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Karnal News: आश्वासन के बाद भी कैशलेस उपचार न करने पर जुर्माना

Sun, 03 May 2026 12:30 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल Updated Sun, 03 May 2026 12:30 AM IST
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Penalty for not providing cashless treatment despite assurance
माई सिटी रिपोर्टर
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करनाल। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक महत्वपूर्ण फैसले में जिंदल मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल (इन्द्री) को आदेश दिया है कि वह मरीज की ओर से इलाज पर किए गए खर्च को ब्याज सहित लौटाए। अस्पताल ने मरीज को कैशलेस उपचार या खर्च किए गए रुपयों की भुगतान का आश्वासन दिया था। हालांकि बीमा कंपनी ने दावा खारिज कर दिया। सुनवाई के दौरान अस्पताल से से कोई पेश नहीं हुआ। इस कारण एकतरफा कार्रवाई करते हुए 31 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
आयोग के फैसले के अनुसार, शिकायतकर्ता विपिन गोयल ने नवंबर, 2024 में डेंगू के इलाज के लिए जिंदल अस्पताल में दाखिला लिया था। उनके पास स्टार हेल्थ इंश्योरेंस की पॉलिसी थी। शिकायतकर्ता का आरोप था कि अस्पताल ने भरोसा दिलाया था कि उनके इलाज का खर्च बीमा कंपनी की ओर से वापस कर दिया जाएगा। जब बीमा कंपनी स्टार हेल्थ को 22 हजार 750 रुपये का क्लेम भेजा गया, तो उन्होंने इसे यह कहकर खारिज कर दिया कि यह अस्पताल उनकी बाहर की गई सूची में आता है।
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अदालत ने पाया कि बीमा कंपनी ने पहले ही इस अस्पताल को अपनी सूची से बाहर कर दिया था और इसकी जानकारी उनकी वेबसाइट पर उपलब्ध थी। हालांकि अस्पताल ने मरीज को यह सच नहीं बताया और उसे कैशलेस या रिइम्बर्समेंट का झूठा आश्वासन दिया। सुनवाई के दौरान अस्पताल की ओर से कोई पेश नहीं हुआ जिसके कारण उनके खिलाफ एकतरफा कार्रवाई की गई।
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सेवा में कमी का दोष
आयोग के अध्यक्ष जसवंत सिंह और सदस्यों ने अस्पताल की इस कार्यप्रणाली को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार माना। आयोग ने आदेश दिया कि अस्पताल शिकायतकर्ता को 22 हजार 750 रुपये की राशि 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज (शिकायत दर्ज करने की तारीख से) के साथ वापस करे। इसके साथ ही मानसिक पीड़ा और उत्पीड़न के लिए अस्पताल 20 हजार रुपये का अतिरिक्त मुआवजा दे। वहीं शिकायतकर्ता को कानूनी लड़ाई के खर्च के रूप में 11 हजार रुपये दिए जाएं। वहीं आयोग ने बीमा कंपनी स्टार हेल्थ के खिलाफ शिकायत को खारिज कर दिया गया, क्योंकि उन्होंने नियमों के तहत क्लेम मना किया था
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