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Karnal News: निलंबित एसएचओ की फिर तैनाती से डॉक्टर-खाकी विवाद फिर गरमाया
Thu, 28 May 2026 01:47 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Thu, 28 May 2026 01:47 AM IST
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मार्च माह में डॉक्टर और पुलिस के बीच हुआ बहुचर्चित विवाद फिर गरमा गया है। मेडिकल ऑफिसर के साथ कथित मारपीट और गैरकानूनी हिरासत के आरोप में निलंबित किए गए एसएचओ दीपक की दोबारा घरौंडा थाना क्षेत्र में तैनात किए जाने से डॉक्टरों में नाराजगी है।
डॉक्टर एसोसिएशन ने इस फैसले के खिलाफ मुख्यमंत्री नायाब सिंह सैनी को शिकायत भेजी है। एसएचओ के स्थानांतरण की मांग की है। एसोसिएशन के प्रवक्ता डॉ. दीपक गोयल ने कहा कि मामला अभी अदालत में विचाराधीन है, ऐसे में संबंधित अधिकारी को उसी क्षेत्र में तैनात करना प्रशासनिक दृष्टि से उचित नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि डॉक्टर पहले ही तनावपूर्ण परिस्थितियों में काम करते हैं और यदि उनकी सुरक्षा को लेकर भरोसा कमजोर होगा तो इसका असर स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ेगा।
गौरतलब है कि मार्च माह में घरौंडा क्षेत्र में मेडिकल ऑफिसर डॉ. प्रशांत और एसएचओ दीपक के बीच विवाद हुआ था। आरोप था कि एसएचओ ने डॉ. प्रशांत के साथ मारपीट की और उन्हें गैरकानूनी रूप से हिरासत में रखा।
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घटना के बाद जिलेभर के डॉक्टरों में आक्रोश फैल गया था। सरकारी अस्पतालों के डॉक्टर चार दिन की हड़ताल पर चले गए थे, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रभावित हुई थीं। डॉक्टर लगातार संबंधित पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे थे। बाद में पुलिस विभाग की ओर से एसएचओ दीपक समेत सात पुलिसकर्मियों को निलंबित किए जाने के बाद डॉक्टरों का गुस्सा शांत हुआ था और हड़ताल समाप्त की गई थी।
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मार्च माह में डॉक्टर और पुलिस के बीच हुआ बहुचर्चित विवाद फिर गरमा गया है। मेडिकल ऑफिसर के साथ कथित मारपीट और गैरकानूनी हिरासत के आरोप में निलंबित किए गए एसएचओ दीपक की दोबारा घरौंडा थाना क्षेत्र में तैनात किए जाने से डॉक्टरों में नाराजगी है।
डॉक्टर एसोसिएशन ने इस फैसले के खिलाफ मुख्यमंत्री नायाब सिंह सैनी को शिकायत भेजी है। एसएचओ के स्थानांतरण की मांग की है। एसोसिएशन के प्रवक्ता डॉ. दीपक गोयल ने कहा कि मामला अभी अदालत में विचाराधीन है, ऐसे में संबंधित अधिकारी को उसी क्षेत्र में तैनात करना प्रशासनिक दृष्टि से उचित नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि डॉक्टर पहले ही तनावपूर्ण परिस्थितियों में काम करते हैं और यदि उनकी सुरक्षा को लेकर भरोसा कमजोर होगा तो इसका असर स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ेगा।
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गौरतलब है कि मार्च माह में घरौंडा क्षेत्र में मेडिकल ऑफिसर डॉ. प्रशांत और एसएचओ दीपक के बीच विवाद हुआ था। आरोप था कि एसएचओ ने डॉ. प्रशांत के साथ मारपीट की और उन्हें गैरकानूनी रूप से हिरासत में रखा।
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घटना के बाद जिलेभर के डॉक्टरों में आक्रोश फैल गया था। सरकारी अस्पतालों के डॉक्टर चार दिन की हड़ताल पर चले गए थे, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रभावित हुई थीं। डॉक्टर लगातार संबंधित पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे थे। बाद में पुलिस विभाग की ओर से एसएचओ दीपक समेत सात पुलिसकर्मियों को निलंबित किए जाने के बाद डॉक्टरों का गुस्सा शांत हुआ था और हड़ताल समाप्त की गई थी।