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Karnal News: छह दिन बाद भी नहीं हुआ बॉबी का अंतिम संस्कार
Mon, 01 Jun 2026 02:29 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Mon, 01 Jun 2026 02:29 AM IST
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करनाल। इंद्री के नन्हेड़ा गांव के खेतों में संदिग्ध परिस्थितियों में मृत मिले चुरनी गांव निवासी बॉबी के शव का छह दिन बाद भी अंतिम संस्कार नहीं हो सका है। पुलिस छह सप्ताह बाद आने वाली पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने और शव परिजन को सौंपे जाने के बावजूद परिवार ने आरोपियों की गिरफ्तारी तक दाह संस्कार करने से साफ इन्कार कर दिया है।
तीन जून को सिविल अस्पताल के शवगृह के बाहर बुलाई गई महापंचायत पर सभी की निगाहें टिक गई हैं। इसमें समाज के लोगों और परिजन की ओर से आगामी रणनीति तय की जाएगी। बॉबी हत्याकांड अब केवल एक आपराधिक मामले तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सामाजिक और राजनीतिक चर्चा का विषय बनता जा रहा है। परिजन का आरोप है कि प्राथमिकी दर्ज होने के बावजूद नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं की गई, जिसके कारण उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद कमजोर पड़ती नजर आ रही है।
शवगृह के सामने डटा है परिवार
मृतक के परिजन और ग्रामीण रविवार को भी सिविल अस्पताल स्थित शवगृह के बाहर डटे रहे। परिवार का कहना है कि जब तक पुलिस मामले में ठोस कार्रवाई नहीं करती और आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया जाता, तब तक बॉबी का अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा। परिजन का आरोप है कि पुलिस जांच को गलत दिशा में ले जाने का प्रयास कर रही है। इसी कारण समाज के विभिन्न संगठनों और ग्रामीणों को एकजुट कर तीन जून को महापंचायत बुलाने का निर्णय लिया गया है। माना जा रहा है कि इस महापंचायत में जिले के कई गांवों के प्रतिनिधि और सामाजिक संगठन शामिल हो सकते हैं।
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चुरनी गांव निवासी बॉबी 25 मई की सुबह घर से बाइक पर निकला था। अगले दिन उसका शव नन्हेड़ा गांव के खेतों में मिला। मामले में मृतक के भाई अभिषेक की शिकायत पर भाजपा के संगोहा मंडल अध्यक्ष सहित छह लोगों के खिलाफ हत्या समेत विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। इंद्री के डीएसपी सतीश गौतम का कहना है कि अब तक हुए पोस्टमार्टम में मौत का स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है। शरीर से लिए गए नमूनों की फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट आने के बाद ही वास्तविक कारणों का पता लग सकेगा।
दो पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने बढ़ाया शक
परिवार के संदेह की सबसे बड़ी वजह सिविल अस्पताल और पीजीआई चंडीगढ़ में हुए पोस्टमार्टम के दौरान सामने आई अलग-अलग बातें हैं। परिजन के अनुसार, करनाल सिविल अस्पताल में प्रारंभिक पोस्टमार्टम के दौरान उन्हें बताया गया था कि शव पर कोई स्पष्ट चोट के निशान नहीं हैं। वहीं पीजीआई चंडीगढ़ में शुक्रवार को हुए पोस्टमार्टम के बाद डॉक्टरों ने सिर, पैर और शरीर के अन्य हिस्सों पर चोटों की बात कही। साथ ही करंट लगने की आशंका भी जताई गई। शरीर के जले हुए हिस्सों के नमूने जांच के लिए सुरक्षित किए गए हैं।
इसी विरोधाभास के चलते परिवार को आशंका है कि मामले की वास्तविकता छिपाने का प्रयास किया जा रहा है। परिजन का कहना है कि यदि मौत स्वाभाविक थी तो शरीर पर चोट और जलने जैसे निशान कैसे मिले।
करंट देकर हत्या की आशंका जता रहा परिवार
मृतक के भाई अभिषेक का कहना है कि बॉबी की जुराबें जली हुई मिली थीं। इससे परिवार को शक है कि उसकी हत्या बिजली का करंट देकर की गई है। उनका दावा है कि हत्या कहीं और की गई और बाद में शव को नन्हेड़ा गांव के खेतों में फेंक दिया गया। परिवार का कहना है कि पीजीआई की फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि शरीर पर मिले जले हुए निशान करंट के हैं किसी रासायनिक पदार्थ के हैं या किसी अन्य कारण से बने हैं।
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तीन जून को सिविल अस्पताल के शवगृह के बाहर बुलाई गई महापंचायत पर सभी की निगाहें टिक गई हैं। इसमें समाज के लोगों और परिजन की ओर से आगामी रणनीति तय की जाएगी। बॉबी हत्याकांड अब केवल एक आपराधिक मामले तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सामाजिक और राजनीतिक चर्चा का विषय बनता जा रहा है। परिजन का आरोप है कि प्राथमिकी दर्ज होने के बावजूद नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं की गई, जिसके कारण उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद कमजोर पड़ती नजर आ रही है।
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शवगृह के सामने डटा है परिवार
मृतक के परिजन और ग्रामीण रविवार को भी सिविल अस्पताल स्थित शवगृह के बाहर डटे रहे। परिवार का कहना है कि जब तक पुलिस मामले में ठोस कार्रवाई नहीं करती और आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया जाता, तब तक बॉबी का अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा। परिजन का आरोप है कि पुलिस जांच को गलत दिशा में ले जाने का प्रयास कर रही है। इसी कारण समाज के विभिन्न संगठनों और ग्रामीणों को एकजुट कर तीन जून को महापंचायत बुलाने का निर्णय लिया गया है। माना जा रहा है कि इस महापंचायत में जिले के कई गांवों के प्रतिनिधि और सामाजिक संगठन शामिल हो सकते हैं।
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चुरनी गांव निवासी बॉबी 25 मई की सुबह घर से बाइक पर निकला था। अगले दिन उसका शव नन्हेड़ा गांव के खेतों में मिला। मामले में मृतक के भाई अभिषेक की शिकायत पर भाजपा के संगोहा मंडल अध्यक्ष सहित छह लोगों के खिलाफ हत्या समेत विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। इंद्री के डीएसपी सतीश गौतम का कहना है कि अब तक हुए पोस्टमार्टम में मौत का स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है। शरीर से लिए गए नमूनों की फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट आने के बाद ही वास्तविक कारणों का पता लग सकेगा।
दो पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने बढ़ाया शक
परिवार के संदेह की सबसे बड़ी वजह सिविल अस्पताल और पीजीआई चंडीगढ़ में हुए पोस्टमार्टम के दौरान सामने आई अलग-अलग बातें हैं। परिजन के अनुसार, करनाल सिविल अस्पताल में प्रारंभिक पोस्टमार्टम के दौरान उन्हें बताया गया था कि शव पर कोई स्पष्ट चोट के निशान नहीं हैं। वहीं पीजीआई चंडीगढ़ में शुक्रवार को हुए पोस्टमार्टम के बाद डॉक्टरों ने सिर, पैर और शरीर के अन्य हिस्सों पर चोटों की बात कही। साथ ही करंट लगने की आशंका भी जताई गई। शरीर के जले हुए हिस्सों के नमूने जांच के लिए सुरक्षित किए गए हैं।
इसी विरोधाभास के चलते परिवार को आशंका है कि मामले की वास्तविकता छिपाने का प्रयास किया जा रहा है। परिजन का कहना है कि यदि मौत स्वाभाविक थी तो शरीर पर चोट और जलने जैसे निशान कैसे मिले।
करंट देकर हत्या की आशंका जता रहा परिवार
मृतक के भाई अभिषेक का कहना है कि बॉबी की जुराबें जली हुई मिली थीं। इससे परिवार को शक है कि उसकी हत्या बिजली का करंट देकर की गई है। उनका दावा है कि हत्या कहीं और की गई और बाद में शव को नन्हेड़ा गांव के खेतों में फेंक दिया गया। परिवार का कहना है कि पीजीआई की फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि शरीर पर मिले जले हुए निशान करंट के हैं किसी रासायनिक पदार्थ के हैं या किसी अन्य कारण से बने हैं।