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Karnal News: बीमा पाॅलिसी निरस्त करने पर किस्त राशि लौटाने के आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Tue, 17 Mar 2026 01:13 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने बीमा कंपनी की ओर से पाॅलिसी को निरस्त करने पर इंडिया फर्स्ट लाइफ इंश्योरेंस कंपनी के खिलाफ फैसला सुनाया है। शिकायतकर्ता रिभु तंवर को बीमा पाॅलिसी जमा किया गया प्रीमियम नाै प्रतिशत ब्याज सहित लौटाने के आदेश दिए हैं। मानसिक प्रताड़ना और मुकदमेबाजी के खर्च के लिए कंपनी 31 हजार रुपये का मुआवजा भी देगी। आयोग ने बीमा कंपनी की ओर से बीमा पाॅलिसी को निरस्त करना सेवा में कमी माना।
आयोग के फैसले के अनुसार सेक्टर-8 निवासी शिकायतकर्ता रिभु तंवर ने 18 दिसंबर, 2021 को बीमा कंपनी से दो करोड़ रुपये की इंडिया फर्स्ट लाइफ गारंटिड प्रोटेक्शन प्लान (टर्म इंश्योरेंस) पॉलिसी खरीदी थी। उन्होंने पहले दो वर्षों का प्रीमियम नियमित रूप से जमा किया। तीसरे वर्ष (2023-24) के लिए 71 हजार 40 रुपये का प्रीमियम देय तिथि 18 दिसंबर से पहले ही 12 दिसंबर 2023 को जमा कर दिया था। हालांकि, कंपनी ने यह कहते हुए पॉलिसी को निरस्त (लैप्स) कर दिया कि प्रीमियम जमा करते समय पॉलिसी का विवरण नहीं दिया गया था और बाद में ये रुपये उपभोक्ता को रिफंड कर दिए।
कंपनी का दावा तर्कहीन : आयोग
आयोग के अध्यक्ष जसवंत सिंह की अध्यक्षता में आयोग ने पाया कि शिकायतकर्ता ने समय पर प्रीमियम जमा किया था और बैंक स्टेटमेंट से इसकी पुष्टि हुई है। कंपनी के पॉलिसी विवरण नहीं दिए गए के दावे को आयोग ने तर्कहीन बताया, क्योंकि, शिकायतकर्ता पहले भी दो प्रीमियम सफलतापूर्वक जमा कर चुका था। कंपनी की ओर से बिना किसी वैध कारण के पॉलिसी को निरस्त करना सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार माना गया। आयोग ने इंडिया फर्स्ट लाइफ इंश्योरेंस को आदेश दिए कि उपभोक्ता की ओर से जमा किए गए पहले दो प्रीमियम की कुल राशि 1,43,641 रुपये जमा करने की तारीख से भुगतान तक नाै प्रतिशत ब्याज के साथ वापस की जाए। इसके अलावा उपभोक्ता को हुई मानसिक पीड़ा और उत्पीड़न के लिए 20 हजार रुपये का मुआवजा दिया जाए। वहीं कानूनी कार्रवाई पर आए खर्च के रूप में 11 हजार रुपये का भुगतान किया जाए। आयोग ने इस आदेश के अनुपालन के लिए कंपनी को 45 दिनों का समय दिया है।
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करनाल। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने बीमा कंपनी की ओर से पाॅलिसी को निरस्त करने पर इंडिया फर्स्ट लाइफ इंश्योरेंस कंपनी के खिलाफ फैसला सुनाया है। शिकायतकर्ता रिभु तंवर को बीमा पाॅलिसी जमा किया गया प्रीमियम नाै प्रतिशत ब्याज सहित लौटाने के आदेश दिए हैं। मानसिक प्रताड़ना और मुकदमेबाजी के खर्च के लिए कंपनी 31 हजार रुपये का मुआवजा भी देगी। आयोग ने बीमा कंपनी की ओर से बीमा पाॅलिसी को निरस्त करना सेवा में कमी माना।
आयोग के फैसले के अनुसार सेक्टर-8 निवासी शिकायतकर्ता रिभु तंवर ने 18 दिसंबर, 2021 को बीमा कंपनी से दो करोड़ रुपये की इंडिया फर्स्ट लाइफ गारंटिड प्रोटेक्शन प्लान (टर्म इंश्योरेंस) पॉलिसी खरीदी थी। उन्होंने पहले दो वर्षों का प्रीमियम नियमित रूप से जमा किया। तीसरे वर्ष (2023-24) के लिए 71 हजार 40 रुपये का प्रीमियम देय तिथि 18 दिसंबर से पहले ही 12 दिसंबर 2023 को जमा कर दिया था। हालांकि, कंपनी ने यह कहते हुए पॉलिसी को निरस्त (लैप्स) कर दिया कि प्रीमियम जमा करते समय पॉलिसी का विवरण नहीं दिया गया था और बाद में ये रुपये उपभोक्ता को रिफंड कर दिए।
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कंपनी का दावा तर्कहीन : आयोग
आयोग के अध्यक्ष जसवंत सिंह की अध्यक्षता में आयोग ने पाया कि शिकायतकर्ता ने समय पर प्रीमियम जमा किया था और बैंक स्टेटमेंट से इसकी पुष्टि हुई है। कंपनी के पॉलिसी विवरण नहीं दिए गए के दावे को आयोग ने तर्कहीन बताया, क्योंकि, शिकायतकर्ता पहले भी दो प्रीमियम सफलतापूर्वक जमा कर चुका था। कंपनी की ओर से बिना किसी वैध कारण के पॉलिसी को निरस्त करना सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार माना गया। आयोग ने इंडिया फर्स्ट लाइफ इंश्योरेंस को आदेश दिए कि उपभोक्ता की ओर से जमा किए गए पहले दो प्रीमियम की कुल राशि 1,43,641 रुपये जमा करने की तारीख से भुगतान तक नाै प्रतिशत ब्याज के साथ वापस की जाए। इसके अलावा उपभोक्ता को हुई मानसिक पीड़ा और उत्पीड़न के लिए 20 हजार रुपये का मुआवजा दिया जाए। वहीं कानूनी कार्रवाई पर आए खर्च के रूप में 11 हजार रुपये का भुगतान किया जाए। आयोग ने इस आदेश के अनुपालन के लिए कंपनी को 45 दिनों का समय दिया है।