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Kaithal News: आज से शुरू होगी गेहूं की खरीद एजेंसियों के पास बारदाना तक नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Wed, 01 Apr 2026 01:51 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। गेहूं की सरकारी खरीद 1 अप्रैल से शुरू हो रही है, लेकिन सीजन की शुरुआत ही अव्यवस्थाओं के साथ होने जा रही है। हालात यह हैं कि खरीद एजेंसियों के पास अभी तक गेहूं भरने के लिए खाली बोरी (बारदाना) तक नहीं पहुंचा है। जब एजेंसियों के पास ही बारदाना नहीं है, तो मंडियों तक इसकी उपलब्धता की स्थिति सहज ही समझी जा सकती है।
उधर, कलायत, राजौंद और पूंडरी में निजी खरीदार अधिक दाम देकर सरसों खरीद रहे हैँ। सरकारी रेट 6200 रुपये का है जबकि निजी खरीद 6500 रुपये प्रति क्विंटल खरीद कर रहे हैं। इसलिए किसान सरकारी एजेंसी को सरसों देने के लिए तैयार नहीं हो रहे हैं।
जिले में खाद्य एवं आपूर्ति विभाग, हैफेड और वेयरहाउस के माध्यम से गेहूं की खरीद की जानी है। गेहूं उठान के लिए प्रशासन अब तक टेंडर प्रक्रिया भी पूरी नहीं कर सका है। टेंडर फाइलों में ही अटके पड़े हैं। दूसरी ओर, अधिकारी बैठकों के जरिए तैयारियां पूरी होने के दावे कर रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर जरूरी इंतजाम नदारद हैं।
उठान प्रक्रिया फिर बनेगी सबसे बड़ी चुनौती : हर साल की तरह इस बार भी गेहूं उठान व्यवस्था चुनौती बनती दिख रही है। विभाग अब तक ढुलाई के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाया है। इस बार सरकार ने सख्त नियम लागू किए हैं, जिनके तहत हर ट्रांसपोर्ट वाहन में जीपीएस सिस्टम होना अनिवार्य किया गया है। तकनीकी शर्तों और ट्रांसपोर्टरों के लंबित भुगतानों के चलते कई ठेकेदार टेंडर में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। यदि खरीद के 48 से 72 घंटे के भीतर उठान नहीं हुआ, तो मंडियों में जाम की स्थिति बन सकती है और किसानों को ट्रॉली खाली करने के लिए इंतजार करना पड़ेगा।
42 मंडियों और खरीद केंद्रों पर होगी व्यवस्था
जिला प्रशासन ने 42 मंडियों और खरीद केंद्रों पर गेहूं खरीद की व्यवस्था की है। गेटपास का समय सुबह 6:00 बजे से रात 8:00 बजे तक तय किया गया है। इसके बाद मंडी में प्रवेश नहीं मिलेगा। किसानों को अंगूठा लगाकर अपनी पहचान प्रमाणित करनी होगी। ट्रैक्टर-ट्रॉली की नंबर प्लेट स्पष्ट होना अनिवार्य है, जिसकी फोटो गेटपास के समय ली जाएगी। मंडियों को जियो-फेंस किया गया है। उधर, भाकियू (चढूनी) के युवा प्रदेशाध्यक्ष विक्रम कसाना का कहना है कि कटाई के दौरान कंबाइन मशीनें रातभर चलती हैं। ऐसे में समय की पाबंदी से मंडियों में लंबी कतारें और जाम की स्थिति बन सकती है।
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मंडी गेट पर किसानों को प्रवेश में देरी न हो, इसके लिए पर्याप्त स्टाफ व सीसीटीवी की व्यवस्था हो।
n बायोमीट्रिक प्रक्रिया तेज हो, ताकि किसानों को परेशानी न हो।
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जियो-फेंसिंग की सटीक रिपोर्ट तैयार की जाए।
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बारदाना, पेयजल, शौचालय, कैंटीन और बैठने की व्यवस्था सुनिश्चित हो।
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ढुलाई करने वाले वाहनों में जीपीएस सिस्टम चालू हालत में हो।
n एमएसपी पर खरीद और समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
एजेंसियों के पास करीब 40 प्रतिशत बारदाना पहले से उपलब्ध है और बाकी भी जल्द पहुंच जाएगा। उन्होंने कहा कि टेंडर प्रक्रिया अंतिम चरण में है और किसानों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होने दी जाएगी।
-वरिंद्र कुमार, डीएफएससी
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कैथल। गेहूं की सरकारी खरीद 1 अप्रैल से शुरू हो रही है, लेकिन सीजन की शुरुआत ही अव्यवस्थाओं के साथ होने जा रही है। हालात यह हैं कि खरीद एजेंसियों के पास अभी तक गेहूं भरने के लिए खाली बोरी (बारदाना) तक नहीं पहुंचा है। जब एजेंसियों के पास ही बारदाना नहीं है, तो मंडियों तक इसकी उपलब्धता की स्थिति सहज ही समझी जा सकती है।
उधर, कलायत, राजौंद और पूंडरी में निजी खरीदार अधिक दाम देकर सरसों खरीद रहे हैँ। सरकारी रेट 6200 रुपये का है जबकि निजी खरीद 6500 रुपये प्रति क्विंटल खरीद कर रहे हैं। इसलिए किसान सरकारी एजेंसी को सरसों देने के लिए तैयार नहीं हो रहे हैं।
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जिले में खाद्य एवं आपूर्ति विभाग, हैफेड और वेयरहाउस के माध्यम से गेहूं की खरीद की जानी है। गेहूं उठान के लिए प्रशासन अब तक टेंडर प्रक्रिया भी पूरी नहीं कर सका है। टेंडर फाइलों में ही अटके पड़े हैं। दूसरी ओर, अधिकारी बैठकों के जरिए तैयारियां पूरी होने के दावे कर रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर जरूरी इंतजाम नदारद हैं।
उठान प्रक्रिया फिर बनेगी सबसे बड़ी चुनौती : हर साल की तरह इस बार भी गेहूं उठान व्यवस्था चुनौती बनती दिख रही है। विभाग अब तक ढुलाई के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाया है। इस बार सरकार ने सख्त नियम लागू किए हैं, जिनके तहत हर ट्रांसपोर्ट वाहन में जीपीएस सिस्टम होना अनिवार्य किया गया है। तकनीकी शर्तों और ट्रांसपोर्टरों के लंबित भुगतानों के चलते कई ठेकेदार टेंडर में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। यदि खरीद के 48 से 72 घंटे के भीतर उठान नहीं हुआ, तो मंडियों में जाम की स्थिति बन सकती है और किसानों को ट्रॉली खाली करने के लिए इंतजार करना पड़ेगा।
42 मंडियों और खरीद केंद्रों पर होगी व्यवस्था
जिला प्रशासन ने 42 मंडियों और खरीद केंद्रों पर गेहूं खरीद की व्यवस्था की है। गेटपास का समय सुबह 6:00 बजे से रात 8:00 बजे तक तय किया गया है। इसके बाद मंडी में प्रवेश नहीं मिलेगा। किसानों को अंगूठा लगाकर अपनी पहचान प्रमाणित करनी होगी। ट्रैक्टर-ट्रॉली की नंबर प्लेट स्पष्ट होना अनिवार्य है, जिसकी फोटो गेटपास के समय ली जाएगी। मंडियों को जियो-फेंस किया गया है। उधर, भाकियू (चढूनी) के युवा प्रदेशाध्यक्ष विक्रम कसाना का कहना है कि कटाई के दौरान कंबाइन मशीनें रातभर चलती हैं। ऐसे में समय की पाबंदी से मंडियों में लंबी कतारें और जाम की स्थिति बन सकती है।
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मंडी गेट पर किसानों को प्रवेश में देरी न हो, इसके लिए पर्याप्त स्टाफ व सीसीटीवी की व्यवस्था हो।
n बायोमीट्रिक प्रक्रिया तेज हो, ताकि किसानों को परेशानी न हो।
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जियो-फेंसिंग की सटीक रिपोर्ट तैयार की जाए।
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बारदाना, पेयजल, शौचालय, कैंटीन और बैठने की व्यवस्था सुनिश्चित हो।
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ढुलाई करने वाले वाहनों में जीपीएस सिस्टम चालू हालत में हो।
n एमएसपी पर खरीद और समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
एजेंसियों के पास करीब 40 प्रतिशत बारदाना पहले से उपलब्ध है और बाकी भी जल्द पहुंच जाएगा। उन्होंने कहा कि टेंडर प्रक्रिया अंतिम चरण में है और किसानों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होने दी जाएगी।
-वरिंद्र कुमार, डीएफएससी