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Karnal News: मां ममता का रुप है, मां है सकल जहान, मां कल्पवृक्ष की छाया...
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काव्य गोष्ठी मे मौजूद कवि
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। सांझा साहित्य मंच की ओर से रविवार को सेक्टर 12 के हुड्डा वर्कर यूनियन कार्यालय में मासिक काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसकी अध्यक्षता कुरुक्षेत्र के ओमबीर काजल ने की जबकि मंच संचालन कृष्ण कुमार निर्माण ने किया। इस अवसर पर अंग्रेज सिंह ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। गोष्ठी में विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक घटनाक्रमों पर कविता पाठ किया गया।
इस अवसर पर मातृ दिवस पर भी रचनाएं प्रस्तुत की गई। शुरुआत में कृष्ण कुमार निर्माण ने दोहों के माध्यम से कहा कि ‘मां ममता का रुप है, मां है सकल जहान, मां कल्पवृक्ष की छाया, मां होती भगवान’। सतविंद्र कुमार राणा बोले ‘ठोकर छोटी एक बहुत है, अक्ल ठिकाने आनी हो जब’। प्रवीण जन्नत ने फरमाया कि ‘सकल जगत चमकाते-चमकाते बुझ गया, जिसके जीवन का नूर, प्रभाकर सरिस कोई और नहीं वो तो है किस्मत का मारा मजबूर’। लाभ सिंह आर्य ने पारस की पंक्तियां सुनाते हुए कहा ‘मां तू है तो सब कुछ है, मां तेरे आंचल की छांव, जैसे सारा आसमान, तेरी ममता की मीठी बूंद, भर देती है जीवन में जान’।
गुरमुख सिंह वड़ैच ने शिव बटालवी की कहा ‘जिंदगी के सफर में अकेले थे हम, मिल गए तुम तो दिल को सहारा मिला’। सुदेश कुमारी कुरुक्षेत्र ने प्यारी मां विषय पर कविता सुनाई। दलीप खरैरा करनाल ने कहा कि था ‘जब बच्चा एक अबोध, दुनिया थी बस मां की गोद, गोद से उतरा, पहलू में आया, बनी रही आंचल की छाया’। डाॅ. श्याम प्रीत बोले कि ‘मां वो है जिसमें समाया सारा संसार, मां वो है, जिससे है हर घर परिवार’। प्रीति सिंह ने फरमाया ‘मोहब्बत का मुकदमा कभी मुकम्मल न हुआ’। पानीपत से पहुंचे युवा गजलकार धर्मेंद्र अरोड़ा मुसाफिर ने कहा ‘ईश्वर का वरदान है मां, सकल गुणों की खान है मां’। कैथल से युवा शायर दिलबाग अकेला ने कहा इन ‘पत्थरीली राहों में, कुछ हीरे पड़े थे, शरीफ लोगों के सर पर सियासी खड़े थे’।
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कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे ओमबीर काजल कुरुक्षेत्र ने कहा ‘बच्चे बूढ़े और जवान, सबका रहे मोबाइल में ध्यान’। नरेश लाभ करनाल ने फरमाया ‘मां के शुभ आशीष से बच्चे पाते मान, धरती पर भगवान सम, इनको तू ही जान’। सुषमा चोपड़ा ने कहा ‘मां होती है जन्नत, जहां पूरी होती हर मन्नत, देती दुआएं हर पल, सुखी रहें हम आज और कल’। वैभव काजल ने फरमाया ’वक्त बदलता रहता है, हैरान क्यूं हो भाई, खुश रहने के लिए, इतना परेशान क्यूं हो भाई’। गुलाब फक्कर ने कहा ’हम वो जो से सोचकर नहीं रोते, रो भी पड़े तो पूछेगा हाल हमारा। सुरेंद्र कल्याण ने कहा दिल में दर्द है’। उपस्थित कवियों, साहित्यकारों ने नगरपालिका व फायर कर्मियों की हड़ताल का समर्थन किया और सरकार से आग्रह किया कि वार्ता के माध्यम से कोई हल निकाले। साथ ही तमाम साहित्यकारों ने व्यवस्था से अपील की है कि देश में सांप्रदायिक माहौल न बनने दें बल्कि प्रेम,सहनशीलता, मिलवर्तन का माहौल कायम रहे। इस अवसर पर दलीप खरैरा विशिष्ट अतिथि रहे। इसके अलावा अविराज सिंह, शिवम कृष्ण, समर्पिता कृष्ण व वैभव काजल मौजूद रहे।
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करनाल। सांझा साहित्य मंच की ओर से रविवार को सेक्टर 12 के हुड्डा वर्कर यूनियन कार्यालय में मासिक काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसकी अध्यक्षता कुरुक्षेत्र के ओमबीर काजल ने की जबकि मंच संचालन कृष्ण कुमार निर्माण ने किया। इस अवसर पर अंग्रेज सिंह ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। गोष्ठी में विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक घटनाक्रमों पर कविता पाठ किया गया।
इस अवसर पर मातृ दिवस पर भी रचनाएं प्रस्तुत की गई। शुरुआत में कृष्ण कुमार निर्माण ने दोहों के माध्यम से कहा कि ‘मां ममता का रुप है, मां है सकल जहान, मां कल्पवृक्ष की छाया, मां होती भगवान’। सतविंद्र कुमार राणा बोले ‘ठोकर छोटी एक बहुत है, अक्ल ठिकाने आनी हो जब’। प्रवीण जन्नत ने फरमाया कि ‘सकल जगत चमकाते-चमकाते बुझ गया, जिसके जीवन का नूर, प्रभाकर सरिस कोई और नहीं वो तो है किस्मत का मारा मजबूर’। लाभ सिंह आर्य ने पारस की पंक्तियां सुनाते हुए कहा ‘मां तू है तो सब कुछ है, मां तेरे आंचल की छांव, जैसे सारा आसमान, तेरी ममता की मीठी बूंद, भर देती है जीवन में जान’।
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गुरमुख सिंह वड़ैच ने शिव बटालवी की कहा ‘जिंदगी के सफर में अकेले थे हम, मिल गए तुम तो दिल को सहारा मिला’। सुदेश कुमारी कुरुक्षेत्र ने प्यारी मां विषय पर कविता सुनाई। दलीप खरैरा करनाल ने कहा कि था ‘जब बच्चा एक अबोध, दुनिया थी बस मां की गोद, गोद से उतरा, पहलू में आया, बनी रही आंचल की छाया’। डाॅ. श्याम प्रीत बोले कि ‘मां वो है जिसमें समाया सारा संसार, मां वो है, जिससे है हर घर परिवार’। प्रीति सिंह ने फरमाया ‘मोहब्बत का मुकदमा कभी मुकम्मल न हुआ’। पानीपत से पहुंचे युवा गजलकार धर्मेंद्र अरोड़ा मुसाफिर ने कहा ‘ईश्वर का वरदान है मां, सकल गुणों की खान है मां’। कैथल से युवा शायर दिलबाग अकेला ने कहा इन ‘पत्थरीली राहों में, कुछ हीरे पड़े थे, शरीफ लोगों के सर पर सियासी खड़े थे’।
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कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे ओमबीर काजल कुरुक्षेत्र ने कहा ‘बच्चे बूढ़े और जवान, सबका रहे मोबाइल में ध्यान’। नरेश लाभ करनाल ने फरमाया ‘मां के शुभ आशीष से बच्चे पाते मान, धरती पर भगवान सम, इनको तू ही जान’। सुषमा चोपड़ा ने कहा ‘मां होती है जन्नत, जहां पूरी होती हर मन्नत, देती दुआएं हर पल, सुखी रहें हम आज और कल’। वैभव काजल ने फरमाया ’वक्त बदलता रहता है, हैरान क्यूं हो भाई, खुश रहने के लिए, इतना परेशान क्यूं हो भाई’। गुलाब फक्कर ने कहा ’हम वो जो से सोचकर नहीं रोते, रो भी पड़े तो पूछेगा हाल हमारा। सुरेंद्र कल्याण ने कहा दिल में दर्द है’। उपस्थित कवियों, साहित्यकारों ने नगरपालिका व फायर कर्मियों की हड़ताल का समर्थन किया और सरकार से आग्रह किया कि वार्ता के माध्यम से कोई हल निकाले। साथ ही तमाम साहित्यकारों ने व्यवस्था से अपील की है कि देश में सांप्रदायिक माहौल न बनने दें बल्कि प्रेम,सहनशीलता, मिलवर्तन का माहौल कायम रहे। इस अवसर पर दलीप खरैरा विशिष्ट अतिथि रहे। इसके अलावा अविराज सिंह, शिवम कृष्ण, समर्पिता कृष्ण व वैभव काजल मौजूद रहे।