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Karnal News: संपत्ति कर माफ और हर वर्ष प्रमाणपत्र देने की शर्त हो खत्म
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अमर उजाला कार्यालय में आयोजित संवाद कार्यक्रम में उपस्थित पूर्व सैनिक। अमर उजाला
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। पूर्व सैनिक व उनके परिवारों के लिए रिटायरमेंट के बाद नौकरी तो सरकार की ओर से दी जाती है लेकिन इसकी प्रक्रिया और शर्तें पूर्व सैनिक को नौकरी से दूर रखती हैं। सैनिकों ने इसमें राहत की मांग की है। उनका कहना है कि ग्रुप डी और सी की नौकरी के लिए पूर्व सैनिक को भी सीईटी देना पड़ता है जबकि सेना में नौकरी के दौरान जवान पढ़ाई से दूर रहता है इसलिए टेस्ट पास करके नौकरी पाना मुश्किल होता है।
वीरवार को अमर उजाला कार्यालय में संवाद का आयोजन हुआ। इस दौरान पूर्व सैनिक सभा, अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद के सदस्य और अन्य पूर्व सैनिक पहुंचे। उन्होंने अलग-अलग विषयों पर अपनी बात रखी। पूर्व सैनिकों ने कहा कि संपत्ति कर माफ होना चाहिए, इसके लिए हर वर्ष प्रमाणपत्र देने की शर्त को भी खत्म किया जाना चाहिए।
यह रखे विचार-
- पूर्व फ्लाइंग ऑफिसर शिव कुमार कांबोज का कहना है कि मिल्ट्री सर्विस पे लाइफ रिस्क के लिए दिया जाता है, यह जवान और अधिकारी के लिए एक समान नहीं है, जबकि सीमा पर खड़े जवान का रिस्क ज्यादा है। लेकिन नर्सिंग स्टाफ को इससे भी ज्यादा दिया जाता है।
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- अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद के जिला अध्यक्ष एवं पूर्व वारंट ऑफिसर विनीत पांडेय का कहना है कि रिटायरमेंट के बाद पूर्व सैनिक को दूसरी नौकरी का कोटा होता है, इसमें सीईटी कई तरह की शर्ते होती हैं। जिनके कारण नौकरी नहीं मिल पाती। इन्हें हटाना चाहिए।
- पूर्व जेडब्ल्यूओ ऋषिपाल कांबोज का कहना है कि वायु सेना से सेवानिवृत्त होने वाले सैनिक के जो बच्चे 25 साल से ज्यादा उम्र के हैं, उनका विवरण डिस्चार्ज बुक में नहीं दिया जाता, जबकि आर्मी में दिया जाता है। यह भेदभाव बंद होना चाहिए। ताकि बच्चों को भी हक मिले।
पूर्व सर्जेंट बलजीत सिंह का कहना है कि पूर्व सैनिक के लिए नौकरी का कोटा तय है, लेकिन परीक्षा जैसी शर्तें होने के कारण यह कोटा खाली रह जाता है। इसमें राहत दी जानी चाहिए। ताकि सभी को रिटायरमेंट के बाद अच्छी नौकरी मिल सके।
पूर्व सर्जेंट योगेंद्र पाठक का कहना है कि पूर्व सैनिकों के लिए अलग से सोसायटी या सेक्टर होना चाहिए। अपनी जिंदगी का अहम हिस्सा वे देश सेवा में देते हैं, इसके बाद भी रहने के लिए घर नहीं मिल पाता। हाउस टैक्स माफी के लिए भी राहत मिले।
पूर्व सैनिक भूपेंद्र मान का कहना है कि टोल टैक्स में छूट दी जानी चाहिए। जब सेना में होते हैं तब तो यह छूट दी जाती है लेकिन उस समय सफर नहीं कर पाते। जब रिटायरमेंट के बाद सफर करना होता है तब यह छूट नहीं होती।
पूर्व सैनिक कुलदीप सिंह का कहना है कि सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद अगली नौकरी के लिए सामान्य युवाओं के साथ परीक्षा देनी पड़ती है, जबकि सैनिक की सेना में नौकरी के कारण पढ़ाई में भी काफी अंतर आ चुका होता है, ऐसा नहीं होना चाहिए।
पूर्व सैनिक बलराज सिंह का कहना है कि संपत्ति कर माफी के लिए हर साल प्रमाणपत्र देना पड़ता है, इसमें राहत देनी चाहिए। यदि एक बार प्रमाणपत्र दे दिया जाए तो उसे हमेशा के लिए मान्य रखना चाहिए। मृत्यु के बाद ही आगामी कार्यवाही हो।
पूर्व सैनिक चंद्रभान का कहना है कि सैनिकों के प्रति सम्मान का भाव होना चाहिए। पूर्व सैनिक जब नौकरी के बाद अपने क्षेत्र में आता है तो कुछ लोग सम्मान का भाव नहीं रखते। जबकि जवान विषम परिस्थिति में देश की सेवा करके लौटा होता है।
पूर्व सैनिक सभा के अध्यक्ष कृष्ण सिंह का कहना है कि राज्य सैनिक बोर्ड में जो नौकरी पर पूर्व सैनिकों को ही रखा जाना चाहिए। पिछले 10 वर्ष से बोर्ड के सदस्य घोषित नहीं किए गए हैं। बोर्ड का कर्मचारी पूर्व सैनिक होगा तो वह पूर्व सैनिकों के भाव को भी समझेगा।
पूर्व सैनिक सभा के सदस्य दिनेश कुमार शर्मा का कहना है कि सैनिक भवन बनना चाहिए। ताकि सैनिक अपनी समस्याओं व आयोजनों के लिए एक ही जगह का इस्तेमाल कर सकें। सैनिकों के लिए अलग से आरक्षण होगा तो सेना में जाने का भाव भी बढ़ेगा।
पूर्व सैनिक अनिल कुमार का कहना है कि अग्निवीर योजना बंद होनी चाहिए। इससे युवाओं को सेना में नौकरी का लाभ नहीं मिल पा रहा। केवल चार साल नौकरी का समय रखा है। जबकि इस समय में तो जवान सेना की पूरी प्रक्रिया को भी नहीं समझ पाता।
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करनाल। पूर्व सैनिक व उनके परिवारों के लिए रिटायरमेंट के बाद नौकरी तो सरकार की ओर से दी जाती है लेकिन इसकी प्रक्रिया और शर्तें पूर्व सैनिक को नौकरी से दूर रखती हैं। सैनिकों ने इसमें राहत की मांग की है। उनका कहना है कि ग्रुप डी और सी की नौकरी के लिए पूर्व सैनिक को भी सीईटी देना पड़ता है जबकि सेना में नौकरी के दौरान जवान पढ़ाई से दूर रहता है इसलिए टेस्ट पास करके नौकरी पाना मुश्किल होता है।
वीरवार को अमर उजाला कार्यालय में संवाद का आयोजन हुआ। इस दौरान पूर्व सैनिक सभा, अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद के सदस्य और अन्य पूर्व सैनिक पहुंचे। उन्होंने अलग-अलग विषयों पर अपनी बात रखी। पूर्व सैनिकों ने कहा कि संपत्ति कर माफ होना चाहिए, इसके लिए हर वर्ष प्रमाणपत्र देने की शर्त को भी खत्म किया जाना चाहिए।
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यह रखे विचार-
- पूर्व फ्लाइंग ऑफिसर शिव कुमार कांबोज का कहना है कि मिल्ट्री सर्विस पे लाइफ रिस्क के लिए दिया जाता है, यह जवान और अधिकारी के लिए एक समान नहीं है, जबकि सीमा पर खड़े जवान का रिस्क ज्यादा है। लेकिन नर्सिंग स्टाफ को इससे भी ज्यादा दिया जाता है।
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- अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद के जिला अध्यक्ष एवं पूर्व वारंट ऑफिसर विनीत पांडेय का कहना है कि रिटायरमेंट के बाद पूर्व सैनिक को दूसरी नौकरी का कोटा होता है, इसमें सीईटी कई तरह की शर्ते होती हैं। जिनके कारण नौकरी नहीं मिल पाती। इन्हें हटाना चाहिए।
- पूर्व जेडब्ल्यूओ ऋषिपाल कांबोज का कहना है कि वायु सेना से सेवानिवृत्त होने वाले सैनिक के जो बच्चे 25 साल से ज्यादा उम्र के हैं, उनका विवरण डिस्चार्ज बुक में नहीं दिया जाता, जबकि आर्मी में दिया जाता है। यह भेदभाव बंद होना चाहिए। ताकि बच्चों को भी हक मिले।
पूर्व सर्जेंट बलजीत सिंह का कहना है कि पूर्व सैनिक के लिए नौकरी का कोटा तय है, लेकिन परीक्षा जैसी शर्तें होने के कारण यह कोटा खाली रह जाता है। इसमें राहत दी जानी चाहिए। ताकि सभी को रिटायरमेंट के बाद अच्छी नौकरी मिल सके।
पूर्व सर्जेंट योगेंद्र पाठक का कहना है कि पूर्व सैनिकों के लिए अलग से सोसायटी या सेक्टर होना चाहिए। अपनी जिंदगी का अहम हिस्सा वे देश सेवा में देते हैं, इसके बाद भी रहने के लिए घर नहीं मिल पाता। हाउस टैक्स माफी के लिए भी राहत मिले।
पूर्व सैनिक भूपेंद्र मान का कहना है कि टोल टैक्स में छूट दी जानी चाहिए। जब सेना में होते हैं तब तो यह छूट दी जाती है लेकिन उस समय सफर नहीं कर पाते। जब रिटायरमेंट के बाद सफर करना होता है तब यह छूट नहीं होती।
पूर्व सैनिक कुलदीप सिंह का कहना है कि सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद अगली नौकरी के लिए सामान्य युवाओं के साथ परीक्षा देनी पड़ती है, जबकि सैनिक की सेना में नौकरी के कारण पढ़ाई में भी काफी अंतर आ चुका होता है, ऐसा नहीं होना चाहिए।
पूर्व सैनिक बलराज सिंह का कहना है कि संपत्ति कर माफी के लिए हर साल प्रमाणपत्र देना पड़ता है, इसमें राहत देनी चाहिए। यदि एक बार प्रमाणपत्र दे दिया जाए तो उसे हमेशा के लिए मान्य रखना चाहिए। मृत्यु के बाद ही आगामी कार्यवाही हो।
पूर्व सैनिक चंद्रभान का कहना है कि सैनिकों के प्रति सम्मान का भाव होना चाहिए। पूर्व सैनिक जब नौकरी के बाद अपने क्षेत्र में आता है तो कुछ लोग सम्मान का भाव नहीं रखते। जबकि जवान विषम परिस्थिति में देश की सेवा करके लौटा होता है।
पूर्व सैनिक सभा के अध्यक्ष कृष्ण सिंह का कहना है कि राज्य सैनिक बोर्ड में जो नौकरी पर पूर्व सैनिकों को ही रखा जाना चाहिए। पिछले 10 वर्ष से बोर्ड के सदस्य घोषित नहीं किए गए हैं। बोर्ड का कर्मचारी पूर्व सैनिक होगा तो वह पूर्व सैनिकों के भाव को भी समझेगा।
पूर्व सैनिक सभा के सदस्य दिनेश कुमार शर्मा का कहना है कि सैनिक भवन बनना चाहिए। ताकि सैनिक अपनी समस्याओं व आयोजनों के लिए एक ही जगह का इस्तेमाल कर सकें। सैनिकों के लिए अलग से आरक्षण होगा तो सेना में जाने का भाव भी बढ़ेगा।
पूर्व सैनिक अनिल कुमार का कहना है कि अग्निवीर योजना बंद होनी चाहिए। इससे युवाओं को सेना में नौकरी का लाभ नहीं मिल पा रहा। केवल चार साल नौकरी का समय रखा है। जबकि इस समय में तो जवान सेना की पूरी प्रक्रिया को भी नहीं समझ पाता।