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Karnal News: एक साल से कागजों में ही बन रहे दो एसटीपी
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। शहर में सीवरेज व्यवस्था सुधारने के लिए प्रस्तावित करीब 47 करोड़ रुपये से बनने वाले दो सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का प्रोजेक्ट पिछले एक साल से कागजी प्रक्रिया में उलझा है। नगर निगम और मुख्यालय स्तर पर तकनीकी अड़चनों, संशोधनों और टेंडर प्रक्रिया के चलते परियोजना का काम शुरू नहीं हो सका है।
प्रोजेक्ट के तहत सेक्टर-4 के ट्रांसपोर्ट नगर में 15 एमएलडी और शिव कॉलोनी में 8 एमएलडी क्षमता वाले एसटीपी बनाए जाने थे। इससे शहर के करीब 10 वार्डों की 40 से अधिक कॉलोनियों के लगभग 50 हजार मकानों की सीवरेज निकासी व्यवस्था में सुधार होना था। प्रोजेक्ट के लिए कई बार टेंडर लगाए जा चुके हैं लेकिन हर बार किसी न किसी कारण से प्रक्रिया अधूरी रह जाती है। कभी निर्धारित रेट पर सहमति नहीं बन पाती, तो कई बार टेंडर में भाग लेने वाली एजेंसियों के दस्तावेज अधूरे पाए जाते हैं।
इसके अलावा, मुख्यालय की ओर से भी प्रोजेक्ट में बार-बार संशोधन कराए जाने के कारण फाइल आगे नहीं बढ़ पाती। अब एक बार फिर से टेंडर जारी किया गया है, जिसे 9 अप्रैल को खोला जाएगा। इसके बाद तकनीकी और वित्तीय बिड पर चर्चा की जाएगी।
50 हजार परिवारों को होगा लाभ
शहर के दस वार्डों में रहने वाले करीब 50 हजार परिवारों के गंदे पानी की निकासी और शोधन व्यवस्था इन एसटीपी से बेहतर होगी। सेक्टर-4 में 15 एमएलडी क्षमता का नया एसटीपी और शिव कॉलोनी में 8 एमएलडी क्षमता का एसटीपी बनाया जाना था। दोनों एसटीपी से सेक्टर-4, 6, 7, 8, 9, 12, 13, शिव कॉलोनी, बसंत विहार, प्रेम नगर सहित 40 से ज्यादा कॉलोनियों में सीवरेज निकासी और गंदे पानी के शोधन की व्यवस्था में व्यापक सुधार होना था।
अगस्त, 2025 में इन दोनों एसटीपी के निर्माण पर लगभग 82.9 करोड़ रुपये की लागत का अनुमान तैयार किया गया। निकाय की ओर से प्रोजेक्ट में संशोधन किया गया और अब इस प्रोजेक्ट की लागत घटकर करीब 47 करोड़ रुपये रह गई।
मौजूदा संयंत्रों के पास ही निर्माण
सेक्टर-4 में पहले से ही 50 एमएलडी क्षमता का एसटीपी मौजूद है। पास ही नया 15 एमएलडी एसटीपी बनाया जाएगा। शिव कॉलोनी में भी पहले से आठ एमएलडी का एक संयंत्र है। इसके पास ही दूसरा 8 एमएलडी का एसटीपी लगाया जाएगा।
अधिकारियों ने बताया कि इन संयंत्रों में नवीनतम तकनीक का उपयोग किया जाएगा। गंदे पानी को शोधित कर बागवानी, औद्योगिक कार्यों और अन्य जरूरतों के लिए किया जा सकेगा। इससे भूमिगत जल पर निर्भरता कम होगी।
वर्जन-
योजना में कुछ निकाय की ओर से तकनीकी संशोधन किया गया है। इसके बाद फिर से इसका टेंडर लगाया गया है, जो नौ अप्रैल को खुलेगा। इसके बाद नियमानुसार प्रोजेक्ट पर कार्रवाई शुरू की जाएगी। -सतीश शर्मा, तकनीकी सहायक, नगर निगम
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करनाल। शहर में सीवरेज व्यवस्था सुधारने के लिए प्रस्तावित करीब 47 करोड़ रुपये से बनने वाले दो सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का प्रोजेक्ट पिछले एक साल से कागजी प्रक्रिया में उलझा है। नगर निगम और मुख्यालय स्तर पर तकनीकी अड़चनों, संशोधनों और टेंडर प्रक्रिया के चलते परियोजना का काम शुरू नहीं हो सका है।
प्रोजेक्ट के तहत सेक्टर-4 के ट्रांसपोर्ट नगर में 15 एमएलडी और शिव कॉलोनी में 8 एमएलडी क्षमता वाले एसटीपी बनाए जाने थे। इससे शहर के करीब 10 वार्डों की 40 से अधिक कॉलोनियों के लगभग 50 हजार मकानों की सीवरेज निकासी व्यवस्था में सुधार होना था। प्रोजेक्ट के लिए कई बार टेंडर लगाए जा चुके हैं लेकिन हर बार किसी न किसी कारण से प्रक्रिया अधूरी रह जाती है। कभी निर्धारित रेट पर सहमति नहीं बन पाती, तो कई बार टेंडर में भाग लेने वाली एजेंसियों के दस्तावेज अधूरे पाए जाते हैं।
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इसके अलावा, मुख्यालय की ओर से भी प्रोजेक्ट में बार-बार संशोधन कराए जाने के कारण फाइल आगे नहीं बढ़ पाती। अब एक बार फिर से टेंडर जारी किया गया है, जिसे 9 अप्रैल को खोला जाएगा। इसके बाद तकनीकी और वित्तीय बिड पर चर्चा की जाएगी।
50 हजार परिवारों को होगा लाभ
शहर के दस वार्डों में रहने वाले करीब 50 हजार परिवारों के गंदे पानी की निकासी और शोधन व्यवस्था इन एसटीपी से बेहतर होगी। सेक्टर-4 में 15 एमएलडी क्षमता का नया एसटीपी और शिव कॉलोनी में 8 एमएलडी क्षमता का एसटीपी बनाया जाना था। दोनों एसटीपी से सेक्टर-4, 6, 7, 8, 9, 12, 13, शिव कॉलोनी, बसंत विहार, प्रेम नगर सहित 40 से ज्यादा कॉलोनियों में सीवरेज निकासी और गंदे पानी के शोधन की व्यवस्था में व्यापक सुधार होना था।
अगस्त, 2025 में इन दोनों एसटीपी के निर्माण पर लगभग 82.9 करोड़ रुपये की लागत का अनुमान तैयार किया गया। निकाय की ओर से प्रोजेक्ट में संशोधन किया गया और अब इस प्रोजेक्ट की लागत घटकर करीब 47 करोड़ रुपये रह गई।
मौजूदा संयंत्रों के पास ही निर्माण
सेक्टर-4 में पहले से ही 50 एमएलडी क्षमता का एसटीपी मौजूद है। पास ही नया 15 एमएलडी एसटीपी बनाया जाएगा। शिव कॉलोनी में भी पहले से आठ एमएलडी का एक संयंत्र है। इसके पास ही दूसरा 8 एमएलडी का एसटीपी लगाया जाएगा।
अधिकारियों ने बताया कि इन संयंत्रों में नवीनतम तकनीक का उपयोग किया जाएगा। गंदे पानी को शोधित कर बागवानी, औद्योगिक कार्यों और अन्य जरूरतों के लिए किया जा सकेगा। इससे भूमिगत जल पर निर्भरता कम होगी।
वर्जन-
योजना में कुछ निकाय की ओर से तकनीकी संशोधन किया गया है। इसके बाद फिर से इसका टेंडर लगाया गया है, जो नौ अप्रैल को खुलेगा। इसके बाद नियमानुसार प्रोजेक्ट पर कार्रवाई शुरू की जाएगी। -सतीश शर्मा, तकनीकी सहायक, नगर निगम