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Karnal News: मेडिकल कॉलेज से सिविल अस्पताल दौड़ रहे मरीज, इमरजेंसी में इलाज नहीं

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 29 May 2026 01:08 AM IST
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Patients running from medical college to civil hospital, no treatment in emergency
मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी की पर्ची पर सिविल अस्पताल के लिए रेफर के लिए लिखा गया। अमर उजाला
राम सारस्वत
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करनाल। आमतौर पर गंभीर मरीजों को जिला नागरिक अस्पताल से मेडिकल कॉलेज रेफर किया जाता है लेकिन इन दिनों व्यवस्था बिल्कुल उल्टी दिखाई दे रही है। कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में पहुंचने वाले कई मरीजों को बिना प्राथमिक उपचार दिए जिला नागरिक अस्पताल रेफर किया जा रहा है।

हालत यह है कि मामूली ईएनटी समस्याओं से लेकर हाई बीपी तक के मरीजों को मेडिकल कॉलेज में इलाज नहीं मिल पा रहा। इससे एक ओर मरीजों और उनके परिजनों की परेशानियां बढ़ रही हैं वहीं दूसरी ओर जिला नागरिक अस्पताल पर अतिरिक्त दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
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मरीजों का आरोप है कि मेडिकल कॉलेज जैसी उच्च स्वास्थ्य संस्था की इमरजेंसी यदि प्राथमिक उपचार तक देने में असमर्थ दिखेगी तो मरीज आखिर भरोसा किस पर करेगा। मेडिकल कॉलेज से लगातार मरीज रेफर होने के कारण जिला नागरिक अस्पताल की इमरजेंसी और ओपीडी पर अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है। पहले ही सीमित संसाधन, सीमित स्थान और बढ़ती मरीज संख्या से जूझ रहे सिविल अस्पताल में अब मेडिकल कॉलेज से आने वाले मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है। डॉक्टरों का कहना है कि सामान्य दिनों की तुलना में अधिक मरीज पहुंच रहे हैं जिससे व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
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केस 1: बीपी 157 पहुंचा, फिर भी कहा- सिविल अस्पताल जाओ

गुरुनानक पुरा शीला को अचानक तेज सिरदर्द और घबराहट होने लगी। परिजन उन्हें तुरंत कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में लेकर पहुंचे। जांच में उनका बीपी करीब 157 बताया गया। परिजनों का आरोप है कि काफी देर इंतजार कराने के बाद उन्हें कहा गया कि मरीज को सिविल अस्पताल लेकर जाएं वहीं इलाज होगा। इसके साथ ही उनकी पर्ची पर भी यही लिखा गया कि जिला नागरिक अस्पताल के लिए रेफर किया जाता है। परिवार का कहना है कि बीपी अधिक होने के बावजूद मेडिकल कॉलेज में न तो स्थायी उपचार दिया गया और न ही डॉक्टरों ने ज्यादा देर मरीज को ऑब्जर्व किया।
केस 2: बुजुर्ग महिला को तीन घंटे भटकना पड़ा
घरौंडा की 65 वर्षीय महिला संतोष देवी को सांस लेने में तकलीफ और कमजोरी की शिकायत के बाद मेडिकल कॉलेज लाया गया था। परिजनों का आरोप है कि इमरजेंसी में काफी देर तक स्ट्रेचर तक नहीं मिला। जांच के बाद उन्हें सिविल अस्पताल जाने की सलाह दे दी गई। परिवार का कहना है कि मेडिकल कॉलेज और सिविल अस्पताल के बीच भटकते-भटकते मरीज की हालत और बिगड़ गई। बाद में सिविल अस्पताल में भर्ती कर उपचार शुरू किया गया।


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वर्जन :

यह गलत है। ऐसा नहीं किया जाना चाहिए। हर जगह कुछ गलत एलीमेंट्स होते हैं। उनकी वजह से ही यह सब होता है। मामले में जांच कराई जाएगी। जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. एमके गर्ग, निदेशक, कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज।
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