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Karnal News: फ्लाइंग शुल्क बढ़ाया, प्रशिक्षु कॉमर्शियल पायलटों में रोष
Tue, 02 Jun 2026 01:48 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Tue, 02 Jun 2026 01:48 AM IST
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फीस बढ़ाई जाने को लेकर प्रदर्शन करते विद्यार्थी स्वयं
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करनाल। हरियाणा इंस्टिट्यूट ऑफ सिविल एविएशन ने प्रशिक्षु कॉमर्शियल पायलट की फीस में बिना पूर्व सूचना के बढ़ोतरी कर दी है। इससे ट्रेनी पायलटों में रोष है। इसे लेकर सोमवार को उन्होंने एविएशन क्लब के बाहर प्रदर्शन भी किया और सीएम के नाम पर पत्र भी लिखा। उन्होंने चेताया कि यदि उनकी दोगुनी हुई फीस को वापस नहीं लिया तो वे एक सप्ताह तक धरना देंगे।
ट्रेनी पायलटों का कहना है कि उनके कोर्स में 200 घंटे की फ्लाइंग होती है। 10 हजार रुपये प्रति घंटा फ्लाइंग के हिसाब से पूरे कोर्स की 20 लाख रुपये फीस ली जाती है। कोर्स 18 से 24 माह में पूरा करना होता है। अब तक वे 120 घंटे ट्रेनिंग कर चुके हैं, अब संस्थान की ओर से 10 हजार के बजाय उनके लिंक हुए बैंक खाते से 20 हजार रुपये प्रति घंटे के हिसाब से शुल्क काटा जा रहा है। लगातार 12 मई से इतना शुल्क कटने से कुछ प्रशिक्षुओं के बैंक खाते माइनस में भी चले गए हैं। उनका कहना है कि संस्थान की ओर से अचानक बिना सूचना के इस तरह से फीस बढ़ाना, उन्हें कोर्स से बाहर करने के समान है। क्योंकि वे आर्थिक स्थिति के कारण दोगुनी फीस देने में सक्षम नहीं हैं।
42 लाख रुपये का हुआ कोर्स
प्रशिक्षु अमन, रीना और अन्यों ने कहा कि उनके कोर्स की यूं तो फीस 20 लाख रुपये है। अब बढ़ोतरी होने से फीस 42 लाख रुपये तक पहुंच जाएगी। उनका कहना है कि 2023 में कोर्स की शुरुआत के समय आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए ही दाखिला लिया था, यदि पता होता कि फीस बढ़ाई जाएगी तो वे दाखिला न लेते।
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सीपीएल लाइसेंस के लिए जरूरी है 200 घंटे की फ्लाइंग
प्रशिक्षुओं का कहना है कि कोर्स की शर्तें और नियम के अनुसार पायलट बनने के लिए 200 घंटे की फ्लाइंग जरूरी है। संस्थान की ओर से प्रशिक्षण में फ्लाइंग के घंटे कभी नहीं बढ़ाए गए, अब फीस बढ़ाई है। इस 200 घंटे के प्रशिक्षण के बिना उन्हें सीपीएल लाइसेंस नहीं मिलेगा। अब वे फीस बढ़ोतरी के कारण 60 से 80 घंटे की शेष बची फ्लाइंग को पूरा करने में असमर्थ हैं।
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ट्रेनी पायलटों का कहना है कि उनके कोर्स में 200 घंटे की फ्लाइंग होती है। 10 हजार रुपये प्रति घंटा फ्लाइंग के हिसाब से पूरे कोर्स की 20 लाख रुपये फीस ली जाती है। कोर्स 18 से 24 माह में पूरा करना होता है। अब तक वे 120 घंटे ट्रेनिंग कर चुके हैं, अब संस्थान की ओर से 10 हजार के बजाय उनके लिंक हुए बैंक खाते से 20 हजार रुपये प्रति घंटे के हिसाब से शुल्क काटा जा रहा है। लगातार 12 मई से इतना शुल्क कटने से कुछ प्रशिक्षुओं के बैंक खाते माइनस में भी चले गए हैं। उनका कहना है कि संस्थान की ओर से अचानक बिना सूचना के इस तरह से फीस बढ़ाना, उन्हें कोर्स से बाहर करने के समान है। क्योंकि वे आर्थिक स्थिति के कारण दोगुनी फीस देने में सक्षम नहीं हैं।
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42 लाख रुपये का हुआ कोर्स
प्रशिक्षु अमन, रीना और अन्यों ने कहा कि उनके कोर्स की यूं तो फीस 20 लाख रुपये है। अब बढ़ोतरी होने से फीस 42 लाख रुपये तक पहुंच जाएगी। उनका कहना है कि 2023 में कोर्स की शुरुआत के समय आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए ही दाखिला लिया था, यदि पता होता कि फीस बढ़ाई जाएगी तो वे दाखिला न लेते।
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सीपीएल लाइसेंस के लिए जरूरी है 200 घंटे की फ्लाइंग
प्रशिक्षुओं का कहना है कि कोर्स की शर्तें और नियम के अनुसार पायलट बनने के लिए 200 घंटे की फ्लाइंग जरूरी है। संस्थान की ओर से प्रशिक्षण में फ्लाइंग के घंटे कभी नहीं बढ़ाए गए, अब फीस बढ़ाई है। इस 200 घंटे के प्रशिक्षण के बिना उन्हें सीपीएल लाइसेंस नहीं मिलेगा। अब वे फीस बढ़ोतरी के कारण 60 से 80 घंटे की शेष बची फ्लाइंग को पूरा करने में असमर्थ हैं।