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प्रदेश की अनाज मंडियां फुल, किसान की जेब खाली है : सुरजेवाला
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शहर की अतिरिक्त अनाज मंडी में जायजा लेते रणदीप सिंह सुरजेवाला व अन्य। स्वयं
- फोटो : संवाद
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कैथल। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस महासचिव एवं सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला व कैथल विधायक आदित्य सुरजेवाला ने बुधवार को कैथल की अतिरिक्त अनाज मंडी का दौरा कर किसानों की समस्याएं सुनीं। उन्होंने कहा कि जिले सहित हरियाणा की मंडियों में भाजपा सरकार किसानों, खेत मजदूरों, आढ़तियों और मंडी मजदूरों के साथ लगातार अन्याय कर रही है।
सुरजेवाला ने कहा कि भीषण गर्मी और खुले में तपते मजदूर-किसान...न खरीद, न उठान, न फसल का भुगतान...। मंडी में किसान, मजदूर और आढ़ती लाचार और बेजार है। नायब सैनी सरकार की बदनीयती का नतीजा है कि पूरे प्रदेश की अनाज मंडियां फुल हैं पर किसान की जेब खाली है। उन्होंने कहा कि लगभग 18 लाख मीट्रिक टन गेहूं अभी भी खरीद के इंतजार में खुले आसमान के नीचे पड़ा है, जबकि 37.07 लाख मीट्रिक टन गेहूं उठान न होने से खरीद के बावजूद बिखरा पड़ा है। कैथल के हालात तो और भी बदतर हैं।
कैथल जिले की अनाज मंडियों में 21 अप्रैल, 2026 तक 6,15,192 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हुई, पर उठान केवल 2,61,088 मीट्रिक टन का ही हो पाया, यानी 62 प्रतिशत गेहूं का उठान ही नहीं हुआ। सुरजेवाला ने कहा कि नायब सैनी सरकार की फसल न खरीदने की मंशा तभी नजर आ गई थी, जब उन्होंने बायोमेट्रिक, सर्वर, ट्रैक्टर नंबर आदि अनिवार्य करने का तानाशाही फरमान सुनाया।
उन्होंने कहा कि बारदाना 2 महीने पहले खरीदना चाहिए था लेकिन खरीदा नहीं गया। पटसन (जूट) के मजबूत बैग क्यों नहीं खरीदे गए? एचडीपीई प्लास्टिक बैग खरीदे गए, जिनके माइक्रो ग्राम बढ़ाए नहीं गए। 1 अप्रैल 2026 से सरकारी खरीद शुरू है लेकिन 22 दिन बाद भी सरकार द्वारा खरीदे गए गेहूं का किसानों को पूरा भुगतान नहीं दिया गया है। इस अवसर पर कांग्रेस जिलाध्यक्ष रामचन्द्र गुर्जर, अतिरिक्त अनाज मंडी प्रधान रघुबीर मलिक, अश्विनी शोरेवाला, रामनिवास मित्तल, सोहन ढुल मौजूद रहे।
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सुरजेवाला ने कहा कि भीषण गर्मी और खुले में तपते मजदूर-किसान...न खरीद, न उठान, न फसल का भुगतान...। मंडी में किसान, मजदूर और आढ़ती लाचार और बेजार है। नायब सैनी सरकार की बदनीयती का नतीजा है कि पूरे प्रदेश की अनाज मंडियां फुल हैं पर किसान की जेब खाली है। उन्होंने कहा कि लगभग 18 लाख मीट्रिक टन गेहूं अभी भी खरीद के इंतजार में खुले आसमान के नीचे पड़ा है, जबकि 37.07 लाख मीट्रिक टन गेहूं उठान न होने से खरीद के बावजूद बिखरा पड़ा है। कैथल के हालात तो और भी बदतर हैं।
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कैथल जिले की अनाज मंडियों में 21 अप्रैल, 2026 तक 6,15,192 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हुई, पर उठान केवल 2,61,088 मीट्रिक टन का ही हो पाया, यानी 62 प्रतिशत गेहूं का उठान ही नहीं हुआ। सुरजेवाला ने कहा कि नायब सैनी सरकार की फसल न खरीदने की मंशा तभी नजर आ गई थी, जब उन्होंने बायोमेट्रिक, सर्वर, ट्रैक्टर नंबर आदि अनिवार्य करने का तानाशाही फरमान सुनाया।
उन्होंने कहा कि बारदाना 2 महीने पहले खरीदना चाहिए था लेकिन खरीदा नहीं गया। पटसन (जूट) के मजबूत बैग क्यों नहीं खरीदे गए? एचडीपीई प्लास्टिक बैग खरीदे गए, जिनके माइक्रो ग्राम बढ़ाए नहीं गए। 1 अप्रैल 2026 से सरकारी खरीद शुरू है लेकिन 22 दिन बाद भी सरकार द्वारा खरीदे गए गेहूं का किसानों को पूरा भुगतान नहीं दिया गया है। इस अवसर पर कांग्रेस जिलाध्यक्ष रामचन्द्र गुर्जर, अतिरिक्त अनाज मंडी प्रधान रघुबीर मलिक, अश्विनी शोरेवाला, रामनिवास मित्तल, सोहन ढुल मौजूद रहे।

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