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Karnal News: हरियाणा सरकार की व्यापारियों को बड़ी सौगात, आज से शुरू हुई एकमुश्त निपटान योजना 2026
Mon, 01 Jun 2026 02:07 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Mon, 01 Jun 2026 02:07 AM IST
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करनाल। हरियाणा सरकार ने प्रदेश के छोटे व्यापारियों और उद्यमियों को बड़ी राहत देते हुए एकमुश्त निपटान योजना 2026 शुरू करने की घोषणा की है। पिछले साल इस योजना का 1,15,223 व्यापारियों ने लाभ उठाया था। इसे देखते हुए सरकार ने इसे दोबारा लागू करने का निर्णय लिया है। यह योजना एक जून से शुरू होकर 28 सितंबर तक यानी 120 दिनों के लिए प्रभावी रहेगी।
इसका मुख्य उद्देश्य पुराने टैक्स बकाया को निपटाना, अदालतों में लंबित मुकदमों का समाधान करना और जीएसटी संग्रह पर ध्यान केंद्रित करना है। इसके तहत अगर किसी करदाता पर किसी एक वर्ष में एक लाख रुपये तक का कर बकाया है तो उसे आवेदन करने की भी आवश्यकता नहीं है। उस वर्ष के लिए उसका संपूर्ण कर, ब्याज और जुर्माना स्वत: माफ कर दिया जाएगा।
हरियाणा सामान्य बिक्री कर अधिनियम 1973 के अनुसार, एक लाख से अधिक के कर बकाया वाले मामलों में 70 प्रतिशत की सीधी छूट दी जा रही है। अगर कोई व्यापारी फॉर्म-सी, एफ, एच आदि जैसे प्रपत्र अब जमा करवाता है, तो उसे विशेष छूट मिलेगी। यह लाभ फर्जी फर्मों को नहीं मिलेगा। इसके तहत अन्य छह कराधान अधिनियमों के तहत बकाया राशि पर विभिन्न रियायतें दी गई हैं। इनमें एक रुपये से एक लाख तक पर 100 प्रतिशत छूट, एक लाख से 10 लाख तक पर 60 प्रतिशत कर छूट, 10 लाख से 1 करोड़ तक 50 प्रतिशत कर छूट, 1 करोड़ से 10 करोड़ तक 40 प्रतिशत कर छूट , 10 करोड़ से 30 करोड़ तक 35 प्रतिशत और 30 करोड़ से 60 करोड़ तक 30 प्रतिशत तक छूट दी गई है। वहीं 60 करोड़ से अधिक की राशि पर कोई छूट नहीं है। सभी मामलों में ब्याज और जुर्माना राशि पर 100 प्रतिशत छूट प्रदान की गई है।
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इसके अलावा व्यापारियों की सुविधा के लिए निपटान की राशि का भुगतान किस्तों में करने का विकल्प दिया गया है जिनमें 5 लाख तक कोई किस्त नहीं (एकमुश्त भुगतान), 5 लाख से 25 लाख तक दो समान किस्तों में, 25 लाख से अधिक पर तीन किस्तें (40 प्रतिशत, 30 प्रतिशत और 30 प्रतिशत) की सुविधा दी गई है। जो करदाता अपील या मुकदमेबाजी में शामिल हैं, वे भी अपना केस वापस लेने की शर्त पर इस योजना का लाभ उठा सकते हैं। आवेदन स्वीकार होने के बाद आवेदक के खिलाफ उस मामले में आगे कोई कार्यवाही नहीं की जाएगी।
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इसका मुख्य उद्देश्य पुराने टैक्स बकाया को निपटाना, अदालतों में लंबित मुकदमों का समाधान करना और जीएसटी संग्रह पर ध्यान केंद्रित करना है। इसके तहत अगर किसी करदाता पर किसी एक वर्ष में एक लाख रुपये तक का कर बकाया है तो उसे आवेदन करने की भी आवश्यकता नहीं है। उस वर्ष के लिए उसका संपूर्ण कर, ब्याज और जुर्माना स्वत: माफ कर दिया जाएगा।
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हरियाणा सामान्य बिक्री कर अधिनियम 1973 के अनुसार, एक लाख से अधिक के कर बकाया वाले मामलों में 70 प्रतिशत की सीधी छूट दी जा रही है। अगर कोई व्यापारी फॉर्म-सी, एफ, एच आदि जैसे प्रपत्र अब जमा करवाता है, तो उसे विशेष छूट मिलेगी। यह लाभ फर्जी फर्मों को नहीं मिलेगा। इसके तहत अन्य छह कराधान अधिनियमों के तहत बकाया राशि पर विभिन्न रियायतें दी गई हैं। इनमें एक रुपये से एक लाख तक पर 100 प्रतिशत छूट, एक लाख से 10 लाख तक पर 60 प्रतिशत कर छूट, 10 लाख से 1 करोड़ तक 50 प्रतिशत कर छूट, 1 करोड़ से 10 करोड़ तक 40 प्रतिशत कर छूट , 10 करोड़ से 30 करोड़ तक 35 प्रतिशत और 30 करोड़ से 60 करोड़ तक 30 प्रतिशत तक छूट दी गई है। वहीं 60 करोड़ से अधिक की राशि पर कोई छूट नहीं है। सभी मामलों में ब्याज और जुर्माना राशि पर 100 प्रतिशत छूट प्रदान की गई है।
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इसके अलावा व्यापारियों की सुविधा के लिए निपटान की राशि का भुगतान किस्तों में करने का विकल्प दिया गया है जिनमें 5 लाख तक कोई किस्त नहीं (एकमुश्त भुगतान), 5 लाख से 25 लाख तक दो समान किस्तों में, 25 लाख से अधिक पर तीन किस्तें (40 प्रतिशत, 30 प्रतिशत और 30 प्रतिशत) की सुविधा दी गई है। जो करदाता अपील या मुकदमेबाजी में शामिल हैं, वे भी अपना केस वापस लेने की शर्त पर इस योजना का लाभ उठा सकते हैं। आवेदन स्वीकार होने के बाद आवेदक के खिलाफ उस मामले में आगे कोई कार्यवाही नहीं की जाएगी।