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Karnal News: बालाजी मिल का हिस्सेदार फिर पांच दिन के रिमांड पर
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करनाल। तरावड़ी के दो राइस मिलों में हुए 12.60 करोड़ रुपये के धान घोटाले में पुलिस ने बालाजी राइस मिल के हिस्सेदार अरुण से रिमांड के दौरान 52 लाख रुपये की बरामदगी के बाद उसे शुक्रवार को फिर अदालत में पेश किया। उसे पांच दिन के पुलिस रिमांड पर फिर भेज दिया गया है। रिमांड अवधि में पुलिस का मुख्य फोकस घोटाले से जुड़े गायब चावल की बरामदगी, फरार आरोपियों की भूमिका और पूरे नेटवर्क की परतें खोलने पर होगा।
मामले के जांच अधिकारी हरविश कुमार ने बताया कि रिमांड के दौरान आरोपी से हुई पूछताछ में कई महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं। 52 लाख रुपये की रिकवरी के बाद जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि आरोपी से सरकारी धान और उससे तैयार किए गए चावल के निपटान से जुड़ी अहम जानकारियां मिल सकती हैं। इसी आधार पर अदालत से दोबारा रिमांड लिया गया है। मामले में निलंबित डीएफएससी निरीक्षक देवेंद्र, बालाजी राइस मिल के मालिक मोहित और सुरेंद्र तथा विश्वकर्मा राइस मिल के संचालक महेंद्र जांगड़ा अभी भी पुलिस गिरफ्त से बाहर हैं। पुलिस की विशेष टीमें लगातार संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं।
अब जांच का केंद्र बिंदु वह चावल है जो सरकारी धान से तैयार होना था और जिसे सरकार को वापस दिया जाना था। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आवंटित धान को कहां बेचा गया, उससे तैयार चावल का क्या हुआ और उससे अर्जित धनराशि किन-किन लोगों तक पहुंची। जांच टीम अब आरोपी अरुण से उसके अन्य साझेदारों, कर्मचारियों और घोटाले में कथित रूप से शामिल व्यक्तियों के बारे में विस्तृत पूछताछ करेगी। पुलिस यह भी खंगाल रही है कि पूरे मामले में किस स्तर पर मिलीभगत हुई और सरकारी रिकॉर्ड में हेराफेरी कैसे की गई।
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मामले के जांच अधिकारी ने बताया कि आरोपी अरुण को कोर्ट में पेश कर पांच दिन के अतिरिक्त रिमांड पर लिया गया है। इस दौरान पुलिस मामले में अन्य आरोपियों को पकड़ने के साथ चावल बरामदगी का प्रयास करेगी।
36 हजार क्विंटल धान गायब मिलने से खुला था करोड़ों का खेल
यह पूरा मामला उस समय सामने आया था जब जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक (डीएफएससी) कार्यालय की ओर से बालाजी राइस मिल और विश्वकर्मा राइस मिल का भौतिक सत्यापन कराया गया। जांच के दौरान दोनों मिलों से सरकार द्वारा आवंटित करीब 36 हजार क्विंटल धान गायब पाया गया, जिसकी कीमत लगभग 12.60 करोड़ रुपये आंकी गई। जांच रिपोर्ट के आधार पर तरावड़ी थाना पुलिस ने मिल संचालकों तथा खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में भारी अंतर मिलने के बाद पूरे मामले ने राज्य स्तर पर भी सुर्खियां बटोरी थीं।
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बालाजी राइस मिल में 10 हजार क्विंटल धान कम मिला था
जांच में बालाजी राइस मिल में लगभग 10 हजार क्विंटल धान कम पाया गया था, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 3.50 करोड़ रुपये थी। अधिकारियों को निरीक्षण के दौरान वहां नियमित उत्पादन से जुड़ी मशीनरी के बजाय कबाड़ जैसी स्क्रैप मशीनें मिली थीं। इससे संदेह और गहरा गया था कि रिकॉर्ड में दिखाया गया धान वास्तव में मिल परिसर में मौजूद ही नहीं था। जांच में तत्कालीन डीएफएससी निरीक्षक देवेंद्र, सहायक निरीक्षक रामफल, मिल मालिक मोहित और सुरेंद्र के अलावा पार्टनर अरुण की भूमिका भी सामने आई थी। मामले में रामफल पहले ही गिरफ्तार हो चुका है, जबकि अरुण की गिरफ्तारी के बाद अब उससे महत्वपूर्ण पूछताछ जारी है।
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मामले के जांच अधिकारी हरविश कुमार ने बताया कि रिमांड के दौरान आरोपी से हुई पूछताछ में कई महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं। 52 लाख रुपये की रिकवरी के बाद जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि आरोपी से सरकारी धान और उससे तैयार किए गए चावल के निपटान से जुड़ी अहम जानकारियां मिल सकती हैं। इसी आधार पर अदालत से दोबारा रिमांड लिया गया है। मामले में निलंबित डीएफएससी निरीक्षक देवेंद्र, बालाजी राइस मिल के मालिक मोहित और सुरेंद्र तथा विश्वकर्मा राइस मिल के संचालक महेंद्र जांगड़ा अभी भी पुलिस गिरफ्त से बाहर हैं। पुलिस की विशेष टीमें लगातार संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं।
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अब जांच का केंद्र बिंदु वह चावल है जो सरकारी धान से तैयार होना था और जिसे सरकार को वापस दिया जाना था। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आवंटित धान को कहां बेचा गया, उससे तैयार चावल का क्या हुआ और उससे अर्जित धनराशि किन-किन लोगों तक पहुंची। जांच टीम अब आरोपी अरुण से उसके अन्य साझेदारों, कर्मचारियों और घोटाले में कथित रूप से शामिल व्यक्तियों के बारे में विस्तृत पूछताछ करेगी। पुलिस यह भी खंगाल रही है कि पूरे मामले में किस स्तर पर मिलीभगत हुई और सरकारी रिकॉर्ड में हेराफेरी कैसे की गई।
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मामले के जांच अधिकारी ने बताया कि आरोपी अरुण को कोर्ट में पेश कर पांच दिन के अतिरिक्त रिमांड पर लिया गया है। इस दौरान पुलिस मामले में अन्य आरोपियों को पकड़ने के साथ चावल बरामदगी का प्रयास करेगी।
36 हजार क्विंटल धान गायब मिलने से खुला था करोड़ों का खेल
यह पूरा मामला उस समय सामने आया था जब जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक (डीएफएससी) कार्यालय की ओर से बालाजी राइस मिल और विश्वकर्मा राइस मिल का भौतिक सत्यापन कराया गया। जांच के दौरान दोनों मिलों से सरकार द्वारा आवंटित करीब 36 हजार क्विंटल धान गायब पाया गया, जिसकी कीमत लगभग 12.60 करोड़ रुपये आंकी गई। जांच रिपोर्ट के आधार पर तरावड़ी थाना पुलिस ने मिल संचालकों तथा खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में भारी अंतर मिलने के बाद पूरे मामले ने राज्य स्तर पर भी सुर्खियां बटोरी थीं।
बालाजी राइस मिल में 10 हजार क्विंटल धान कम मिला था
जांच में बालाजी राइस मिल में लगभग 10 हजार क्विंटल धान कम पाया गया था, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 3.50 करोड़ रुपये थी। अधिकारियों को निरीक्षण के दौरान वहां नियमित उत्पादन से जुड़ी मशीनरी के बजाय कबाड़ जैसी स्क्रैप मशीनें मिली थीं। इससे संदेह और गहरा गया था कि रिकॉर्ड में दिखाया गया धान वास्तव में मिल परिसर में मौजूद ही नहीं था। जांच में तत्कालीन डीएफएससी निरीक्षक देवेंद्र, सहायक निरीक्षक रामफल, मिल मालिक मोहित और सुरेंद्र के अलावा पार्टनर अरुण की भूमिका भी सामने आई थी। मामले में रामफल पहले ही गिरफ्तार हो चुका है, जबकि अरुण की गिरफ्तारी के बाद अब उससे महत्वपूर्ण पूछताछ जारी है।