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Karnal News: सोने की खरीद घटने पर रोजगार पर पड़ेगा विपरीत असर
Tue, 12 May 2026 12:18 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Tue, 12 May 2026 12:18 AM IST
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ज्वेलरी शोरूम पर अंगूठी पसंद करती महिला। आर्काइव
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से विदेशी मुद्रा बचाने और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए लोगों से एक वर्ष तक सोने की खरीद से बचने की अपील के बाद जिले के सराफा कारोबारियों में चर्चा तेज हो गई है। लोगों ने सोना खरीदना कम कर दिया तो इसका सीधा असर सराफा कारोबार और कारीगरों की आजीविका पर पड़ेगा।
जिले में छोटे-बड़े करीब 400 से 450 सराफ कारोबारी हैं, जिनका कारोबार मुख्य रूप से सोने और चांदी के आभूषणों पर आधारित है। कारोबारियों के अनुसार यदि सोने की बिक्री में गिरावट आती है तो करोड़ों रुपये के कारोबार पर असर पड़ सकता है। साथ ही दुकानों और शोरूम में काम करने वाले कारीगरों की नौकरियां भी खतरे में पड़ सकती हैं।
जिले में सराफा कारोबार से जुड़े करीब 600 कारीगर कार्यरत हैं। इनमें पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र से आए कारीगरों की संख्या अधिक है। स्थानीय स्तर पर पंजाबी समुदाय के लोग भी इस पेशे से जुड़े हुए हैं। ये कारीगर आभूषण तैयार करने, डिजाइनिंग और मरम्मत जैसे कार्य करते हैं। यदि मांग घटी तो सबसे पहले असर इन्हीं कारीगरों पर पड़ेगा।
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सराफा कारोबारियों का मानना है कि शादी-ब्याह और पारिवारिक आयोजनों में सोने की खरीद पूरी तरह बंद होना संभव नहीं है। भारतीय समाज में सोना केवल निवेश नहीं बल्कि परंपरा और सामाजिक प्रतिष्ठा से भी जुड़ा हुआ है। ऐसे में लोगों की जरूरत के अनुसार खरीदारी जारी रहने की उम्मीद है। फिलहाल बाजार में इसका कोई बड़ा असर देखने को नहीं मिला है। लोग अभी भी शादियों और अन्य शुभ अवसरों के लिए आभूषण खरीद रहे हैं।
देशहित सर्वाेपरि : गुलशन करवल
दी ज्वेलर एसोसिएशन यमुनानगर के प्रवक्ता गुलशन करवल ने कहा कि देशहित सर्वोपरि है और यदि अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए सरकार लोगों से सहयोग मांग रही है तो उसका सम्मान किया जाना चाहिए। लेकिन सरकार को यह भी ध्यान रखना होगा कि सराफा कारोबार से हजारों परिवारों की आजीविका जुड़ी हुई है। सोने की खरीद में भारी गिरावट आने पर व्यापारियों के साथ-साथ कारीगरों पर भी संकट खड़ा हो सकता है। परंतु ऐसा होना मुश्किल ही है, क्योंकि शादी, विवाह पर इंसान पर जितने चाहे लाखों, करोड़ों रुपये खर्च कर ले लेकिन आखिर में विवाहिता के पास उसके गहने ही बचते हैं। देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए सरकार को अन्य क्षेत्रों में भी प्रभावी कदम उठाने चाहिए। फिलहाल बाजार सामान्य बना हुआ है, सभी आने वाले समय की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
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यमुनानगर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से विदेशी मुद्रा बचाने और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए लोगों से एक वर्ष तक सोने की खरीद से बचने की अपील के बाद जिले के सराफा कारोबारियों में चर्चा तेज हो गई है। लोगों ने सोना खरीदना कम कर दिया तो इसका सीधा असर सराफा कारोबार और कारीगरों की आजीविका पर पड़ेगा।
जिले में छोटे-बड़े करीब 400 से 450 सराफ कारोबारी हैं, जिनका कारोबार मुख्य रूप से सोने और चांदी के आभूषणों पर आधारित है। कारोबारियों के अनुसार यदि सोने की बिक्री में गिरावट आती है तो करोड़ों रुपये के कारोबार पर असर पड़ सकता है। साथ ही दुकानों और शोरूम में काम करने वाले कारीगरों की नौकरियां भी खतरे में पड़ सकती हैं।
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जिले में सराफा कारोबार से जुड़े करीब 600 कारीगर कार्यरत हैं। इनमें पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र से आए कारीगरों की संख्या अधिक है। स्थानीय स्तर पर पंजाबी समुदाय के लोग भी इस पेशे से जुड़े हुए हैं। ये कारीगर आभूषण तैयार करने, डिजाइनिंग और मरम्मत जैसे कार्य करते हैं। यदि मांग घटी तो सबसे पहले असर इन्हीं कारीगरों पर पड़ेगा।
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सराफा कारोबारियों का मानना है कि शादी-ब्याह और पारिवारिक आयोजनों में सोने की खरीद पूरी तरह बंद होना संभव नहीं है। भारतीय समाज में सोना केवल निवेश नहीं बल्कि परंपरा और सामाजिक प्रतिष्ठा से भी जुड़ा हुआ है। ऐसे में लोगों की जरूरत के अनुसार खरीदारी जारी रहने की उम्मीद है। फिलहाल बाजार में इसका कोई बड़ा असर देखने को नहीं मिला है। लोग अभी भी शादियों और अन्य शुभ अवसरों के लिए आभूषण खरीद रहे हैं।
देशहित सर्वाेपरि : गुलशन करवल
दी ज्वेलर एसोसिएशन यमुनानगर के प्रवक्ता गुलशन करवल ने कहा कि देशहित सर्वोपरि है और यदि अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए सरकार लोगों से सहयोग मांग रही है तो उसका सम्मान किया जाना चाहिए। लेकिन सरकार को यह भी ध्यान रखना होगा कि सराफा कारोबार से हजारों परिवारों की आजीविका जुड़ी हुई है। सोने की खरीद में भारी गिरावट आने पर व्यापारियों के साथ-साथ कारीगरों पर भी संकट खड़ा हो सकता है। परंतु ऐसा होना मुश्किल ही है, क्योंकि शादी, विवाह पर इंसान पर जितने चाहे लाखों, करोड़ों रुपये खर्च कर ले लेकिन आखिर में विवाहिता के पास उसके गहने ही बचते हैं। देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए सरकार को अन्य क्षेत्रों में भी प्रभावी कदम उठाने चाहिए। फिलहाल बाजार सामान्य बना हुआ है, सभी आने वाले समय की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।