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Karnal News: काउंसिलिंग और उपचार से बदल रही जिंदगी, जिले में 1100 लोगों ने छोड़ा तंबाकू का सेवन
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जिला नागरिक अस्पताल का नशा मुक्ति केंद्र।
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राम सारस्वत
करनाल। विश्व तंबाकू निषेध दिवस के अवसर पर जहां पूरे देश में तंबाकू और नशे के दुष्प्रभावों के प्रति लोगों को जागरूक किया जा रहा है, वहीं जिले से एक सकारात्मक और प्रेरणादायक तस्वीर सामने आई है। जिला नागरिक अस्पताल स्थित नशा मुक्ति केंद्र की पहल से बड़ी संख्या में लोग तंबाकू और अन्य नशों की लत से बाहर निकलने में सफल हो रहे हैं।
आंकड़े बताते हैं कि केंद्र से उपचार लेने वाले 2400 लोगों में से करीब 1100 लोग केवल काउंसिलिंग के माध्यम से तंबाकू का सेवन छोड़ चुके हैं, जबकि 1300 मरीज दवाओं और चिकित्सकीय उपचार की सहायता से नशे की लत से मुक्ति पाने का प्रयास कर रहे हैं।
नशा मुक्ति केंद्र की इंचार्ज डॉ. सौभाग्य कौशिक के अनुसार नशे की लत केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को ही प्रभावित नहीं करती, बल्कि उसके परिवार, सामाजिक जीवन और आर्थिक स्थिति पर भी गहरा असर डालती है। ऐसे में जिला नागरिक अस्पताल का नशा मुक्ति केंद्र लोगों के लिए नई उम्मीद बनकर उभरा है। यहां विशेषज्ञ चिकित्सकों और प्रशिक्षित काउंसलरों की टीम मरीजों को न केवल उपचार उपलब्ध करवा रही है, बल्कि मानसिक रूप से मजबूत बनाकर नशा छोड़ने के लिए प्रेरित भी कर रही है।
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काउंसिलिंग से मिल रही सफलता
डॉ. सौभाग्य ने बताया कि तंबाकू की लत छोड़ने में मानसिक दृढ़ता सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसी कारण नशा मुक्ति केंद्र में काउंसिलिंग को प्राथमिकता दी जा रही है। नियमित परामर्श, परिवार की भागीदारी और व्यवहार परिवर्तन की तकनीकों के माध्यम से अब तक 1100 लोग तंबाकू का सेवन पूरी तरह छोड़ने में सफल रहे हैं। केंद्र में उपचार ले रहे करीब 1300 मरीजों को चिकित्सकों की निगरानी में दवाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं।
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केस-1: 15 साल बाद मिल सकी मुक्ति
करनाल के 42 वर्षीय राजेश पिछले 15 वर्षों से गुटखा और तंबाकू का सेवन कर रहे थे। लगातार सेवन के कारण उनके दांत और मसूड़ों में गंभीर समस्याएं होने लगी थीं। परिवार के समझाने पर उन्होंने जिला नागरिक अस्पताल के नशा मुक्ति केंद्र से संपर्क किया। करीब तीन माह तक नियमित काउंसिलिंग और चिकित्सकीय सलाह लेने के बाद उन्होंने तंबाकू का सेवन पूरी तरह छोड़ दिया। अब वे स्वयं भी अन्य लोगों को नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
केस-2: युवा ने छोड़ी निकोटीन की लत
जिले के एक 24 वर्षीय युवक को कॉलेज के दिनों में सिगरेट पीने की आदत लग गई थी। धीरे-धीरे उसकी निर्भरता इतनी बढ़ गई कि वह दिन में कई बार धूम्रपान करने लगा। नशा मुक्ति केंद्र में उपचार शुरू करने के बाद उसे काउंसिलिंग और दवाओं की सहायता दी गई। लगभग चार माह के उपचार के बाद युवक ने सिगरेट छोड़ दी और अब वह नियमित रूप से अपनी पढ़ाई और नौकरी पर ध्यान दे रहा है।
केस-3: परिवार के सहयोग से जीता में
55 वर्षीय बुद्धसैन पिछले कई वर्षों से तंबाकू और बीड़ी का सेवन कर रहे थे। स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ने पर उनके परिवार ने उन्हें नशा मुक्ति केंद्र पहुंचाया। चिकित्सकों की निगरानी में दवाओं और नियमित काउंसिलिंग का सहारा लिया गया। करीब छह माह की प्रक्रिया के बाद उन्होंने नशे की आदत छोड़ दी। उनका कहना है कि परिवार के सहयोग और डॉक्टरों के मार्गदर्शन ने उन्हें नया जीवन दिया है।
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करनाल। विश्व तंबाकू निषेध दिवस के अवसर पर जहां पूरे देश में तंबाकू और नशे के दुष्प्रभावों के प्रति लोगों को जागरूक किया जा रहा है, वहीं जिले से एक सकारात्मक और प्रेरणादायक तस्वीर सामने आई है। जिला नागरिक अस्पताल स्थित नशा मुक्ति केंद्र की पहल से बड़ी संख्या में लोग तंबाकू और अन्य नशों की लत से बाहर निकलने में सफल हो रहे हैं।
आंकड़े बताते हैं कि केंद्र से उपचार लेने वाले 2400 लोगों में से करीब 1100 लोग केवल काउंसिलिंग के माध्यम से तंबाकू का सेवन छोड़ चुके हैं, जबकि 1300 मरीज दवाओं और चिकित्सकीय उपचार की सहायता से नशे की लत से मुक्ति पाने का प्रयास कर रहे हैं।
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नशा मुक्ति केंद्र की इंचार्ज डॉ. सौभाग्य कौशिक के अनुसार नशे की लत केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को ही प्रभावित नहीं करती, बल्कि उसके परिवार, सामाजिक जीवन और आर्थिक स्थिति पर भी गहरा असर डालती है। ऐसे में जिला नागरिक अस्पताल का नशा मुक्ति केंद्र लोगों के लिए नई उम्मीद बनकर उभरा है। यहां विशेषज्ञ चिकित्सकों और प्रशिक्षित काउंसलरों की टीम मरीजों को न केवल उपचार उपलब्ध करवा रही है, बल्कि मानसिक रूप से मजबूत बनाकर नशा छोड़ने के लिए प्रेरित भी कर रही है।
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काउंसिलिंग से मिल रही सफलता
डॉ. सौभाग्य ने बताया कि तंबाकू की लत छोड़ने में मानसिक दृढ़ता सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसी कारण नशा मुक्ति केंद्र में काउंसिलिंग को प्राथमिकता दी जा रही है। नियमित परामर्श, परिवार की भागीदारी और व्यवहार परिवर्तन की तकनीकों के माध्यम से अब तक 1100 लोग तंबाकू का सेवन पूरी तरह छोड़ने में सफल रहे हैं। केंद्र में उपचार ले रहे करीब 1300 मरीजों को चिकित्सकों की निगरानी में दवाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं।
केस-1: 15 साल बाद मिल सकी मुक्ति
करनाल के 42 वर्षीय राजेश पिछले 15 वर्षों से गुटखा और तंबाकू का सेवन कर रहे थे। लगातार सेवन के कारण उनके दांत और मसूड़ों में गंभीर समस्याएं होने लगी थीं। परिवार के समझाने पर उन्होंने जिला नागरिक अस्पताल के नशा मुक्ति केंद्र से संपर्क किया। करीब तीन माह तक नियमित काउंसिलिंग और चिकित्सकीय सलाह लेने के बाद उन्होंने तंबाकू का सेवन पूरी तरह छोड़ दिया। अब वे स्वयं भी अन्य लोगों को नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
केस-2: युवा ने छोड़ी निकोटीन की लत
जिले के एक 24 वर्षीय युवक को कॉलेज के दिनों में सिगरेट पीने की आदत लग गई थी। धीरे-धीरे उसकी निर्भरता इतनी बढ़ गई कि वह दिन में कई बार धूम्रपान करने लगा। नशा मुक्ति केंद्र में उपचार शुरू करने के बाद उसे काउंसिलिंग और दवाओं की सहायता दी गई। लगभग चार माह के उपचार के बाद युवक ने सिगरेट छोड़ दी और अब वह नियमित रूप से अपनी पढ़ाई और नौकरी पर ध्यान दे रहा है।
केस-3: परिवार के सहयोग से जीता में
55 वर्षीय बुद्धसैन पिछले कई वर्षों से तंबाकू और बीड़ी का सेवन कर रहे थे। स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ने पर उनके परिवार ने उन्हें नशा मुक्ति केंद्र पहुंचाया। चिकित्सकों की निगरानी में दवाओं और नियमित काउंसिलिंग का सहारा लिया गया। करीब छह माह की प्रक्रिया के बाद उन्होंने नशे की आदत छोड़ दी। उनका कहना है कि परिवार के सहयोग और डॉक्टरों के मार्गदर्शन ने उन्हें नया जीवन दिया है।