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Karnal News: धान रोपाई से बिजली व्यवस्था पर सबसे बड़ा दबाव, कृषि क्षेत्र में 10 दिन में 344 प्रतिशत बढ़ी खपत
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पानीपत। जिले में धान रोपाई शुरू होते ही बिजली व्यवस्था पर अभूतपूर्व दबाव बन गया है। सबसे अधिक असर कृषि क्षेत्र में देखने को मिला है, जहां पिछले 10 दिनों के दौरान बिजली की खपत में करीब 344 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 15 जून को कृषि क्षेत्र में 7.75 लाख यूनिट बिजली की खपत थी, जो 22 जून को बढ़कर 21.67 लाख यूनिट, 24 जून को 27.67 लाख यूनिट और 25 जून को 26.65 लाख यूनिट तक पहुंच गई। इससे कृषि फीडरों पर लोड कई गुना बढ़ गया है।
भीषण गर्मी, उमस और धान की रोपाई के कारण जिले की कुल दैनिक बिजली मांग 159 लाख यूनिट के आंकड़े को पार कर चुकी है। बढ़ते लोड का असर ट्रांसफार्मरों, फीडरों और केबल नेटवर्क पर भी साफ दिखाई दे रहा है। कई स्थानों पर तकनीकी खराबियों के चलते घोषित और अघोषित बिजली कटों से उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
कृषि के साथ-साथ अन्य क्षेत्रों में भी बिजली खपत लगातार बढ़ रही है। ग्रामीण क्षेत्र में 16 जून को 21.71 लाख यूनिट रही खपत 25 जून को बढ़कर 26.08 लाख यूनिट हो गई, जो करीब 20 प्रतिशत की वृद्धि है। शहरी क्षेत्र में 17 जून की 38.64 लाख यूनिट खपत 25 जून को 46.46 लाख यूनिट पहुंच गई, यानी करीब 20.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। वहीं औद्योगिक क्षेत्र में 18 जून की 51.59 लाख यूनिट खपत बढ़कर 25 जून को 59.05 लाख यूनिट हो गई, जो करीब 14.5 प्रतिशत अधिक है।
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बिजली निगम के अधिकारियों के अनुसार सबसे अधिक दबाव कृषि फीडरों पर है, क्योंकि धान रोपाई के दौरान सिंचाई के लिए लगातार बिजली की आवश्यकता रहती है। निगम की टीमें फीडरों, ट्रांसफार्मरों और अन्य उपकरणों की निगरानी के साथ आवश्यक तकनीकी सुधार कार्य भी कर रही हैं ताकि आपूर्ति व्यवस्था सुचारु बनी रहे।
कृषि क्षेत्र में बिजली खपत की रफ्तार
15 जून : 7.75 लाख यूनिट
16 जून : 17.32 लाख यूनिट
22 जून : 21.67 लाख यूनिट
23 जून : 25.68 लाख यूनिट
24 जून : 27.67 लाख यूनिट
25 जून : 26.65 लाख यूनिट
10 दिन में वृद्धि : करीब 344 प्रतिशत
मुख्य कारण : धान रोपाई और सिंचाई के लिए ट्यूबवेलों का बढ़ा संचालन
अन्य क्षेत्रों में भी बढ़ी बिजली खपत
क्षेत्र पहले 25 जून वृद्धि
ग्रामीण 21.71 26.08 20 प्रतिशत
शहरी 38.64 46.46 20.3 प्रतिशत
औद्योगिक 51.59 59.05 14.5 प्रतिशत
नोट- यूनिट खपत लाख यूनिट में
वर्जन-
गर्मी और धान रोपाई के कारण कृषि क्षेत्र में बिजली की मांग तेजी से बढ़ी है। बढ़ते लोड को देखते हुए फीडरों और ट्रांसफार्मरों की लगातार निगरानी की जा रही है। जहां भी तकनीकी खराबी सामने आती है, उसे प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जा रहा है ताकि किसानों और अन्य उपभोक्ताओं को बेहतर बिजली आपूर्ति मिल सके।
- आदित्य कुंडू, कार्यकारी अभियंता, सब-अर्बन डिवीजन, पानीपत।
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भीषण गर्मी, उमस और धान की रोपाई के कारण जिले की कुल दैनिक बिजली मांग 159 लाख यूनिट के आंकड़े को पार कर चुकी है। बढ़ते लोड का असर ट्रांसफार्मरों, फीडरों और केबल नेटवर्क पर भी साफ दिखाई दे रहा है। कई स्थानों पर तकनीकी खराबियों के चलते घोषित और अघोषित बिजली कटों से उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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कृषि के साथ-साथ अन्य क्षेत्रों में भी बिजली खपत लगातार बढ़ रही है। ग्रामीण क्षेत्र में 16 जून को 21.71 लाख यूनिट रही खपत 25 जून को बढ़कर 26.08 लाख यूनिट हो गई, जो करीब 20 प्रतिशत की वृद्धि है। शहरी क्षेत्र में 17 जून की 38.64 लाख यूनिट खपत 25 जून को 46.46 लाख यूनिट पहुंच गई, यानी करीब 20.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। वहीं औद्योगिक क्षेत्र में 18 जून की 51.59 लाख यूनिट खपत बढ़कर 25 जून को 59.05 लाख यूनिट हो गई, जो करीब 14.5 प्रतिशत अधिक है।
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बिजली निगम के अधिकारियों के अनुसार सबसे अधिक दबाव कृषि फीडरों पर है, क्योंकि धान रोपाई के दौरान सिंचाई के लिए लगातार बिजली की आवश्यकता रहती है। निगम की टीमें फीडरों, ट्रांसफार्मरों और अन्य उपकरणों की निगरानी के साथ आवश्यक तकनीकी सुधार कार्य भी कर रही हैं ताकि आपूर्ति व्यवस्था सुचारु बनी रहे।
कृषि क्षेत्र में बिजली खपत की रफ्तार
15 जून : 7.75 लाख यूनिट
16 जून : 17.32 लाख यूनिट
22 जून : 21.67 लाख यूनिट
23 जून : 25.68 लाख यूनिट
24 जून : 27.67 लाख यूनिट
25 जून : 26.65 लाख यूनिट
10 दिन में वृद्धि : करीब 344 प्रतिशत
मुख्य कारण : धान रोपाई और सिंचाई के लिए ट्यूबवेलों का बढ़ा संचालन
अन्य क्षेत्रों में भी बढ़ी बिजली खपत
क्षेत्र पहले 25 जून वृद्धि
ग्रामीण 21.71 26.08 20 प्रतिशत
शहरी 38.64 46.46 20.3 प्रतिशत
औद्योगिक 51.59 59.05 14.5 प्रतिशत
नोट- यूनिट खपत लाख यूनिट में
वर्जन-
गर्मी और धान रोपाई के कारण कृषि क्षेत्र में बिजली की मांग तेजी से बढ़ी है। बढ़ते लोड को देखते हुए फीडरों और ट्रांसफार्मरों की लगातार निगरानी की जा रही है। जहां भी तकनीकी खराबी सामने आती है, उसे प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जा रहा है ताकि किसानों और अन्य उपभोक्ताओं को बेहतर बिजली आपूर्ति मिल सके।
- आदित्य कुंडू, कार्यकारी अभियंता, सब-अर्बन डिवीजन, पानीपत।