{"_id":"6a03876b82648eb608013ae4","slug":"hitched-a-lift-and-toured-india-nepal-and-bhutan-without-spending-a-single-rupee-karnal-news-c-18-knl1018-905095-2026-05-13","type":"story","status":"publish","title_hn":"Karnal News: लिफ्ट मांगकर बिना एक रुपया खर्चे किए भारत, नेपाल और भूटान का किया भ्रमण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Karnal News: लिफ्ट मांगकर बिना एक रुपया खर्चे किए भारत, नेपाल और भूटान का किया भ्रमण
विज्ञापन
निसिंग गांव बालू के पृथ्वी तीर्थ पर हर्ष भारद्वाज को सम्मानित करते महंत शांति गिरी महाराज। सं
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल/निसिंग। बालू गांव के युवक सनातनी हर्ष भारद्वाज ने बिना रुपये खर्च किए और बिना जरूरी सामान के पूरे भारत का भ्रमण किया। लिफ्ट मांगकर और पैदल चलकर कर्ण नगरी के इस युवक ने न केवल पूरा भारत देखा बल्कि नेपाल और भूटान की भी सैर की। एक हजार दिनों की यात्रा के बाद अब वह करनाल लौटे हैं।
21 अगस्त 2023 को घर से निकले हर्ष भारद्वाज ने देश के 29 राज्यों के साथ-साथ नेपाल और भूटान की यात्रा पूरी की। यात्रा के समापन पर भगवान परशुराम ब्राह्मण धर्मशाला करनाल पहुंचने पर ब्राह्मण सभा के लोगों और बालू गांव के ग्रामीणों ने फूलों और नोटों की मालाओं से उनका स्वागत किया। इसके बाद खुली जीप में गाजे-बाजे के साथ उन्हें बालू गांव ले जाया गया।
हर्ष भारद्वाज ने बताया कि इस यात्रा के दौरान उन्हें देश की विविध संस्कृति, रहन-सहन, खान-पान और प्राकृतिक सौंदर्य को करीब से देखने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि कश्मीर और कुल्लू की बर्फीली चोटियों से लेकर राजस्थान के सफेद रेगिस्तान, केरल के शांत बैकवाटर्स और गोवा के समुद्र तटों तक भारत की सुंदरता अद्भुत है। वहीं पेंच राष्ट्रीय उद्यान और असम के काजीरंगा के जंगलों में वन्यजीवों को देखने का अनुभव भी अविस्मरणीय रहा।
विज्ञापन
हर्ष भारद्वाज ने बताया कि जब वह 9 वर्ष के थे तभी उनके पिता का निधन हो गया था। उनकी माता नीलम ने उन्हें पाल-पोसकर बड़ा किया। वहीं बड़े भाई सौरभ ने भी यात्रा में उनका पूरा साथ दिया, जिसकी बदौलत वह 1000 दिनों में यह भारत भ्रमण पूरा कर सके।
किसी ने भोजन कराया तो किसी ने दुतकारा
हर्ष ने बताया कि यात्रा के दौरान कई लोगों ने प्रेमपूर्वक भोजन करवाया और सहयोग दिया जबकि कुछ लोगों ने यह कहकर भगा दिया कि जब पैसे नहीं थे तो घर से क्यों निकले। इसके बावजूद उन्होंने अपनी यात्रा जारी रखी। हर्ष ने पृथ्वी तीर्थ पर महंत शांति गिरी महाराज का आशीर्वाद भी प्राप्त किया।
अब गोसंरक्षण का लक्ष्य
हर्ष भारद्वाज ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गाय केवल एक पशु नहीं बल्कि गो माता के रूप में पूजनीय है और यह हमारी संस्कृति की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि अब उनका अगला लक्ष्य गोसेवा और गोवंश संरक्षण है। इसके साथ ही वह खेतों में पेस्टीसाइड के अंधाधुंध प्रयोग के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाएंगे।
यात्रा में समझी भारत की संस्कृति
हर्ष ने बताया कि देश के अलग-अलग हिस्सों में लोगों की वेशभूषा, बोली और खान-पान में अद्भुत विविधता देखने को मिली। पंजाब का लंगर, कश्मीर का वाजवान, गुजरात का ढोकला और दक्षिण भारत के मसालेदार व्यंजनों का स्वाद उन्होंने यात्रा के दौरान चखा। उनके अनुसार यह यात्रा केवल मनोरंजन नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति और बदलते परिवेश को समझने का अनोखा अनुभव रही।
विज्ञापन
करनाल/निसिंग। बालू गांव के युवक सनातनी हर्ष भारद्वाज ने बिना रुपये खर्च किए और बिना जरूरी सामान के पूरे भारत का भ्रमण किया। लिफ्ट मांगकर और पैदल चलकर कर्ण नगरी के इस युवक ने न केवल पूरा भारत देखा बल्कि नेपाल और भूटान की भी सैर की। एक हजार दिनों की यात्रा के बाद अब वह करनाल लौटे हैं।
21 अगस्त 2023 को घर से निकले हर्ष भारद्वाज ने देश के 29 राज्यों के साथ-साथ नेपाल और भूटान की यात्रा पूरी की। यात्रा के समापन पर भगवान परशुराम ब्राह्मण धर्मशाला करनाल पहुंचने पर ब्राह्मण सभा के लोगों और बालू गांव के ग्रामीणों ने फूलों और नोटों की मालाओं से उनका स्वागत किया। इसके बाद खुली जीप में गाजे-बाजे के साथ उन्हें बालू गांव ले जाया गया।
विज्ञापन
हर्ष भारद्वाज ने बताया कि इस यात्रा के दौरान उन्हें देश की विविध संस्कृति, रहन-सहन, खान-पान और प्राकृतिक सौंदर्य को करीब से देखने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि कश्मीर और कुल्लू की बर्फीली चोटियों से लेकर राजस्थान के सफेद रेगिस्तान, केरल के शांत बैकवाटर्स और गोवा के समुद्र तटों तक भारत की सुंदरता अद्भुत है। वहीं पेंच राष्ट्रीय उद्यान और असम के काजीरंगा के जंगलों में वन्यजीवों को देखने का अनुभव भी अविस्मरणीय रहा।
विज्ञापन
हर्ष भारद्वाज ने बताया कि जब वह 9 वर्ष के थे तभी उनके पिता का निधन हो गया था। उनकी माता नीलम ने उन्हें पाल-पोसकर बड़ा किया। वहीं बड़े भाई सौरभ ने भी यात्रा में उनका पूरा साथ दिया, जिसकी बदौलत वह 1000 दिनों में यह भारत भ्रमण पूरा कर सके।
किसी ने भोजन कराया तो किसी ने दुतकारा
हर्ष ने बताया कि यात्रा के दौरान कई लोगों ने प्रेमपूर्वक भोजन करवाया और सहयोग दिया जबकि कुछ लोगों ने यह कहकर भगा दिया कि जब पैसे नहीं थे तो घर से क्यों निकले। इसके बावजूद उन्होंने अपनी यात्रा जारी रखी। हर्ष ने पृथ्वी तीर्थ पर महंत शांति गिरी महाराज का आशीर्वाद भी प्राप्त किया।
अब गोसंरक्षण का लक्ष्य
हर्ष भारद्वाज ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गाय केवल एक पशु नहीं बल्कि गो माता के रूप में पूजनीय है और यह हमारी संस्कृति की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि अब उनका अगला लक्ष्य गोसेवा और गोवंश संरक्षण है। इसके साथ ही वह खेतों में पेस्टीसाइड के अंधाधुंध प्रयोग के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाएंगे।
यात्रा में समझी भारत की संस्कृति
हर्ष ने बताया कि देश के अलग-अलग हिस्सों में लोगों की वेशभूषा, बोली और खान-पान में अद्भुत विविधता देखने को मिली। पंजाब का लंगर, कश्मीर का वाजवान, गुजरात का ढोकला और दक्षिण भारत के मसालेदार व्यंजनों का स्वाद उन्होंने यात्रा के दौरान चखा। उनके अनुसार यह यात्रा केवल मनोरंजन नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति और बदलते परिवेश को समझने का अनोखा अनुभव रही।