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Karnal News: डॉक्टर इंसाफ और मरीज मांगते रहे उपचार
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डॉक्टर इंसाफ और मरीज मांगते रहे उपचार
- फोटो : डॉक्टर इंसाफ और मरीज मांगते रहे उपचार
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- हड़ताल का तीसरा दिन : शहर से गांव तक ओपीडी रही बंद, पर्ची कटी न दवा मिली, 3500 से ज्यादा मरीज दिनभर भटकते रहे
- पंजीकरण काउंटर और दवा विंडो पर नोटिस, तबियत बिगड़ने पर कुर्सियों और बरामदों में लेटे रहे मरीज
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। घरौंडा के सरकारी अस्पताल में एसएचओ और डॉक्टर के बीच हुए विवाद के बाद मरीजों की परेशानी बढ़ गई है। डॉक्टर जहां पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई के लिए इंसाफ मांग रहे हैं वहीं, हड़ताल के कारण मरीज उपचार के लिए भटक रहे हैं। तीन दिन से डाॅक्टरों की हड़ताल जारी है लेकिन शासन और प्रशासन समाधान निकालने में लाचार साबित हो रहा है।
शनिवार को हड़ताल के तीसरे दिन जिला नागरिक अस्पताल और अन्य स्वास्थ्य केंद्रों पर सेवाएं पूरी तरह से बंद रहीं। शहर से गांव तक ओपीडी बंद होने से मरीजों को उपचार नहीं मिल पाया। सुबह न तो पंजीकरण काउंटर पर पर्ची बन पाई न ही पूर्व में उपचारित मरीजों को दवा मिली। ऐसे में जिले में करीब 3500 से ज्यादा मरीज दर्द लेकर भटकते नजर आए।
हालात यह रहे कि अस्पतालों में सभी जगह एक ही नोटिस लगा दिखाई दिया कि हड़ताल के कारण अस्पताल बंद हैं। ऐसे में गांव व ज्यादा दूर से पहुंचे मरीज कुर्सी, तख्त और सीमेंट के बैंचों पर लेटे नजर आए। जब उनके तीमारदार पहुंचे तो वे ही उन्हें मेडिकल कॉलेज या अन्य अस्पताल लेकर गए।
अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को निभानी चाहिए जिम्मेदारी : हरविंद्र कल्याण
विधानसभा के अध्यक्ष हरविन्द्र कल्याण का कहना है कि यह घटना दुर्भाग्यपूर्ण है। हर अधिकारी- कर्मचारी या जनप्रतिनिधि का आचरण अच्छा होना चाहिए। लोगों के प्रति जिम्मेदारी सभी की है, उसे ठीक से निभाना चाहिए। वे अपील करते हैं प्रशासन मामले का जल्द समाधान निकाले। सेवा में ऐसी कोई बाधा नहीं आनी चाहिए जिससे कि मरीजों को परेशानी हो।
पांचों पुलिसकर्मियों पर हो कार्रवाई : डॉ. दीपक
डॉक्टर एसोसिएशन के प्रवक्ता डॉ. दीपक गोयल का कहना है कि इस प्रकरण में जो कार्रवाई होनी चाहिए थी, वह नहीं हुई। पुलिस ने केवल निरीक्षक थाना प्रभारी को निलंबित किया है। जबकि प्रकरण में शामिल पांचों पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई होनी चाहिए थी। हमारी हड़ताल तब तक जारी रहेगी, जब तक इन सभी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करके गिरफ्तार नहीं किया जाता। पहले घरौंडा, फिर जिला और अब प्रदेश स्तर पर हड़ताल की गई है। सरकार को भी संज्ञान लेना चाहिए। अभी तक की बैठकों में कोई समाधान या सहमति नहीं बनी है।
मरीजों का दर्द
हालात : तीन दिन से बच्चे की आंखें लाल, कुत्ते के काटे मरीज को भी नहीं लगा टीका
बच्चे की आंखें दो दिन से लाल, पर्ची नहीं कटी
शिव कॉलोनी निवासी रेखा अपने बेटे शिवम को लेकर अस्पताल पहुंची थी। बच्चे की आंखें दो दिन से लाल हैं और लगातार पानी आ रहा है। सुबह से अस्पताल में बैठकर डॉक्टर को दिखाने का इंतजार कर रही है लेकिन पर्ची ही नहीं कटी। ऐसे में बच्चे का इलाज नहीं हो पाया और वह दर्द व जलन से परेशान है।
दूसरा टीका लगना था, इमरजेंसी में भी नहीं लगाया
सेक्टर-13 निवासी बबीता ने बताया कि उसे कुछ दिन पहले कुत्ते ने काट लिया था। डॉक्टरों ने 7 मार्च को दूसरा इंजेक्शन लगवाने के लिए बुलाया था। वह निर्धारित तारीख पर अस्पताल पहुंचीं लेकिन इंजेक्शन नहीं लगाया गया। इमरजेंसी में जाने के बाद भी किसी ने सुनवाई नहीं की, जबकि यह टीका तय समय पर लगना जरूरी होता है।
मेडिकल स्टोर से लेनी पड़ेगी दवाई
कलवेहड़ी निवासी गीता पेट दर्द की समस्या के कारण पहले पर्ची बनवाकर दवाइयां लेने के लिए अस्पताल आईं थी। उन्होंने बताया कि ओपीडी बंद होने के कारण दवाइयां नहीं मिल सकीं जबकि इतनी दूर से आए हैं और मजबूरन मेडिकल स्टोर से लेनी पड़ेंगी।
बिना इलाज वापस जा रहे हैं
उचाना निवासी सुमन अपनी सास को हड्डी के डॉक्टर को दिखाने के लिए अस्पताल लेकर आईं थी। उन्होंने बताया कि सास के पैर में दस दिनों से दर्द है और चलना भी मुश्किल हो रहा है। काफी देर तक पर्ची कटवाने का इंतजार किया, लेकिन पर्ची ही नहीं कटी। अंत में बिना इलाज वापस जाना पड़ा।
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- पंजीकरण काउंटर और दवा विंडो पर नोटिस, तबियत बिगड़ने पर कुर्सियों और बरामदों में लेटे रहे मरीज
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। घरौंडा के सरकारी अस्पताल में एसएचओ और डॉक्टर के बीच हुए विवाद के बाद मरीजों की परेशानी बढ़ गई है। डॉक्टर जहां पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई के लिए इंसाफ मांग रहे हैं वहीं, हड़ताल के कारण मरीज उपचार के लिए भटक रहे हैं। तीन दिन से डाॅक्टरों की हड़ताल जारी है लेकिन शासन और प्रशासन समाधान निकालने में लाचार साबित हो रहा है।
शनिवार को हड़ताल के तीसरे दिन जिला नागरिक अस्पताल और अन्य स्वास्थ्य केंद्रों पर सेवाएं पूरी तरह से बंद रहीं। शहर से गांव तक ओपीडी बंद होने से मरीजों को उपचार नहीं मिल पाया। सुबह न तो पंजीकरण काउंटर पर पर्ची बन पाई न ही पूर्व में उपचारित मरीजों को दवा मिली। ऐसे में जिले में करीब 3500 से ज्यादा मरीज दर्द लेकर भटकते नजर आए।
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हालात यह रहे कि अस्पतालों में सभी जगह एक ही नोटिस लगा दिखाई दिया कि हड़ताल के कारण अस्पताल बंद हैं। ऐसे में गांव व ज्यादा दूर से पहुंचे मरीज कुर्सी, तख्त और सीमेंट के बैंचों पर लेटे नजर आए। जब उनके तीमारदार पहुंचे तो वे ही उन्हें मेडिकल कॉलेज या अन्य अस्पताल लेकर गए।
अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को निभानी चाहिए जिम्मेदारी : हरविंद्र कल्याण
विधानसभा के अध्यक्ष हरविन्द्र कल्याण का कहना है कि यह घटना दुर्भाग्यपूर्ण है। हर अधिकारी- कर्मचारी या जनप्रतिनिधि का आचरण अच्छा होना चाहिए। लोगों के प्रति जिम्मेदारी सभी की है, उसे ठीक से निभाना चाहिए। वे अपील करते हैं प्रशासन मामले का जल्द समाधान निकाले। सेवा में ऐसी कोई बाधा नहीं आनी चाहिए जिससे कि मरीजों को परेशानी हो।
पांचों पुलिसकर्मियों पर हो कार्रवाई : डॉ. दीपक
डॉक्टर एसोसिएशन के प्रवक्ता डॉ. दीपक गोयल का कहना है कि इस प्रकरण में जो कार्रवाई होनी चाहिए थी, वह नहीं हुई। पुलिस ने केवल निरीक्षक थाना प्रभारी को निलंबित किया है। जबकि प्रकरण में शामिल पांचों पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई होनी चाहिए थी। हमारी हड़ताल तब तक जारी रहेगी, जब तक इन सभी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करके गिरफ्तार नहीं किया जाता। पहले घरौंडा, फिर जिला और अब प्रदेश स्तर पर हड़ताल की गई है। सरकार को भी संज्ञान लेना चाहिए। अभी तक की बैठकों में कोई समाधान या सहमति नहीं बनी है।
मरीजों का दर्द
हालात : तीन दिन से बच्चे की आंखें लाल, कुत्ते के काटे मरीज को भी नहीं लगा टीका
बच्चे की आंखें दो दिन से लाल, पर्ची नहीं कटी
शिव कॉलोनी निवासी रेखा अपने बेटे शिवम को लेकर अस्पताल पहुंची थी। बच्चे की आंखें दो दिन से लाल हैं और लगातार पानी आ रहा है। सुबह से अस्पताल में बैठकर डॉक्टर को दिखाने का इंतजार कर रही है लेकिन पर्ची ही नहीं कटी। ऐसे में बच्चे का इलाज नहीं हो पाया और वह दर्द व जलन से परेशान है।
दूसरा टीका लगना था, इमरजेंसी में भी नहीं लगाया
सेक्टर-13 निवासी बबीता ने बताया कि उसे कुछ दिन पहले कुत्ते ने काट लिया था। डॉक्टरों ने 7 मार्च को दूसरा इंजेक्शन लगवाने के लिए बुलाया था। वह निर्धारित तारीख पर अस्पताल पहुंचीं लेकिन इंजेक्शन नहीं लगाया गया। इमरजेंसी में जाने के बाद भी किसी ने सुनवाई नहीं की, जबकि यह टीका तय समय पर लगना जरूरी होता है।
मेडिकल स्टोर से लेनी पड़ेगी दवाई
कलवेहड़ी निवासी गीता पेट दर्द की समस्या के कारण पहले पर्ची बनवाकर दवाइयां लेने के लिए अस्पताल आईं थी। उन्होंने बताया कि ओपीडी बंद होने के कारण दवाइयां नहीं मिल सकीं जबकि इतनी दूर से आए हैं और मजबूरन मेडिकल स्टोर से लेनी पड़ेंगी।
बिना इलाज वापस जा रहे हैं
उचाना निवासी सुमन अपनी सास को हड्डी के डॉक्टर को दिखाने के लिए अस्पताल लेकर आईं थी। उन्होंने बताया कि सास के पैर में दस दिनों से दर्द है और चलना भी मुश्किल हो रहा है। काफी देर तक पर्ची कटवाने का इंतजार किया, लेकिन पर्ची ही नहीं कटी। अंत में बिना इलाज वापस जाना पड़ा।