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Karnal News: गोंदर में शांति, सोशल मीडिया पर सुलग रहा तनाव
Sat, 02 May 2026 02:10 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Sat, 02 May 2026 02:10 AM IST
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गोंदर गांव में खड़ी पुलिस की बस।
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जगदीप
करनाल।
गोंदर गांव में सूरज हत्याकांड के बाद भले ही पुलिस की सख्ती से जमीनी स्तर पर शांति कायम हो गई हो लेकिन सोशल मीडिया पर दोनों पक्षों के बीच तनाव अब भी थमता नजर नहीं आ रहा। गांव में हालात सामान्य बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन ने कड़ी निगरानी व्यवस्था लागू कर रखी है। करीब 40 पुलिसकर्मी दिन-रात गांव में तैनात हैं जिससे किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।
प्रशासन की सक्रियता और शांति कमेटी के प्रयासों का असर यह है कि गांव में फिलहाल कोई बड़ा विवाद सामने नहीं आया है। हालांकि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लगातार भड़काऊ टिप्पणियां और कटाक्ष सामने आ रहे हैं, ये माहौल को फिर से खराब करने की आशंका पैदा कर रहे हैं। दोनों पक्षों के कुछ लोग आपसी बयानबाजी से बाज नहीं आ रहे जिससे तनाव की स्थिति से इंकार नहीं किया जा सकता। कई लोग युवाओं को जातीय तौर से उकसाने के लिए पोस्ट डाल रहे हैं।
गौरतलब है कि 25 अप्रैल को एसपी नरेंद्र बिजारणिया के मार्गदर्शन में डीएसपी मनोज कुमार, डीएसपी संदीप और डीएसपी गोरखपाल राणा ने राजपूत और दलित समाज के लोगों की बैठक बुलाई थी। निसिंग थाना में दोनों पक्षों से विचार-विमर्श के बाद गांव में शांति बनाए रखने के लिए एक शांति कमेटी का गठन किया गया था। इस कमेटी में दलित समाज के 14 और राजपूत समाज के 18 लोगों को शामिल किया गया, ताकि आपसी संवाद और समझ के जरिए माहौल को सामान्य बनाया जा सके। कमेटी लगातार गांव के युवाओं और अन्य लोगों से शांति बनाए रखने और प्रशासन पर भरोसा रखने की अपील कर रही है।
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इसके बावजूद कुछ शरारती तत्व माहौल बिगाड़ने से बाज नहीं आ रहे। वे सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट डालकर लोगों को भड़काने की कोशिश कर रहे हैं। कई मामलों में पोस्ट डालने के बाद उन्हें डिलीट भी कर दिया जाता है, लेकिन पुलिस उनकी पहचान करने में जुटी है।
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अस्थायी चौकी बनाने के मांग फिर उठी
गोंदर गांव पहले भी संवेदनशील रहा है। 24 नवंबर 2019 को पहले दलित समाज के कपिल के साथ झगड़ा हो जाने और इलाज के दौरान उसकी 30 नवंबर 2019 को उसकी मौत हो जाने के बाद पांच नामजद सहित 50 के करीब लोगों के खिलाफ हत्या को प्राथमिकी दर्ज हुई थी। निसिंग में साढ़े नौ घंटे तक सड़क पर शव रखकर जाम लगाया गया था। लोगों ने आरोपियों की गिरफ्तारी और गांव में अस्थायी पुलिस चौकी बनाए जाने की मांग की थी। उस समय पुलिस तैनात की गई थी। अगर अस्थायी की बजाए स्थायी पुलिस चौकी बना दी जाती तो शायद हत्या ना होती।
पुलिस ने मामले में शामिल अंकित, काका, नोनी, अमर सिंह और सूरज सहित अन्य को गिरफ्तार किया था। आठ माह पहले उस मामले में सभी की जमानत हो गई थी। 18 अप्रैल को सूरज की हत्या के बाद फिर माहौल तनावपूर्ण हो गया।
गोंदर गांव में पुलिस शांति बनाए रखने के लिए प्रयासरत है। गांव में लगातार पुलिस की तैनाती है। मुख्य आरोपी पकड़े जा चुके हैं। सोशल मीडिया पर भी नजर रखी जा रही है। भड़काऊ पोस्ट करने वालो के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - संदीप कुमार, डीएसपी हेडक्वार्टर, करनाल पुलिस
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करनाल।
गोंदर गांव में सूरज हत्याकांड के बाद भले ही पुलिस की सख्ती से जमीनी स्तर पर शांति कायम हो गई हो लेकिन सोशल मीडिया पर दोनों पक्षों के बीच तनाव अब भी थमता नजर नहीं आ रहा। गांव में हालात सामान्य बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन ने कड़ी निगरानी व्यवस्था लागू कर रखी है। करीब 40 पुलिसकर्मी दिन-रात गांव में तैनात हैं जिससे किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।
प्रशासन की सक्रियता और शांति कमेटी के प्रयासों का असर यह है कि गांव में फिलहाल कोई बड़ा विवाद सामने नहीं आया है। हालांकि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लगातार भड़काऊ टिप्पणियां और कटाक्ष सामने आ रहे हैं, ये माहौल को फिर से खराब करने की आशंका पैदा कर रहे हैं। दोनों पक्षों के कुछ लोग आपसी बयानबाजी से बाज नहीं आ रहे जिससे तनाव की स्थिति से इंकार नहीं किया जा सकता। कई लोग युवाओं को जातीय तौर से उकसाने के लिए पोस्ट डाल रहे हैं।
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गौरतलब है कि 25 अप्रैल को एसपी नरेंद्र बिजारणिया के मार्गदर्शन में डीएसपी मनोज कुमार, डीएसपी संदीप और डीएसपी गोरखपाल राणा ने राजपूत और दलित समाज के लोगों की बैठक बुलाई थी। निसिंग थाना में दोनों पक्षों से विचार-विमर्श के बाद गांव में शांति बनाए रखने के लिए एक शांति कमेटी का गठन किया गया था। इस कमेटी में दलित समाज के 14 और राजपूत समाज के 18 लोगों को शामिल किया गया, ताकि आपसी संवाद और समझ के जरिए माहौल को सामान्य बनाया जा सके। कमेटी लगातार गांव के युवाओं और अन्य लोगों से शांति बनाए रखने और प्रशासन पर भरोसा रखने की अपील कर रही है।
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इसके बावजूद कुछ शरारती तत्व माहौल बिगाड़ने से बाज नहीं आ रहे। वे सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट डालकर लोगों को भड़काने की कोशिश कर रहे हैं। कई मामलों में पोस्ट डालने के बाद उन्हें डिलीट भी कर दिया जाता है, लेकिन पुलिस उनकी पहचान करने में जुटी है।
अस्थायी चौकी बनाने के मांग फिर उठी
गोंदर गांव पहले भी संवेदनशील रहा है। 24 नवंबर 2019 को पहले दलित समाज के कपिल के साथ झगड़ा हो जाने और इलाज के दौरान उसकी 30 नवंबर 2019 को उसकी मौत हो जाने के बाद पांच नामजद सहित 50 के करीब लोगों के खिलाफ हत्या को प्राथमिकी दर्ज हुई थी। निसिंग में साढ़े नौ घंटे तक सड़क पर शव रखकर जाम लगाया गया था। लोगों ने आरोपियों की गिरफ्तारी और गांव में अस्थायी पुलिस चौकी बनाए जाने की मांग की थी। उस समय पुलिस तैनात की गई थी। अगर अस्थायी की बजाए स्थायी पुलिस चौकी बना दी जाती तो शायद हत्या ना होती।
पुलिस ने मामले में शामिल अंकित, काका, नोनी, अमर सिंह और सूरज सहित अन्य को गिरफ्तार किया था। आठ माह पहले उस मामले में सभी की जमानत हो गई थी। 18 अप्रैल को सूरज की हत्या के बाद फिर माहौल तनावपूर्ण हो गया।
गोंदर गांव में पुलिस शांति बनाए रखने के लिए प्रयासरत है। गांव में लगातार पुलिस की तैनाती है। मुख्य आरोपी पकड़े जा चुके हैं। सोशल मीडिया पर भी नजर रखी जा रही है। भड़काऊ पोस्ट करने वालो के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - संदीप कुमार, डीएसपी हेडक्वार्टर, करनाल पुलिस

गोंदर गांव में खड़ी पुलिस की बस।