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शोध : मिशन सेहत से सुधरेगा मानव, पशु और फसलों का स्वास्थ्य... प्रो-बायोटिक उत्पादों का होगा क्लीनिकल ट्रायल
Fri, 08 May 2026 03:46 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Fri, 08 May 2026 03:46 AM IST
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गगन तलवार
करनाल। अत्यधिक खाद और कीटनाशकों के प्रभाव से बिगड़े मानव, पशु और फसलों के स्वास्थ्य को मिशन सेहत से सुधारा जाएगा। दुग्ध व फसलों के प्रो बायोटिक उत्पादों का क्लीनिकल ट्रायल होगा। इसके लिए इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च से जुड़े 26 और इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चर रिसर्च से जुड़े देश के सभी 113 संस्थान मिलकर काम करेंगे।
उत्पाद और उसके क्लीनिकल ट्रायल की रिपोर्ट आने के बाद उत्पादों की प्रमाणिकता तय होगी, साथ ही मानव, पशु व पौधों की बिगड़ी सेहत में सुधार को लेकर नई एडवाइजरी भी तैयार होगी। इससे यह स्पष्ट होगा कि किस उत्पाद के इस्तेमाल या सेवन से उसका शरीर व प्रकृति पर क्या प्रभाव पड़ रहा है।
करनाल स्थित एनडीआरआई द्वारा दुग्ध से जुड़े प्रो बायोटिक उत्पादों पर क्लीनिकल ट्रायल किया जाएगा। इसके लिए दिल्ली एम्स और पीजीआई के विशेषज्ञों से भी संपर्क किया जा चुका है। आगामी दिनों में केंद्र सरकार की ओर से मिशन सेहत के लॉन्च करने के बाद इस पर काम शुरू हो जाएगा।
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संस्थान के निदेशक डॉ. धीर सिंह ने बताया कि लोगों के स्वास्थ्य का स्तर बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार के निर्देश पर आईसीएआर और आईसीएमआर ने मिलकर मिशन सेहत अभियान तैयार किया है। इनमें खाद्य उत्पादन से लेकर मानव स्वास्थ्य से जुड़ी जितनी भी वस्तुएं हैं, उनके क्लीनिकल असर पर शोध करने की योजना बनाई है।
पता चलेगा डेंगू होने पर बकरी के दूध का सेवन सही या गलत
एनडीआरआई के निदेशक डॉ. धीर सिंह का कहना है कि उत्पादन यदि खराब होगा तो सेहत ठीक नहीं हो सकती। अब आईसीएमआर ने भी यह महसूस किया है इसलिए इस दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। मिशन में दोनों काउंसिल से जुड़े विशेषज्ञ मिलकर काम करेंगे। केवल फर्टिलाइजर ही नहीं एनडीआरआई दुग्ध उत्पादन पर भी काम करेगा।
उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि डेंगू होने पर कह दिया जाता है कि बकरी का दूध पी लो... लेकिन यह लिखित कहीं नहीं है कि इसका सेवन ठीक है या नहीं। इसी तरह और भी कई प्रो बायोटिक उत्पाद हैं जिनके क्लीनिकल ट्रायल की जरूरत है।
खाद का इस्तेमाल रोकने के लिए किसानों तक पहुंचेंगे वैज्ञानिक
खेती में अत्यधिक कीटनाशक और खाद के इस्तेमाल को रोकने के लिए वैज्ञानिक किसानों तक पहुंचेंगे। निदेशक डॉ. धीर सिंह ने बताया कि इसके लिए केंद्रीय कृषि मंत्रालय के निर्देश पर एक माह का विशेष अभियान शुरू हो चुका है। अभियान में वैज्ञानिक किसानों के खेत में पहुंचकर मिट्टी के नमूने भी लेंगे। ताकि उनके क्षेत्र की मिट्टी की स्थिति का पता चले और किसानों की कृषि संबंधित दिक्कतें भी सामने आएं। इसके आधार पर शोध के नए विषय तय होंगे।
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करनाल। अत्यधिक खाद और कीटनाशकों के प्रभाव से बिगड़े मानव, पशु और फसलों के स्वास्थ्य को मिशन सेहत से सुधारा जाएगा। दुग्ध व फसलों के प्रो बायोटिक उत्पादों का क्लीनिकल ट्रायल होगा। इसके लिए इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च से जुड़े 26 और इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चर रिसर्च से जुड़े देश के सभी 113 संस्थान मिलकर काम करेंगे।
उत्पाद और उसके क्लीनिकल ट्रायल की रिपोर्ट आने के बाद उत्पादों की प्रमाणिकता तय होगी, साथ ही मानव, पशु व पौधों की बिगड़ी सेहत में सुधार को लेकर नई एडवाइजरी भी तैयार होगी। इससे यह स्पष्ट होगा कि किस उत्पाद के इस्तेमाल या सेवन से उसका शरीर व प्रकृति पर क्या प्रभाव पड़ रहा है।
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करनाल स्थित एनडीआरआई द्वारा दुग्ध से जुड़े प्रो बायोटिक उत्पादों पर क्लीनिकल ट्रायल किया जाएगा। इसके लिए दिल्ली एम्स और पीजीआई के विशेषज्ञों से भी संपर्क किया जा चुका है। आगामी दिनों में केंद्र सरकार की ओर से मिशन सेहत के लॉन्च करने के बाद इस पर काम शुरू हो जाएगा।
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संस्थान के निदेशक डॉ. धीर सिंह ने बताया कि लोगों के स्वास्थ्य का स्तर बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार के निर्देश पर आईसीएआर और आईसीएमआर ने मिलकर मिशन सेहत अभियान तैयार किया है। इनमें खाद्य उत्पादन से लेकर मानव स्वास्थ्य से जुड़ी जितनी भी वस्तुएं हैं, उनके क्लीनिकल असर पर शोध करने की योजना बनाई है।
पता चलेगा डेंगू होने पर बकरी के दूध का सेवन सही या गलत
एनडीआरआई के निदेशक डॉ. धीर सिंह का कहना है कि उत्पादन यदि खराब होगा तो सेहत ठीक नहीं हो सकती। अब आईसीएमआर ने भी यह महसूस किया है इसलिए इस दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। मिशन में दोनों काउंसिल से जुड़े विशेषज्ञ मिलकर काम करेंगे। केवल फर्टिलाइजर ही नहीं एनडीआरआई दुग्ध उत्पादन पर भी काम करेगा।
उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि डेंगू होने पर कह दिया जाता है कि बकरी का दूध पी लो... लेकिन यह लिखित कहीं नहीं है कि इसका सेवन ठीक है या नहीं। इसी तरह और भी कई प्रो बायोटिक उत्पाद हैं जिनके क्लीनिकल ट्रायल की जरूरत है।
खाद का इस्तेमाल रोकने के लिए किसानों तक पहुंचेंगे वैज्ञानिक
खेती में अत्यधिक कीटनाशक और खाद के इस्तेमाल को रोकने के लिए वैज्ञानिक किसानों तक पहुंचेंगे। निदेशक डॉ. धीर सिंह ने बताया कि इसके लिए केंद्रीय कृषि मंत्रालय के निर्देश पर एक माह का विशेष अभियान शुरू हो चुका है। अभियान में वैज्ञानिक किसानों के खेत में पहुंचकर मिट्टी के नमूने भी लेंगे। ताकि उनके क्षेत्र की मिट्टी की स्थिति का पता चले और किसानों की कृषि संबंधित दिक्कतें भी सामने आएं। इसके आधार पर शोध के नए विषय तय होंगे।