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Karnal News: निगम सील कर सकता है 70 बकाएदारों की दुकानें
Tue, 02 Jun 2026 01:47 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Tue, 02 Jun 2026 01:47 AM IST
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किरया वसूली के लिए नोटिस के साथ अंतिम चेतावनी देने पहुंची निगम टीम।
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करनाल। नगर निगम की दुकानों का किराया नहीं चुकाने वाले करीब 70 किराएदारों की सूची तैयार की गई है। इन पर 50 लाख रुपये से अधिक का बकाया है। इन्हें अंतिम चेतावनी नोटिस दिए जा रहे हैं। किराया जमा नहीं कराया तो दुकानों को सील कर दिया जाएगा।
नगर निगम संयुक्त आयुक्त दलजीत सिंह ने बताया कि निगम के पास शहर के विभिन्न बाजारों, व्यावसायिक परिसरों और प्रमुख स्थानों पर कुल 630 दुकानें हैं। इन दुकानों को किराए पर देकर निगम हर वर्ष करोड़ों रुपये की आय अर्जित करता है। वित्तीय आंकड़ों के अनुसार पिछले वित्तीय वर्ष में निगम को दुकानों के किराए से 2.61 करोड़ रुपये की आय प्राप्त हुई थी। वहीं चालू वित्तीय वर्ष में अब तक 1.30 करोड़ रुपये की डिमांड बनाई गई है। हालांकि अप्रैल से लेकर अब तक निगम करीब 40 लाख रुपये की रिकवरी कर चुका है लेकिन अभी भी बड़ी संख्या में किराएदारों पर लाखों रुपये का बकाया बना हुआ है।
उन्होंने बताया कि नगर निगम की संपत्ति शाखा और संबंधित अधिकारी इन दिनों दुकानों का सर्वे कर रहे हैं। सर्वे के दौरान यह देखा जा रहा है कि किन दुकानदारों ने लंबे समय से किराया जमा नहीं कराया है और कितना बकाया है। इसके आधार पर डिफॉल्टरों की सूची को अंतिम रूप दिया जा रहा है। कुछ दुकानदारों पर कई महीनों से लेकर कई वर्षों तक का किराया बकाया है। ऐसे मामलों में निगम अब नरमी बरतने के मूड में नहीं है। अधिकारियों का कहना है कि पहले भी कई बार नोटिस जारी किए गए लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं मिले। इसलिए अब सख्त कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
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उन्होंने बताया कि डिफॉल्टर किराएदारों को अंतिम चेतावनी दी जा रही है। इसके बाद भी यदि बकाया जमा नहीं कराया गया तो नियमों के तहत दुकानों को सील करने की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। ऐसे में संबंधित दुकानदारों के पास अब किराया जमा कर कार्रवाई से बचने का अंतिम अवसर है।
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नगर निगम संयुक्त आयुक्त दलजीत सिंह ने बताया कि निगम के पास शहर के विभिन्न बाजारों, व्यावसायिक परिसरों और प्रमुख स्थानों पर कुल 630 दुकानें हैं। इन दुकानों को किराए पर देकर निगम हर वर्ष करोड़ों रुपये की आय अर्जित करता है। वित्तीय आंकड़ों के अनुसार पिछले वित्तीय वर्ष में निगम को दुकानों के किराए से 2.61 करोड़ रुपये की आय प्राप्त हुई थी। वहीं चालू वित्तीय वर्ष में अब तक 1.30 करोड़ रुपये की डिमांड बनाई गई है। हालांकि अप्रैल से लेकर अब तक निगम करीब 40 लाख रुपये की रिकवरी कर चुका है लेकिन अभी भी बड़ी संख्या में किराएदारों पर लाखों रुपये का बकाया बना हुआ है।
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उन्होंने बताया कि नगर निगम की संपत्ति शाखा और संबंधित अधिकारी इन दिनों दुकानों का सर्वे कर रहे हैं। सर्वे के दौरान यह देखा जा रहा है कि किन दुकानदारों ने लंबे समय से किराया जमा नहीं कराया है और कितना बकाया है। इसके आधार पर डिफॉल्टरों की सूची को अंतिम रूप दिया जा रहा है। कुछ दुकानदारों पर कई महीनों से लेकर कई वर्षों तक का किराया बकाया है। ऐसे मामलों में निगम अब नरमी बरतने के मूड में नहीं है। अधिकारियों का कहना है कि पहले भी कई बार नोटिस जारी किए गए लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं मिले। इसलिए अब सख्त कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
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उन्होंने बताया कि डिफॉल्टर किराएदारों को अंतिम चेतावनी दी जा रही है। इसके बाद भी यदि बकाया जमा नहीं कराया गया तो नियमों के तहत दुकानों को सील करने की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। ऐसे में संबंधित दुकानदारों के पास अब किराया जमा कर कार्रवाई से बचने का अंतिम अवसर है।