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Hindi News ›   Haryana ›   Karnal News ›   Aren't we human beings too? We happen to be Biharis, sir so who here is going to listen to us?

Karnal News: क्या हम इंसान नहीं... बिहारी हैं साहब इसलिए हमारी कौन सुनेगा यहां

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 19 Oct 2026 02:54 AM IST
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Aren't we human beings too? We happen to be Biharis, sir so who here is going to listen to us?
परिवार को सांत्वना देते पड़ोसी। संवाद
करनाल/इंद्री। फाजिलपुर गांव के पास खेत में बारिश का पानी निकालने के लिए खोदे गए करीब 12 फीट गहरे गड्ढे में गिरकर सात वर्षीय मासूम देव की मौत को दो दिन बीत गए हैं। न कोई जनप्रतिनिधि और न ही प्रशासनिक अधिकारी परिवार की सुध लेने पहुंचा है। न ही खेत मालिक ने सुध ली है।
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मृतक के पिता सतीश पासवान ने दर्द व्यक्त किया। बोले कि क्या हमारी गिनती इंसानों में नहीं होती। ...हम बिहारी हैं साहब, हमारी कौन सुनता है। अगर हम यहां के वासी होते तो शायद सरकार हमारी भी कोई मदद कर देती।
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पिता सतीश का कहना है कि उन्होंने खेत मालिक प्रवीन के खिलाफ या किसी अन्य पक्ष के खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं करने का निर्णय लिया था लेकिन अब बेटे की मौत के बाद खेत मालिक ने भी परिवार की सुध नहीं ली। हादसे के बाद दूसरे दिन खेत मालिक ने गड्ढा भरवा दिया है। यहां मृतक देव की चप्पलें भी पड़ी थीं।
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खेत मालिक ने शुक्रवार सुबह खेत से बारिश का पानी निकालने के लिए गड्ढा खुदवाया था। दोपहर में देव अपने भाइयों के साथ खेलने खेत की ओर निकल गया। मिट्टी के ढेर पर खेलते हुए पैर फिसलने पर पानी से भरे गड्ढे में गिरने से बच्चे की मौत हो गई थी।

मां अब भी बेटे को खाने के लिए बुला रही...
देव घर से निकलते समय मां से खाना बनाने की बात कहकर गया था। बेटे की मौत के बाद मां की हालत बिगड़ गई है। वह बेसुधी में बच्चे को खाने के लिए आवाजें लगा रही है। देव के भाई अनिकेत, आदर्श और समीर उसके वापस आने की बात पूछ रहे हैं।

गड्ढा भरा, सवाल खड़े-
मासूम की मौत के बाद गड्ढे को भर दिया गया। इस घटना ने खेतों में खोदे जाने वाले गहरे गड्ढों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे गड्ढों के चारों ओर बैरिकेडिंग और चेतावनी संकेत लगाना जरूरी है ताकि बच्चों व पशुओं की उन तक पहुंच रोकी जा सके।
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पुलिस को शिकायत का इंतजार, अन्य अधिकारी नियम समझाने में व्यस्त
- डीएसपी नायब सिंह का कहना है कि परिजन की ओर से हमें कोई लिखित शिकायत नहीं मिली है। यदि वे शिकायत देते हैं तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी। किसी की लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।
- खंड कृषि अधिकारी सचिन कांबोज का कहना है कि किसान चार फीट तक खोद सकता है। इससे ज्यादा खोदने पर सुरक्षा इंतजाम करने चाहिए थे। ज्यादा गहराई में खोदने के लिए मृदा लवणता विंग से मंजूरी लेनी होती है।

- मृदा लवणता विंग के एआई विरेंद्र का कहना है कि वाटर रिचार्ज का काम सिंचाई विभाग के पास चला गया है। किसान को गड्ढा खोदते समय व इसके बाद खेत में सुरक्षा इंतजाम करना जरूरी है।
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