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Karnal News: कुंजपुरा का चुनाव हुआ लेकिन हाईकोर्ट ने रोकी मतगणना
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कुजपुरा सरपंच पद के उपचुनाव में वोट डालने के लिए लिस्ट में अपना नाम देखते लोग। संवाद
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। कुंजपुरा ग्राम पंचायत का उपचुनाव रविवार को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो गया लेकिन शाम को इसकी गणना नहीं हो पाई। पूर्व सरपंच की याचिका पर चुनाव की मतगणना पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। दरअसल हुआ यूं कि पूर्व सरपंच सुमन पर करीब साढ़े चार लाख रुपये के विकास कार्याें में गबन के आरोप लगे थे। इसके बाद जिला प्रशासन ने सरपंच को मार्च 2025 में बर्खास्त कर दिया था। इसके खिलाफ सरपंच ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। जिस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने आदेश दिए कि चुनाव करवाए जा सकते हैं पर परिणाम सरपंच के केस की जांच के बाद सामने आएंगे। इसके लिए केस की फाइल मंडलायुक्त के पास भेजी गई है।
कुंजपुरा पंचायत के लिए रविवार को करीब 9200 वोटों में से करीब 5925 वोट पोल हुए। यहां महिला आरक्षित सीट होने की वजह से तीन प्रत्याशी मैदान में थी। इनमें ममता, निष्ठा और तमन्ना शामिल रही। शाम को चुनाव संपन्न होने के बाद रिटर्निग अधिकारियों ने ईवीएम को पैक कर स्ट्रांग रूम में रखवा दिया है।
सरपंच प्रतिनिधि महेंंद्र ने बताया कि वे 2010 से लेकर 2015 तक भी सरपंच रहे हैं। उस दौरान 2014 से पहले विकास कार्याें के लिए एक्टिविटी कोड नहीं होता था। जब ये लागू हुआ तो हमें भी इसकी सही जानकारी नहीं थी और न ही सचिव को। उस दौरान हमने एक्टिविटी कोड के बजट से दूसरे काम करवाए जिसे प्रशासन ने नहीं माना। हमने बिल से लेकर हर सबूत दिए लेकिन प्रशासन ने नहीं माना। जांच मंडलायुक्त के पास गई और प्रशासन ने उन्हें सरपंच पद से बर्खास्त कर दिया। इसके खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका लगा दी। अब कोर्ट ने सुनवाई करते हुए मंडलायुक्त को एक माह यानी चार सप्ताह में जांच पूरी करने के आदेश दिए हैं। तब तक इस चुनाव की मतगणना नहीं होगी। अगर जांच में वे निर्दोष मिलते हैं तो उन्हें वापस सरपंच का पद मिलेगा और नहीं हुए तो इस चुनाव के नतीजों को माना जाएगा।
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करनाल। कुंजपुरा ग्राम पंचायत का उपचुनाव रविवार को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो गया लेकिन शाम को इसकी गणना नहीं हो पाई। पूर्व सरपंच की याचिका पर चुनाव की मतगणना पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। दरअसल हुआ यूं कि पूर्व सरपंच सुमन पर करीब साढ़े चार लाख रुपये के विकास कार्याें में गबन के आरोप लगे थे। इसके बाद जिला प्रशासन ने सरपंच को मार्च 2025 में बर्खास्त कर दिया था। इसके खिलाफ सरपंच ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। जिस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने आदेश दिए कि चुनाव करवाए जा सकते हैं पर परिणाम सरपंच के केस की जांच के बाद सामने आएंगे। इसके लिए केस की फाइल मंडलायुक्त के पास भेजी गई है।
कुंजपुरा पंचायत के लिए रविवार को करीब 9200 वोटों में से करीब 5925 वोट पोल हुए। यहां महिला आरक्षित सीट होने की वजह से तीन प्रत्याशी मैदान में थी। इनमें ममता, निष्ठा और तमन्ना शामिल रही। शाम को चुनाव संपन्न होने के बाद रिटर्निग अधिकारियों ने ईवीएम को पैक कर स्ट्रांग रूम में रखवा दिया है।
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सरपंच प्रतिनिधि महेंंद्र ने बताया कि वे 2010 से लेकर 2015 तक भी सरपंच रहे हैं। उस दौरान 2014 से पहले विकास कार्याें के लिए एक्टिविटी कोड नहीं होता था। जब ये लागू हुआ तो हमें भी इसकी सही जानकारी नहीं थी और न ही सचिव को। उस दौरान हमने एक्टिविटी कोड के बजट से दूसरे काम करवाए जिसे प्रशासन ने नहीं माना। हमने बिल से लेकर हर सबूत दिए लेकिन प्रशासन ने नहीं माना। जांच मंडलायुक्त के पास गई और प्रशासन ने उन्हें सरपंच पद से बर्खास्त कर दिया। इसके खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका लगा दी। अब कोर्ट ने सुनवाई करते हुए मंडलायुक्त को एक माह यानी चार सप्ताह में जांच पूरी करने के आदेश दिए हैं। तब तक इस चुनाव की मतगणना नहीं होगी। अगर जांच में वे निर्दोष मिलते हैं तो उन्हें वापस सरपंच का पद मिलेगा और नहीं हुए तो इस चुनाव के नतीजों को माना जाएगा।
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कुजपुरा सरपंच पद के उपचुनाव में वोट डालने के लिए लिस्ट में अपना नाम देखते लोग। संवाद