बराड़ा। कस्बे के एक निजी स्कूल में चल रही 15 दिवसीय हरियाणवी लोक नृत्य कार्यशाला में छात्राओं ने अभ्यास किया। शुक्रवार को कार्यशाला के 12वें दिन छात्राओं के प्रदर्शन में आत्मविश्वास देखने को मिला। अब छात्राएं न केवल लोकनृत्य की ताल पर थिरक रही हैं, बल्कि अपनी समृद्ध विरासत की बारीकियों को भी आत्मसात कर रही हैं। प्रशिक्षक बुधराम मट्टू के कुशल निर्देशन में 12वें दिन छात्राओं ने नृत्य की कठिन मुद्राओं का अभ्यास किया।
इस दौरान प्रशिक्षक ने छात्राओं को समझाया कि नृत्य केवल कदमताल का नाम नहीं है, उन्होंने छात्राओं को सिखाया कि कैसे एक कलाकार अपने चेहरे के भावों से लोक कथाओं और खुशी के पलों को जीवंत कर सकता है। उन्होंने बताया कि कार्यशाला के शुरुआती दिनों की तुलना में आज छात्राओं के नृत्य में परिपक्वता नजर आई। लय और ताल के साथ उनके समन्वय ने देखने वालों को मंत्रमुग्ध कर दिया।