Kaithal News: गांव फरल का खेल स्टेडियम बदहाली का शिकार, जंगली घास और जहरीले जीवों का बना ठिकाना
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ग्रामीण खिलाड़ियों का आरोप है कि पंचायत और संबंधित विभाग लंबे समय से स्टेडियम की ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। स्टेडियम में उगी घनी घास और झाड़ियों के कारण सांप, बिच्छू और अन्य जहरीले जीवों का खतरा बना रहता है जिससे खिलाड़ियों को अभ्यास करने में भय का सामना करना पड़ता है। स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि खिलाड़ियों ने स्वयं श्रमदान कर स्टेडियम में दौड़ने के लिए ट्रैक तैयार किया है। प्रतिदिन सुबह और शाम कई युवा यहां अभ्यास करने पहुंचते हैं लेकिन सुविधाओं के अभाव में उन्हें भारी परेशानियां उठानी पड़ रही है। खिलाड़ियों का कहना है कि खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए केवल घोषणाएं पर्याप्त नहीं हैं बल्कि जमीनी स्तर पर सुविधाएं उपलब्ध कराना भी जरूरी है। यदि समय रहते स्टेडियम की सुध नहीं ली गई तो गांव के उभरते खिलाड़ी बेहतर अवसरों से वंचित रह जाएंगे।
स्टेडियम में खड़ी जंगली घास बनी सांपों का अड्डा -
खिलाड़ी रविंद्र सिंह ने बताया कि स्टेडियम में चारों ओर जंगली घास फैली हुई है। कई बार अभ्यास के दौरान सांप और अन्य जीव दिखाई देते हैं। ऐसे माहौल में खिलाड़ियों का मनोबल प्रभावित होता है। प्रशासन को जल्द सफाई करवानी चाहिए।
पीने के पानी की नहीं है कोई व्यवस्था
युवा बलराम शर्मा ने बताया कि स्टेडियम में पीने के पानी की कोई व्यवस्था नहीं है। गर्मी के मौसम में खिलाड़ियों को घर से पानी लेकर आना पड़ता है। कई बार पानी खत्म होने पर अभ्यास बीच में छोड़ना पड़ता है।
स्टेडियम में लाइटों की कोई व्यवस्था नहीं
मोहित राणा ने बताया कि शाम के समय अंधेरा होने के कारण अभ्यास करने में परेशानी होती है। यदि स्टेडियम में लाइटों की व्यवस्था हो जाए तो अधिक खिलाड़ी नियमित अभ्यास कर सकेंगे।
खिलाड़ियों ने स्वयं के खर्च से तैयार किया ट्रैक-
खिलाड़ी निरवर सिंह विर्क ने बताया कि गांव के युवाओं ने मिलकर स्वयं लगभग 30 हजार रुपये खर्च कर दौड़ने का ट्रैक तैयार किया है। यदि विभाग थोड़ा सहयोग करे तो यह स्टेडियम क्षेत्र के खिलाड़ियों के लिए बेहतर खेल केंद्र बन सकता है।
सड़कों पर दौड़ने को विवश हैं खिलाड़ी-
निहाल राणा ने बताया कि गांव में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है लेकिन सुविधाओं के अभाव में कई खिलाड़ी अभ्यास छोड़ने को मजबूर हो जाते हैं। सरकार और पंचायत को इस दिशा में गंभीरता से कदम उठाने चाहिए। खिलाड़ियों को मजबूरी में सड़कों पर दौड़ना पड़ रहा है।
खिलाड़ियों की प्रमुख मांगें-
स्टेडियम में उगी जंगली घास और झाड़ियों की तत्काल सफाई करवाई जाए। पीने के पानी की स्थायी व्यवस्था की जाए। स्टेडियम में हाईमास्ट या पर्याप्त लाइटें लगाई जाएं। नियमित रखरखाव के लिए बजट और कर्मचारी नियुक्त किए जाएं। खिलाड़ियों के लिए बैठने और विश्राम की उचित व्यवस्था की जाए। ग्रामीण खिलाड़ियों ने प्रशासन, खेल विभाग और पंचायत से मांग की है कि गांव फरल के खेल स्टेडियम की बदहाल स्थिति पर तुरंत संज्ञान लेते हुए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।

गांव फरल का बदहाल पड़ा स्टेडियम। संवाद- फोटो : सांकेतिक

गांव फरल का बदहाल पड़ा स्टेडियम। संवाद- फोटो : सांकेतिक

गांव फरल का बदहाल पड़ा स्टेडियम। संवाद- फोटो : सांकेतिक

गांव फरल का बदहाल पड़ा स्टेडियम। संवाद- फोटो : सांकेतिक

गांव फरल का बदहाल पड़ा स्टेडियम। संवाद- फोटो : सांकेतिक

गांव फरल का बदहाल पड़ा स्टेडियम। संवाद- फोटो : सांकेतिक

गांव फरल का बदहाल पड़ा स्टेडियम। संवाद- फोटो : सांकेतिक

गांव फरल का बदहाल पड़ा स्टेडियम। संवाद- फोटो : सांकेतिक

गांव फरल का बदहाल पड़ा स्टेडियम। संवाद- फोटो : सांकेतिक

गांव फरल का बदहाल पड़ा स्टेडियम। संवाद- फोटो : सांकेतिक

गांव फरल का बदहाल पड़ा स्टेडियम। संवाद- फोटो : सांकेतिक