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Karnal News: भैणी खुर्द के नजदीक वंदे भारत समेत तीन ट्रेनों पर बच्चों ने बरसाए पत्थर, टूटे शीशे
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सी 18 आपातकालीन खिड़की का टूटा हुआ शीशा
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। करनाल और भैणी खुद रेलवे स्टेशन के बीच तीन बच्चों ने रविवार को ट्रेन नंबर 20977 वंदे भारत, 12926 पश्चिम सुपरफास्ट एक्सप्रेस और 15708 आम्रपाली एक्सप्रेस पर पत्थर फेंके। तीनों ट्रेनों के शीशे टूट गए। गनीमत रही कि यात्रियों को गंभीर चोटें नहीं आईं। रेलवे सुरक्षा बल ने मौके स उचाना गांव के रहने वाले तीन बच्चों को काबू किया। पूछताछ में तीनों ने स्वीकार किया कि उन्होंने खेल-खेल में निशाना लगाते हुए ट्रेन पर पत्थर फेंके थे।
आरपीएफ के अधिकारियों ने बच्चों को समझाया। बॉन्ड भरवाने के बाद उन्हें परिजन को सुपुर्द कर दिया गया। तीनों बच्चों की उम्र 8, 9 और 11 साल है। पहले भी पांच बार ऐसी वारदात हो चुकी हैं। आरपीएफ ने पिछले तीन माह में सात ट्रेनों पर पत्थर बरसाने वाले पांच बच्चों को पकड़ा है। बाद में उन्हें परिजन से बॉन्ड भरवाने के बाद सुपुर्द कर दिया गया। आरपीएफ के अनुसार बच्चे वंदे भारत या अन्य तेज रफ्तार से गुजरने वाली ट्रेनों पर ही रेलवे ट्रैक से पत्थर उठाकर निशाना लगाते थे।
दिल्ली कंट्रोल रूम से मिली सूचना
करनाल रेलवे स्टेशन से रेलवे सुरक्षा बल अधिकारी सुरेंद्र कुमार ने बताया कि आरपीएफ को रविवार को दिल्ली कंट्रोल रूप से सूचना मिली कि गाड़ी संख्या 20977, 12926 व 15708 पर पत्थरबाजी की गई है। इससे इन ट्रेनों के सात शीशे टूटे हैं। सूचना पर एएसआई राजेश कुमार घटनास्थल पर पहुंचे। टीम को घटनास्थल पर नहर के नजदीक रेलवे लाइनों के पास तीन बच्चे मिले। पूछताछ की तो उन्होंने वारदात कबूल ली।
पानीपत के बच्चे भी शामिल
अब से पहले 15 जनवरी 2026 को गाड़ी संख्या 22477 और 22487 वंदे भारत पर पांच बच्चों ने पत्थर बरसाए थे। पकड़े जाने के बाद उन्होंने 2 नवंबर 2025 को गाड़ी संख्या 22487 वंदे भारत पर और 25 नवंबर 2025 को गाड़ी संख्या 22478 वंदे भारत पर, 6 जनवरी 2026 को गाड़ी संख्या 22477 वंदे भारत और 12 जनवरी 2026 को गाड़ी संख्या 22488 व 20977 वंदे भारत पर पत्थर बरसाने की बात को स्वीकार किया था। इनमें से चार बच्चे पानीपत के मच्छरौली गांव में किराये पर रहने वाले थे। उनका एक अन्य साथी भी था।
लगातार कर रहे सर्वे : प्रभारी
आरपीएफ थाना प्रभारी सुरेंद्र ने बताया कि रेलवे लाइनों के साथ लगते गांव व बस्तियों में लोगों को पत्थरबाजी न करने के बारे में जागरूक किया जा रहा है। बाल अपचारियों के अभिभावकों को चौकी परिसर में बुलाया गया और बच्चों के कृत्य से अवगत कराते हुए बताया कि उनके बच्चों द्वारा गाड़ियों पर पत्थर मारना जघन्य अपराध की श्रेणी में आता है।
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आरपीएफ के अधिकारियों ने बच्चों को समझाया। बॉन्ड भरवाने के बाद उन्हें परिजन को सुपुर्द कर दिया गया। तीनों बच्चों की उम्र 8, 9 और 11 साल है। पहले भी पांच बार ऐसी वारदात हो चुकी हैं। आरपीएफ ने पिछले तीन माह में सात ट्रेनों पर पत्थर बरसाने वाले पांच बच्चों को पकड़ा है। बाद में उन्हें परिजन से बॉन्ड भरवाने के बाद सुपुर्द कर दिया गया। आरपीएफ के अनुसार बच्चे वंदे भारत या अन्य तेज रफ्तार से गुजरने वाली ट्रेनों पर ही रेलवे ट्रैक से पत्थर उठाकर निशाना लगाते थे।
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दिल्ली कंट्रोल रूम से मिली सूचना
करनाल रेलवे स्टेशन से रेलवे सुरक्षा बल अधिकारी सुरेंद्र कुमार ने बताया कि आरपीएफ को रविवार को दिल्ली कंट्रोल रूप से सूचना मिली कि गाड़ी संख्या 20977, 12926 व 15708 पर पत्थरबाजी की गई है। इससे इन ट्रेनों के सात शीशे टूटे हैं। सूचना पर एएसआई राजेश कुमार घटनास्थल पर पहुंचे। टीम को घटनास्थल पर नहर के नजदीक रेलवे लाइनों के पास तीन बच्चे मिले। पूछताछ की तो उन्होंने वारदात कबूल ली।
पानीपत के बच्चे भी शामिल
अब से पहले 15 जनवरी 2026 को गाड़ी संख्या 22477 और 22487 वंदे भारत पर पांच बच्चों ने पत्थर बरसाए थे। पकड़े जाने के बाद उन्होंने 2 नवंबर 2025 को गाड़ी संख्या 22487 वंदे भारत पर और 25 नवंबर 2025 को गाड़ी संख्या 22478 वंदे भारत पर, 6 जनवरी 2026 को गाड़ी संख्या 22477 वंदे भारत और 12 जनवरी 2026 को गाड़ी संख्या 22488 व 20977 वंदे भारत पर पत्थर बरसाने की बात को स्वीकार किया था। इनमें से चार बच्चे पानीपत के मच्छरौली गांव में किराये पर रहने वाले थे। उनका एक अन्य साथी भी था।
लगातार कर रहे सर्वे : प्रभारी
आरपीएफ थाना प्रभारी सुरेंद्र ने बताया कि रेलवे लाइनों के साथ लगते गांव व बस्तियों में लोगों को पत्थरबाजी न करने के बारे में जागरूक किया जा रहा है। बाल अपचारियों के अभिभावकों को चौकी परिसर में बुलाया गया और बच्चों के कृत्य से अवगत कराते हुए बताया कि उनके बच्चों द्वारा गाड़ियों पर पत्थर मारना जघन्य अपराध की श्रेणी में आता है।

सी 18 आपातकालीन खिड़की का टूटा हुआ शीशा
