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Karnal News: रिंग रोड भूमि मुआवजा बढ़ाने की याचिका खारिज, पांच गांवों के किसानों को झटका
Thu, 28 May 2026 01:39 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Thu, 28 May 2026 01:39 AM IST
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रिंग रोड (पूर्वी बाईपास) निर्माण के लिए अधिग्रहित भूमि के मुआवजे में बढ़ोतरी की मांग करते हुए दायर याचिकाओं को मध्यस्थ-सह-उपायुक्त डॉ. आनंद कुमार शर्मा ने खारिज कर दिया है। फैसले से सलारु, दादूपुर खुर्द, दनियालपुर, टपराना और नेवल गांवों के किसानों व भूस्वामियों को झटका लगा है।
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने वर्ष 2021 में इन गांवों की भूमि का अधिग्रहण किया था। इसके बाद 24 जुलाई 2022 को सक्षम प्राधिकारी (भूमि अधिग्रहण) एवं जिला राजस्व अधिकारी ने कलेक्टर रेट के आधार पर मुआवजा राशि का अवार्ड घोषित किया था।
भूमि अधिग्रहण मामलों के विशेषज्ञ एडवोकेट चौधरी शक्ति सिंह ने बताया कि अवार्ड के खिलाफ किसानों ने मुआवजा राशि बढ़ाने, अधिग्रहण के कारण बची भूमि के दो हिस्सों में बंटने पर पृथक्करण शुल्क, हर्जाना और विलंब अवधि का ब्याज दिलाने की मांग को लेकर याचिकाएं दायर की थीं। हालांकि, मध्यस्थ-सह-उपायुक्त ने इन सभी मांगों को अस्वीकार करते हुए याचिकाएं खारिज कर दीं।
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किसान बोले, बाजार मूल्य के हिसाब से नहीं दी गई राशि
किसान कश्मीर सिंह, दरबारा सिंह, पवन कुमार, महेंद्र सिंह, भीम सिंह, शेर सिंह, सुरजीत सिंह, पुष्पिंदर सिंह, संजीव कुमार, वेद प्रकाश, बलदेव सिंह, बचन सिंह, निशान सिंह का कहना है कि सरकार ने उन्हें उनकी अधिगृहीत भूमि का मुआवजा कलेक्टर रेट के हिसाब से दिया था जबकि उस समय उनकी भूमि का बाजार मूल्य बहुत ज्यादा था। भूस्वामियों को उनकी भूमि का बाजार मूल्य के हिसाब से ही मुआवजा दिया जाना चाहिए था।
निर्णय तर्कहीन, आदेश में प्रासंगिक निर्णयों का उल्लेख ही नहीं
एडवोकेट चौधरी शक्ति सिंह ने इस निर्णय को तर्कहीन बताते हुए कहा कि आदेश में उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय के प्रासंगिक निर्णयों का उल्लेख तक नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है। उन्होंने प्रभावित किसानों से अपील की कि वे निर्धारित समयावधि में जिला न्यायालय में आपत्ति याचिका दायर करें।
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रिंग रोड (पूर्वी बाईपास) निर्माण के लिए अधिग्रहित भूमि के मुआवजे में बढ़ोतरी की मांग करते हुए दायर याचिकाओं को मध्यस्थ-सह-उपायुक्त डॉ. आनंद कुमार शर्मा ने खारिज कर दिया है। फैसले से सलारु, दादूपुर खुर्द, दनियालपुर, टपराना और नेवल गांवों के किसानों व भूस्वामियों को झटका लगा है।
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने वर्ष 2021 में इन गांवों की भूमि का अधिग्रहण किया था। इसके बाद 24 जुलाई 2022 को सक्षम प्राधिकारी (भूमि अधिग्रहण) एवं जिला राजस्व अधिकारी ने कलेक्टर रेट के आधार पर मुआवजा राशि का अवार्ड घोषित किया था।
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भूमि अधिग्रहण मामलों के विशेषज्ञ एडवोकेट चौधरी शक्ति सिंह ने बताया कि अवार्ड के खिलाफ किसानों ने मुआवजा राशि बढ़ाने, अधिग्रहण के कारण बची भूमि के दो हिस्सों में बंटने पर पृथक्करण शुल्क, हर्जाना और विलंब अवधि का ब्याज दिलाने की मांग को लेकर याचिकाएं दायर की थीं। हालांकि, मध्यस्थ-सह-उपायुक्त ने इन सभी मांगों को अस्वीकार करते हुए याचिकाएं खारिज कर दीं।
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किसान बोले, बाजार मूल्य के हिसाब से नहीं दी गई राशि
किसान कश्मीर सिंह, दरबारा सिंह, पवन कुमार, महेंद्र सिंह, भीम सिंह, शेर सिंह, सुरजीत सिंह, पुष्पिंदर सिंह, संजीव कुमार, वेद प्रकाश, बलदेव सिंह, बचन सिंह, निशान सिंह का कहना है कि सरकार ने उन्हें उनकी अधिगृहीत भूमि का मुआवजा कलेक्टर रेट के हिसाब से दिया था जबकि उस समय उनकी भूमि का बाजार मूल्य बहुत ज्यादा था। भूस्वामियों को उनकी भूमि का बाजार मूल्य के हिसाब से ही मुआवजा दिया जाना चाहिए था।
निर्णय तर्कहीन, आदेश में प्रासंगिक निर्णयों का उल्लेख ही नहीं
एडवोकेट चौधरी शक्ति सिंह ने इस निर्णय को तर्कहीन बताते हुए कहा कि आदेश में उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय के प्रासंगिक निर्णयों का उल्लेख तक नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है। उन्होंने प्रभावित किसानों से अपील की कि वे निर्धारित समयावधि में जिला न्यायालय में आपत्ति याचिका दायर करें।