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Karnal News: एशिया के सबसे बड़े ट्रांजिट कैंप में योग से पढ़ाया अनुशासन का पाठ
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कर्नल आरडी सिंह
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- कर्नल आरडी सिंह ने 5000 जवानों को नियंत्रित करने के लिए निकाला था रास्ता, बोले- पूर्व सैनिक के रूप में आज भी करते हैं योग
माई सिटी रिपोर्टर
अंबाला। योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं बल्कि मानसिक शांति और अनुशासन का सबसे अचूक अस्त्र है। इस बात की मिसाल वर्ष 2005 में जम्मू स्थित एशिया के सबसे बड़े ट्रांजिट कैंप में देखने को मिली थी। तब कैंप के कमांडेंट रहे और वर्तमान में अंबाला छावनी निवासी कर्नल आरडी सिंह (सेवानिवृत्त) ने मुक्त तोपों की तरह हो चुके हजारों जवानों में अनुशासन कायम करने के लिए योग का सहारा लिया था। उनकी यह पहल इतनी कारगर रही कि कैंप को 2006 में एक प्रतिष्ठित सम्मान से नवाजा गया।
5000 जवानों को नियंत्रित करना था चुनौती
डिफेंस कॉलोनी निवासी एवं वर्तमान में इंटैक अंबाला चैप्टर के संयोजक कर्नल आरडी सिंह बताते हैं कि जम्मू ट्रांजिट कैंप में प्रतिदिन करीब 5000 सैनिक आते थे। बर्फबारी, घाटी और उच्च हिमालयी क्षेत्रों की कठिन ड्यूटी के बाद जब जवान घर लौटने के लिए ट्रांजिट कैंप पहुंचते तो वे खुद को अपेक्षाकृत स्वतंत्र महसूस करते थे। यूनिट के अधिकारियों की गैरमौजूदगी में अनुशासन में ढील आना स्वाभाविक था। इतने सारे जवानों को एक साथ नियंत्रित करना किसी चुनौती से कम नहीं था। कर्नल सिंह ने पहले एक योगाचार्य से एक महीने तक योग का गहन प्रशिक्षण लिया और फिर इसे अपने सैनिकों पर लागू किया। शाम के समय सेंट्रल रोल कॉल की शुरुआत की गई, जहां खुले मैदान में दरी और चटाइयां बिछाई जाती थीं। कर्नल खुद जवानों को सूर्य नमस्कार, कपालभाति, अनुलोम-विलोम और प्राणायाम कराते। शुरुआत में कुछ हिचकिचाहट हुई लेकिन जल्द 5000 जवान एक लय में आ गए।
जवानों का व्यवहार हुआ संतुलित
महज 30 मिनट के इस दैनिक सत्र का जादुई असर देखने को मिला। जवानों का व्यवहार सकारात्मक और संतुलित हो गया। आपस की बहसें और शिकायतें खत्म होने लगीं। जवानों का पहनावा सुधरा और वे तनावमुक्त होकर मुस्कुराते हुए कैंप से विदा होने लगे। कर्नल उन्हें सफर के दौरान और ड्यूटी पोस्ट पर भी योग करने की सलाह देते थे। इसी योग प्रयोग और उत्कृष्ट प्रशासन की बदौलत वर्ष 2006 में जम्मू ट्रांजिट कैंप प्रतिष्ठित सम्मान हासिल करने वाला पहला कैंप बना। सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद भी कर्नल आरडी सिंह की दिनचर्या से योग दूर नहीं हुआ है। उनका कहना है कि एक पूर्व सैनिक के रूप में आज भी योग और प्राणायाम उनके सबसे अच्छे मित्र हैं।
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माई सिटी रिपोर्टर
अंबाला। योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं बल्कि मानसिक शांति और अनुशासन का सबसे अचूक अस्त्र है। इस बात की मिसाल वर्ष 2005 में जम्मू स्थित एशिया के सबसे बड़े ट्रांजिट कैंप में देखने को मिली थी। तब कैंप के कमांडेंट रहे और वर्तमान में अंबाला छावनी निवासी कर्नल आरडी सिंह (सेवानिवृत्त) ने मुक्त तोपों की तरह हो चुके हजारों जवानों में अनुशासन कायम करने के लिए योग का सहारा लिया था। उनकी यह पहल इतनी कारगर रही कि कैंप को 2006 में एक प्रतिष्ठित सम्मान से नवाजा गया।
5000 जवानों को नियंत्रित करना था चुनौती
डिफेंस कॉलोनी निवासी एवं वर्तमान में इंटैक अंबाला चैप्टर के संयोजक कर्नल आरडी सिंह बताते हैं कि जम्मू ट्रांजिट कैंप में प्रतिदिन करीब 5000 सैनिक आते थे। बर्फबारी, घाटी और उच्च हिमालयी क्षेत्रों की कठिन ड्यूटी के बाद जब जवान घर लौटने के लिए ट्रांजिट कैंप पहुंचते तो वे खुद को अपेक्षाकृत स्वतंत्र महसूस करते थे। यूनिट के अधिकारियों की गैरमौजूदगी में अनुशासन में ढील आना स्वाभाविक था। इतने सारे जवानों को एक साथ नियंत्रित करना किसी चुनौती से कम नहीं था। कर्नल सिंह ने पहले एक योगाचार्य से एक महीने तक योग का गहन प्रशिक्षण लिया और फिर इसे अपने सैनिकों पर लागू किया। शाम के समय सेंट्रल रोल कॉल की शुरुआत की गई, जहां खुले मैदान में दरी और चटाइयां बिछाई जाती थीं। कर्नल खुद जवानों को सूर्य नमस्कार, कपालभाति, अनुलोम-विलोम और प्राणायाम कराते। शुरुआत में कुछ हिचकिचाहट हुई लेकिन जल्द 5000 जवान एक लय में आ गए।
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जवानों का व्यवहार हुआ संतुलित
महज 30 मिनट के इस दैनिक सत्र का जादुई असर देखने को मिला। जवानों का व्यवहार सकारात्मक और संतुलित हो गया। आपस की बहसें और शिकायतें खत्म होने लगीं। जवानों का पहनावा सुधरा और वे तनावमुक्त होकर मुस्कुराते हुए कैंप से विदा होने लगे। कर्नल उन्हें सफर के दौरान और ड्यूटी पोस्ट पर भी योग करने की सलाह देते थे। इसी योग प्रयोग और उत्कृष्ट प्रशासन की बदौलत वर्ष 2006 में जम्मू ट्रांजिट कैंप प्रतिष्ठित सम्मान हासिल करने वाला पहला कैंप बना। सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद भी कर्नल आरडी सिंह की दिनचर्या से योग दूर नहीं हुआ है। उनका कहना है कि एक पूर्व सैनिक के रूप में आज भी योग और प्राणायाम उनके सबसे अच्छे मित्र हैं।