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Karnal News: स्कूलों ने तय दुकानें... मोलभाव नहीं, मनमाने दाम
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Sun, 29 Mar 2026 12:20 AM IST
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कुंजपुरा रोड स्थित करण बुक शॉप से किताब खरीदते ग्राहक
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। निजी स्कूलों की मनमानी से तय दुकानों का ऐसा संजाल है कि अभिभावक उससे बाहर नहीं निकल पा रहे। पर्ची के साथ उन्हें सीधे उसी दुकान पर भेज दिया जाता है, जहां पहले से पूरा सेट तैयार रहता है। यहां मोलभाव नहीं होता, कोई विकल्प न होने पर मजबूरी में मनमाने दाम पर किताबें खरीदनी पड़ती हैं। एनसीईआरटी की किताबों के साथ निजी प्रकाशकों की किताबें लगा दी हैं। निजी प्रकाशकों की किताबों के दाम 200 से हजार रुपये तक हैं जबकि एनसीईआरटी के सौ रुपये से कम ही होते हैं।
दुकानदार भी इसमें पूरी तरह शामिल हैं। अभिभावक जैसे ही तय दुकान पर पहुंचते हैं, सबसे पहले उनसे स्कूल का नाम पूछा जाता है। नाम मिलते ही बिना किसी देरी के पूरा सेट निकालकर दे दिया जाता है। यदि ग्राहक किसी अन्य स्कूल का होता है तो उसे या तो इंतजार करने को कहा जाता है या फिर दूसरी दुकान का पता बताकर वहां भेज दिया जाता है।
शहर के नामी स्कूलों ने अपनी-अपनी दुकानें तय कर रखी हैं, जहां से किताबें खरीदना अनिवार्य है। उदाहरण के तौर पर प्रताप स्कूल के अभिभावकों को अगर किताबें चाहिए तो उन्हें कह दिया जाता है कि आपको ये किताबें दयाल सिंह कॉलेज के सामने स्थित गुलाटी बुक शॉप पर ही मिलेंगी। वहीं दयाल सिंह पब्लिक स्कूल के लिए कुंजपुरा रोड स्थित करन बुक शॉप तय है।
निजी प्रकाशकों की किताबें महंगी
कक्षा छह की दयाल सिंह पब्लिक स्कूल में एनसीईआरटी की लगाई गई किताबों की कीमत 65 रुपये प्रति पुस्तक तक है। इसके बाद पांच से छह महंगी किताबें भी जोड़ दी गई हैं। इनमें एसएएफ की मोरल वैल्यूज 275 रुपये, लोकप्रिय प्रकाशन की ड्राइंग 225 रुपये, फनशिखा की जीके 390 रुपये, कारदोवा परमवीर पब्लिकेशन की पंजाबी 355 रुपये, हिंदी ग्रामर 496 रुपये और अभी मार्केट में आने वाली इनवेंटटेंट एजुकेशन की कंप्यूटर भी शामिल हैं। इसी तरह कक्षा आठ में भी है। एनसीईआरटी की छह किताबों के अलावा निजी प्रकाशकों की दो किताबें मोरल वैल्यूज 275 और ड्राइंग 225 रुपये की हैं। ऐसे में 390 रुपये की किताबें 890 में पड़ रही हैं।
मनमाने दाम वसूले जा रहे
पांचवी या छठी जैसी छोटी कक्षाओं में पढ़ने वाले बच्चों की एक किताब की कीमत भी 450 रुपये से ऊपर जा रही है। जहां एनसीईआरटी की एक किताब सामान्य रूप से करीब 65 रुपये में मिल रही है वहीं जब प्राइवेट प्रकाशकों की किताबें जोड़ दी गई हैं तो पूरा सेट 2000 रुपये या उससे भी अधिक तक पहुंच रहा है।
पाठ्यक्रम बदलने का हवाला
स्कूलों की ओर से हर साल पाठ्यक्रम में बदलाव का हवाला दिया जाता है और नई किताबें खरीदना जरूरी बता दिया जाता है। अभिभावकों का कहना है कि कई बार बदलाव बहुत मामूली होते हैं लेकिन इसके बावजूद पूरी किताब बदल दी जाती है। इससे पुराने सेट बेकार हो जाते हैं और हर साल नई खरीद करनी पड़ती है।
वर्जन-
इस मामले में सभी बीईओ को जांच के आदेश दे दिए गए हैं। अभिभावकों से शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। अपने स्तर पर भी जांच कराई जाएगी।- रोहताश वर्मा, जिला शिक्षा अधिकारी
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करनाल। निजी स्कूलों की मनमानी से तय दुकानों का ऐसा संजाल है कि अभिभावक उससे बाहर नहीं निकल पा रहे। पर्ची के साथ उन्हें सीधे उसी दुकान पर भेज दिया जाता है, जहां पहले से पूरा सेट तैयार रहता है। यहां मोलभाव नहीं होता, कोई विकल्प न होने पर मजबूरी में मनमाने दाम पर किताबें खरीदनी पड़ती हैं। एनसीईआरटी की किताबों के साथ निजी प्रकाशकों की किताबें लगा दी हैं। निजी प्रकाशकों की किताबों के दाम 200 से हजार रुपये तक हैं जबकि एनसीईआरटी के सौ रुपये से कम ही होते हैं।
दुकानदार भी इसमें पूरी तरह शामिल हैं। अभिभावक जैसे ही तय दुकान पर पहुंचते हैं, सबसे पहले उनसे स्कूल का नाम पूछा जाता है। नाम मिलते ही बिना किसी देरी के पूरा सेट निकालकर दे दिया जाता है। यदि ग्राहक किसी अन्य स्कूल का होता है तो उसे या तो इंतजार करने को कहा जाता है या फिर दूसरी दुकान का पता बताकर वहां भेज दिया जाता है।
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शहर के नामी स्कूलों ने अपनी-अपनी दुकानें तय कर रखी हैं, जहां से किताबें खरीदना अनिवार्य है। उदाहरण के तौर पर प्रताप स्कूल के अभिभावकों को अगर किताबें चाहिए तो उन्हें कह दिया जाता है कि आपको ये किताबें दयाल सिंह कॉलेज के सामने स्थित गुलाटी बुक शॉप पर ही मिलेंगी। वहीं दयाल सिंह पब्लिक स्कूल के लिए कुंजपुरा रोड स्थित करन बुक शॉप तय है।
निजी प्रकाशकों की किताबें महंगी
कक्षा छह की दयाल सिंह पब्लिक स्कूल में एनसीईआरटी की लगाई गई किताबों की कीमत 65 रुपये प्रति पुस्तक तक है। इसके बाद पांच से छह महंगी किताबें भी जोड़ दी गई हैं। इनमें एसएएफ की मोरल वैल्यूज 275 रुपये, लोकप्रिय प्रकाशन की ड्राइंग 225 रुपये, फनशिखा की जीके 390 रुपये, कारदोवा परमवीर पब्लिकेशन की पंजाबी 355 रुपये, हिंदी ग्रामर 496 रुपये और अभी मार्केट में आने वाली इनवेंटटेंट एजुकेशन की कंप्यूटर भी शामिल हैं। इसी तरह कक्षा आठ में भी है। एनसीईआरटी की छह किताबों के अलावा निजी प्रकाशकों की दो किताबें मोरल वैल्यूज 275 और ड्राइंग 225 रुपये की हैं। ऐसे में 390 रुपये की किताबें 890 में पड़ रही हैं।
मनमाने दाम वसूले जा रहे
पांचवी या छठी जैसी छोटी कक्षाओं में पढ़ने वाले बच्चों की एक किताब की कीमत भी 450 रुपये से ऊपर जा रही है। जहां एनसीईआरटी की एक किताब सामान्य रूप से करीब 65 रुपये में मिल रही है वहीं जब प्राइवेट प्रकाशकों की किताबें जोड़ दी गई हैं तो पूरा सेट 2000 रुपये या उससे भी अधिक तक पहुंच रहा है।
पाठ्यक्रम बदलने का हवाला
स्कूलों की ओर से हर साल पाठ्यक्रम में बदलाव का हवाला दिया जाता है और नई किताबें खरीदना जरूरी बता दिया जाता है। अभिभावकों का कहना है कि कई बार बदलाव बहुत मामूली होते हैं लेकिन इसके बावजूद पूरी किताब बदल दी जाती है। इससे पुराने सेट बेकार हो जाते हैं और हर साल नई खरीद करनी पड़ती है।
वर्जन-
इस मामले में सभी बीईओ को जांच के आदेश दे दिए गए हैं। अभिभावकों से शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। अपने स्तर पर भी जांच कराई जाएगी।- रोहताश वर्मा, जिला शिक्षा अधिकारी