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Karnal News: कंपनी नहीं सुधार रही एमआरआई मशीन, मुख्यालय से लटकी व्यवस्था
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मेडिकल कॉलेज में बंद पड़ा एमआरआई कक्ष। अमर उजाला
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में लगी एमआरआई मशीन पिछले दो माह से अधिक समय से खराब पड़ी है। मरीजों की जांच प्रभावित हो रही है। अब तक 400 से ज्यादा एमआरआई जांचें टल चुकी हैं। मरीजों को या तो नई तारीख दी जा रही है या फिर निजी सेंटरों का सहारा लेना पड़ रहा है, जहां जांच के लिए हजारों रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं।
शुरुआत में मशीन में तकनीकी खराबी आने के बाद कंपनी को इसकी सूचना दी गई थी। बताया गया कि मशीन का एक महत्वपूर्ण पुर्जा खराब हो गया था जिसे जर्मनी से मंगाया गया। इसके उपलब्ध न होने के कारण मशीन को समय पर ठीक नहीं किया जा सका। लंबे इंतजार के बाद अब पुर्जा उपलब्ध हो चुका है लेकिन मरम्मत का काम मुख्यालय से अनुमति न मिलने के कारण अटका हुआ है। कंपनी की टीम को काम शुरू करने के लिए प्रशासनिक स्वीकृति का इंतजार है।
एमआरआई जांच के लिए रोजाना बड़ी संख्या में मरीज मेडिकल कॉलेज पहुंचते हैं। न्यूरोलॉजी, ऑर्थोपेडिक, ट्रॉमा और अन्य गंभीर बीमारियों के मरीजों को एमआरआई की जरूरत पड़ती है। मशीन बंद होने के कारण कई मरीजों की जांच की तारीख आगे बढ़ाई गई है। अस्पताल में अब तक 400 से ज्यादा जांचें प्रभावित हो चुकी हैं।
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सेक्टर-7 निवासी मरीज विनोद के परिजन हेमंत ने बताया कि डॉक्टर ने तुरंत एमआरआई कराने की सलाह दी थी लेकिन अस्पताल में मशीन खराब मिली। मजबूरी में निजी सेंटर पर करीब 5 हजार रुपये खर्च करने पड़े। ग्रामीण क्षेत्र से आए मरीजों ने कहा कि बार-बार अस्पताल के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
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वर्जन :
मशीन को जल्द चालू करवाने के प्रयास किए जा रहे हैं। संबंधित कंपनी और मुख्यालय स्तर पर लगातार संपर्क किया जा रहा है ताकि अनुमति मिलते ही मरम्मत कार्य शुरू कराया जा सके। जल्द ही समाधान हो जाएगा। - डॉ. एमके गर्ग, निदेशक, कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज, करनाल।
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करनाल। कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में लगी एमआरआई मशीन पिछले दो माह से अधिक समय से खराब पड़ी है। मरीजों की जांच प्रभावित हो रही है। अब तक 400 से ज्यादा एमआरआई जांचें टल चुकी हैं। मरीजों को या तो नई तारीख दी जा रही है या फिर निजी सेंटरों का सहारा लेना पड़ रहा है, जहां जांच के लिए हजारों रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं।
शुरुआत में मशीन में तकनीकी खराबी आने के बाद कंपनी को इसकी सूचना दी गई थी। बताया गया कि मशीन का एक महत्वपूर्ण पुर्जा खराब हो गया था जिसे जर्मनी से मंगाया गया। इसके उपलब्ध न होने के कारण मशीन को समय पर ठीक नहीं किया जा सका। लंबे इंतजार के बाद अब पुर्जा उपलब्ध हो चुका है लेकिन मरम्मत का काम मुख्यालय से अनुमति न मिलने के कारण अटका हुआ है। कंपनी की टीम को काम शुरू करने के लिए प्रशासनिक स्वीकृति का इंतजार है।
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एमआरआई जांच के लिए रोजाना बड़ी संख्या में मरीज मेडिकल कॉलेज पहुंचते हैं। न्यूरोलॉजी, ऑर्थोपेडिक, ट्रॉमा और अन्य गंभीर बीमारियों के मरीजों को एमआरआई की जरूरत पड़ती है। मशीन बंद होने के कारण कई मरीजों की जांच की तारीख आगे बढ़ाई गई है। अस्पताल में अब तक 400 से ज्यादा जांचें प्रभावित हो चुकी हैं।
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सेक्टर-7 निवासी मरीज विनोद के परिजन हेमंत ने बताया कि डॉक्टर ने तुरंत एमआरआई कराने की सलाह दी थी लेकिन अस्पताल में मशीन खराब मिली। मजबूरी में निजी सेंटर पर करीब 5 हजार रुपये खर्च करने पड़े। ग्रामीण क्षेत्र से आए मरीजों ने कहा कि बार-बार अस्पताल के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
वर्जन :
मशीन को जल्द चालू करवाने के प्रयास किए जा रहे हैं। संबंधित कंपनी और मुख्यालय स्तर पर लगातार संपर्क किया जा रहा है ताकि अनुमति मिलते ही मरम्मत कार्य शुरू कराया जा सके। जल्द ही समाधान हो जाएगा। - डॉ. एमके गर्ग, निदेशक, कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज, करनाल।