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Karnal News: जमीन के फर्जी कागजात तैयार कर लिया 30 लाख का ऋण, अदालत के आदेश पर प्राथमिकी

संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल Updated Thu, 02 Apr 2026 12:25 AM IST
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A loan of Rs 30 lakh was obtained by preparing fake land documents, an FIR was lodged on the orders of the court.
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संवाद न्यूज एजेंसी
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करनाल। कैरवाली गांव की जमीन को गिरवी रखकर बैंक से 30 लाख रुपये का ऋण लेने के मामले में अदालत के आदेश पर मधुबन थाना पुलिस ने चार लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी की प्राथमिकी दर्ज की है। शिकायत में आरोप है कि जमीन का मालिकाना हक न होने के बावजूद आरोपियों ने फर्जी दस्तावेज तैयार कर बैंक से ऋण लिया।
अदालत के फैसले के अनुसार, मधुबन थाना क्षेत्र के कैरवाली गांव निवासी विनोद कुमार की शिकायत पर मामले की सुनवाई की गई। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट खुशबू गोयल की अदालत ने 19 मार्च, 2026 को मामले की जांच और प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश जारी किया। आदेश में सुप्रीम कोर्ट के सकिरी वासु बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (2008) और ललिता कुमारी बनाम उत्तर प्रदेश सरकार (2014) के फैसलों का जिक्र करते हुए कहा गया कि मजिस्ट्रेट के पास यह अधिकार है कि वह प्राथमिकी दर्ज कराने और जांच करवाने के आदेश दे सकता है।
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शिकायतकर्ता विनोद कुमार ने बताया कि कैरवाली गांव की वर्ष 2019-2020 की जमाबंदी के अनुसार वह 17 कनाल 7 मरला कृषि भूमि का मालिक और कब्जाधारी है। उसकी जमीन खेवट नंबर 176 और खतौनी नंबर 200 में दर्ज है। शिकायत के अनुसार आरोपी श्याम लाल और बलविंदर ने अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर इस जमीन को एचडीएफसी बैंक में गिरवी रखकर 30 लाख रुपये का ऋण ले लिया। आरोप है कि यह साजिश हल्का पटवारी सुमित धनखड़ और बैंक मैनेजर नीरज कुमार के साथ मिलकर रची।
12 सितंबर 2023 को रपट नंबर 24 के तहत ऋण जारी किया गया। जिस जमीन पर ऋण लिया गया, उसमें से दो कनाल 6 मरला जमीन शिकायतकर्ता और उसके भाई की थी। आरोप है कि आरोपियों के पास इस जमीन का कोई मालिकाना हक नहीं था, फिर भी फर्जी कागजात बनाकर बैंक को गुमराह किया गया। मधुबन थाना प्रभारी गाैरव पुनिया ने बताया कि अदालत के आदेश पर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी सहित अन्य धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज करके जांच शुरू कर दी है। दस्तावेज की जांच के साथ-साथ आरोपियों से पूछताछ की जा रही है।

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पुलिस ने कार्रवाई नहीं की तो खटखटाया अदालत का दरवाजा

विनोद कुमार ने बताया कि उसने 9 सितंबर, 2025 को मामले में पुलिस अधीक्षक को शिकायत दी थी। कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने मजबूरन अदालत को दरवाजा खटखटाना पड़ा। अदालत ने थाना प्रभारी को अदालत में प्राथमिकी की कॉपी पेश करने और व्यक्तिगत रूप से पेश होने के निर्देश भी दिए गए।

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1907 में पूर्वजों ने आरोपियों के पास गिरवी रखी थी जमीन

विनोद कुमार ने बताया कि उसके पूर्वजों ने वर्ष 1907 में यह जमीन 45 रुपये में आरोपियों के पूर्वजों के पास गिरवी रखी थी। बाद में यह जमीन कोर्ट के आदेश से 6 सितंबर, 2022 को शिकायतकर्ता पक्ष ने छुड़वा ली थी। यह आदेश घरौंडा के कलेक्टर एवं उपमंडल अधिकारी अभय सिंह जांगड़ा की अदालत ने केस नंबर 14/2022 में दिया था। जमीन का मालिकाना हक शिकायतकर्ता के पास है।
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