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Karnal News: बार-बार खराब होने वाला स्कूटर बदलें या रुपये वापस करें

Sat, 02 May 2026 02:45 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल Updated Sat, 02 May 2026 02:45 AM IST
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Replace or refund your scooter for frequent breakdowns
करनाल।
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जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक महत्वपूर्ण फैसले में होंडा मोटरसाइकिल एंड स्कूटर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (निर्माता) को आदेश दिया है कि वह एक ग्राहक के दोषपूर्ण स्कूटर को बदले या उसकी पूरी कीमत वापस करे। इसके अलावा मानसिक प्रताड़ना के लिए 15 हजार रुपये का मुआवजा देने के भी आदेश दिए।
आयोग के फैसले के अनुसार, मंजूरा गांव निवासी आकाश ने 28 जून 2021 को राहुल पाम प्राइवेट लिमिटेड (डीलर) से 67,347 रुपये में एक होंडा एक्टिवा 6जी स्कूटर खरीदा था। स्कूटर पर पांच साल की वारंटी दी गई थी। हालांकि, खरीदने के महज 40 दिनों के भीतर ही स्कूटर में तेल रिसाव होने लगा। चलने में परेशानी शुरू हो गई।
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शिकायतकर्ता आकाश ने आरोप लगाया कि स्कूटर में शुरू से ही निर्माण संबंधी दोष था। बार-बार मरम्मत के बावजूद समस्या जस की तस बनी रही और स्कूटर रास्ते में कभी भी बंद हो जाता था। विपक्ष राहुल पाम प्राइवेट लिमिटेड ने तर्क दिया कि ग्राहक स्कूटर का उपयोग कॉमर्शियल काम के लिए और भारी बोझ लादने के लिए कर रहा था, इससे इंजन पर बुरा असर पड़ा। उन्होंने यह भी दावा किया कि वारंटी खत्म हो चुकी थी, क्योंकि इंजन के साथ किसी अनधिकृत मैकेनिक ने छेड़छाड़ की थी। होंडा मोटरसाइकिल ने अपनी तरफ से कोई लिखित जवाब पेश नहीं किया, जिसके कारण कोर्ट ने उनका पक्ष रखने का अधिकार समाप्त कर दिया था।
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जसवंत सिंह की अध्यक्षता वाले आयोग ने पाया कि रिकॉर्ड के अनुसार, स्कूटर खरीद के एक साल के भीतर कई बार मरम्मत के लिए वर्कशॉप जाना, यह साबित करता है कि उसमें निर्माण संबंधी दोष था। कोर्ट ने कंपनी के उस दावे को खारिज कर दिया कि स्कूटर कॉमर्शियल उपयोग में था, क्योंकि इसका कोई सबूत पेश नहीं किया गया।
आयोग ने कंपनी को आदेश दिए कि या तो कंपनी स्कूटर को बदले, या यदि संभव न हो तो पूरी कीमत वापस करे। इसके अलावा मानसिक प्रताड़ना के लिए 15 हजार रुपये का मुआवजा दे। कंपनी को आदेश दिया कि वह उपभोक्ता को मुकदमा खर्च के रूप में 11 हजार रुपये का भुगतान करे।

नई गाड़ी बार-बार वर्कशॉप जा रही है तो यह मेन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट

यह फैसला उन उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ी जीत है जो नई गाड़ी खरीदने के बाद उसके बार-बार खराब होने से परेशान रहते हैं। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर कोई नई गाड़ी वारंटी अवधि के भीतर बार-बार वर्कशॉप जा रही है, तो यह ‘मेन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट’ की श्रेणी में आता है। कंपनियों की ओर से केवल यह कह देना कि वाहन का उपयोग कॉमर्शियल हो रहा है, पर्याप्त नहीं है। उन्हें अदालत में इसका ठोस सबूत देना होगा। यह निर्णय कंपनियों को अपनी सर्विसिंग और उत्पाद की गुणवत्ता के प्रति अधिक जवाबदेह बनाता है।
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