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Karnal News: बीमे का दावा खारिज करना गलत, ब्याज भी देना होगा
Mon, 01 Jun 2026 02:31 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Mon, 01 Jun 2026 02:31 AM IST
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करनाल। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी के रक्तचाप और मधुमेह को गंभीर बीमारी बताकर क्लेम खारिज करने को गलत माना। तर्क दिया कि आज के तनाव भरे आधुनिक जीवन में उच्च रक्तचाप, मधुमेह, सिरदर्द या सर्दी-खांसी जैसी समस्याएं शरीर के सामान्य उतार-चढ़ाव का हिस्सा हैं। इन्हें पुरानी बीमारी बताकर बीमा कंपनियां क्लेम खारिज नहीं कर सकती। बीमा कंपनी को शिकायतकर्ता महिला नीलम रानी मेहता के इलाज का खर्च 97,912 रुपये ब्याज सहित लौटाने होंगे। मानसिक प्रताड़ना व कानूनी खर्च के लिए मुआवजा भी देना होगा।
आयोग के फैसले के अनुसार, हांसी रोड निवासी नीलम रानी मेहता (52) के पति वरिंदर मेहता ने वर्ष 2017 से न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी से न्यू इंडिया फ्लोटर मेडिक क्लेम पॉलिसी ले रखी थी। पाॅलिसी बिना किसी रुकावट के लगातार चल रही थी। पॉलिसी का बीमा कवर आठ लाख रुपये था। इसके लिए उपभोक्ता ने 45,853 रुपये का प्रीमियम भरा था। 30 अक्तूबर 2023 को अचानक नीलम रानी के सीने में तेज दर्द, घबराहट और सांस फूलने की शिकायत हुई। इसके बाद उन्हें तुरंत फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हार्ट इंस्टीट्यूट, नई दिल्ली में दाखिल किया गया। वह एक नवंबर 2023 तक अस्पताल में भर्ती रहीं। वहां उनके इलाज पर कुल 97,912 रुपये का खर्च आया।
अस्पताल से छुट्टी के बाद जब शिकायतकर्ता ने बीमा कंपनी के पास क्लेम के लिए कागज जमा करवाए। कंपनी ने 6 दिसंबर 2023 को एक पत्र जारी कर क्लेम को पूरी तरह खारिज कर दिया। कंपनी का तर्क था कि मरीज का इलाज हाइपोथायरायडिज्म और उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियों के लिए किया गया था और पॉलिसी की धारा 4.4.1 के तहत गैर-संबंधित डायग्नोस्टिक खर्चों का भुगतान नहीं किया जा सकता। इसके बाद पीड़ित महिला ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से उपभोक्ता अदालत में शिकायत दर्ज करवाई।
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बीमा कंपनी का रवैया अनुचित : आयोग
उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष जसवंत सिंह और सदस्य नीरू अग्रवाल व सर्वजीत कौर की पीठ ने बीमा कंपनी को कड़ी फटकार लगाई। आयोग ने बीमा कंपनी के इस रवैये को सेवा में लापरवाही और अनुचित व्यापार व्यवहार माना। आयोग ने कंपनी को आदेश दिए कि वह शिकायतकर्ता को 97 हजार 912 रुपये की राशि क्लेम खारिज होने की तारीख (6 दिसंबर 2023) से भुगतान के दिन तक नाै प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ दी जाए। इसके अलावा महिला को हुई मानसिक परेशानी और प्रताड़ना के एवज में 25 हजार रुपये का मुआवजा दिया जाए और शिकायतकर्ता को अदालती कार्रवाई के खर्च के रूप में 11 हजार रुपये की राशि का भुगतान किया जाए।
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आयोग के फैसले के अनुसार, हांसी रोड निवासी नीलम रानी मेहता (52) के पति वरिंदर मेहता ने वर्ष 2017 से न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी से न्यू इंडिया फ्लोटर मेडिक क्लेम पॉलिसी ले रखी थी। पाॅलिसी बिना किसी रुकावट के लगातार चल रही थी। पॉलिसी का बीमा कवर आठ लाख रुपये था। इसके लिए उपभोक्ता ने 45,853 रुपये का प्रीमियम भरा था। 30 अक्तूबर 2023 को अचानक नीलम रानी के सीने में तेज दर्द, घबराहट और सांस फूलने की शिकायत हुई। इसके बाद उन्हें तुरंत फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हार्ट इंस्टीट्यूट, नई दिल्ली में दाखिल किया गया। वह एक नवंबर 2023 तक अस्पताल में भर्ती रहीं। वहां उनके इलाज पर कुल 97,912 रुपये का खर्च आया।
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अस्पताल से छुट्टी के बाद जब शिकायतकर्ता ने बीमा कंपनी के पास क्लेम के लिए कागज जमा करवाए। कंपनी ने 6 दिसंबर 2023 को एक पत्र जारी कर क्लेम को पूरी तरह खारिज कर दिया। कंपनी का तर्क था कि मरीज का इलाज हाइपोथायरायडिज्म और उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियों के लिए किया गया था और पॉलिसी की धारा 4.4.1 के तहत गैर-संबंधित डायग्नोस्टिक खर्चों का भुगतान नहीं किया जा सकता। इसके बाद पीड़ित महिला ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से उपभोक्ता अदालत में शिकायत दर्ज करवाई।
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बीमा कंपनी का रवैया अनुचित : आयोग
उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष जसवंत सिंह और सदस्य नीरू अग्रवाल व सर्वजीत कौर की पीठ ने बीमा कंपनी को कड़ी फटकार लगाई। आयोग ने बीमा कंपनी के इस रवैये को सेवा में लापरवाही और अनुचित व्यापार व्यवहार माना। आयोग ने कंपनी को आदेश दिए कि वह शिकायतकर्ता को 97 हजार 912 रुपये की राशि क्लेम खारिज होने की तारीख (6 दिसंबर 2023) से भुगतान के दिन तक नाै प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ दी जाए। इसके अलावा महिला को हुई मानसिक परेशानी और प्रताड़ना के एवज में 25 हजार रुपये का मुआवजा दिया जाए और शिकायतकर्ता को अदालती कार्रवाई के खर्च के रूप में 11 हजार रुपये की राशि का भुगतान किया जाए।