 4000
आसीटी के बाद कैप
2000 से 10000
नकली दांत/डेंचर 10000 से 15000
दांतों का इम्प्लांट
15000 से 60000 प्रति दांत
नोट : हर बार डॉक्टर का परामर्श शुल्क 200 या 300 रुपये अलग से रहता है।
सरकारी अस्पताल से बीच में ही छोड़ना पड़ा इलाज
- सीवन अस्पताल में दांतों का डॉक्टर नहीं होने पर कैथल सिविल अस्पताल में इलाज के लिए आए थे। दांतों की सफाई करवाई थी तो सिर्फ 5 रुपये की पर्ची में ही काम चल गया था। जबकि बाहर एक हजार रुपये दांतों की सफाई और डॉक्टर की फीस अलग से देनी पड़ती है। हर बार कैथल आना संभव नहीं है। अगर आसपास ही डॉक्टर उपलब्ध होंगे तो आम लोगों को ज्यादा फायदा मिलेगा।
- गुरप्रीत सिंह, निवासी गांव प्रभावत।
- कहने को तो कलायत में उपलमंडल अस्पताल है लेकिन वहां एक भी दांतों का डॉक्टर मौजूद नहीं है। उन्हें मजबूरी में हर बार कैथल आना पड़ता है। आने जाने का खर्च ही बहुत आता है। संभव नहीं है कि हम हर बार इतना खर्च कर पाएं।
राजेश मौण, निवासी गांव मटौर।
सिर्फ यहां मौजूद हैं दांतों के चिकित्सक
कैथल जिले में स्वास्थ्य विभाग के पास जिला नागरिक अस्पताल में ही चार पदों पर तीन चिकित्सक मौजूद हैं। इनमें एक सीनियर डेंटल सर्जन का पद है जो भरा हुआ है और तीन डेंटल सर्जन के पद हैं, जिन पर दो डॉक्टर इस समय सेवाएं दे रहे हैं। इसके अलावा गांव क्योड़क, मूंदड़ी और हाबड़ी व पाडला पीएचसी में डॉक्टरों के पद भरे हुए हैं। कागजों में तो गुहला उपमंडल अस्पताल में भी डेंटल सर्जन का पद भरा हुआ है लेकिन यहां मौजूद डॉ. मनप्रीत पंचकुला आयुष्मान में डेपुटेशन पर हैं और उनका वेतन कैथल स्वास्थ्य विभाग दे रहा है। वहीं सीवन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर तैनात डेंटल सर्जन डॉ. पारुल भी कागजों में ही सीवन में ड्यूटी पर हैं, उन्हें भी सिविल सर्जन कार्यालय कैथल में लगाया हुआ है।
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डॉक्टरों की मांग समय-समय पर मुख्यालय को भेज दी जाती है। डॉक्टरों की भर्ती प्रक्रिया भी चल रही है और जल्द ही डॉक्टरों के मिलने की उम्मीद है। जैसे ही डॉक्टर मिलेंगे उन्हें जहां ज्यादा जरूरत है, उसके अनुसार स्टेशन दिए जाएंगे।
- डॉ. रेणु चावला, सिविल सर्जन, स्वास्थ्य विभाग, कैथल।

सिविल अस्पताल में ओपीडी में मरीजों को देखते दांतों के डॉक्टर। संवाद