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कटाई के बाद खराब होने वाली फसल को वैज्ञानिक आय में बदलेंगे : मुख्यमंत्री
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सीएसएसआरआई में महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय की ओर से आयोजित कार्यक्रम में अपने विचार र
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि बागवानी फसलों का लगभग 20 प्रतिशत उत्पादन कटाई के बाद खराब होता है। यदि हम गुणवत्तायुक्त पौध सामग्री, वैज्ञानिक प्रबंधन और आधुनिक सप्लाई चेन पर ध्यान दें, तो यह नुकसान आय में बदल सकता है।
मुख्यमंत्री महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय व लेफ्टिनेंट अमित मेमोरियल फाउंडेशन की ओर से आयोजित सीएसएसआरआई के सभागार में आयोजित चार दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में पहुंचे थे। अमृतकाल में बागवानी फसलों के लिए गुणवत्ता युक्त बीज एवं रोपण सामग्री का रणनीतिक प्रतिमान विषय पर हुए सेमिनार में सीएम ने कहा कि आज पूरी दुनिया इस बात को स्वीकार कर रही है कि गुणवत्तायुक्त बीज और पौध से कृषि उत्पादकता में 15 से 25 प्रतिशत तक वृद्धि संभव है। रोग मुक्त एवं प्रमाणित पौध सामग्री बागवानी फसलों में उत्पादन और गुणवत्ता दोनों को 30 से 40 प्रतिशत तक बढ़ा सकती है।
हरियाणा ने हरित क्रांति में नेतृत्व किया। वैज्ञानिकों के अनुसंधान ने देश को खाद्यान्न में आत्मनिर्भर बनाया लेकिन आज समय की मांग बदल रही है। छोटी भूमि जोतों, घटते जल स्तर, जलवायु परिवर्तन और बढ़ती लागतों के बीच केवल पारंपरिक खेती से किसानों की आय में वृद्धि संभव नहीं है। इसलिए फसल विविधीकरण और बागवानी आधारित कृषि मॉडल, भविष्य में किसानों की खुशहाली का रास्ता बनकर उभर रहे हैं।
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चुनौतियों में कम पानी में अधिक उत्पादन वाले बीज तैयार करने होंगे
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज दुनिया क्लाइमेट स्मार्ट एग्रीकल्चर की बात कर रही है। जलवायु परिवर्तन का सबसे अधिक प्रभाव कृषि और बागवानी पर पड़ रहा है। तापमान में वृद्धि, अनियमित वर्षा, नए रोग और कीट, मिट्टी की उर्वरता में गिरावट, ये सभी चुनौतियां कृषि उत्पादन को प्रभावित कर रही हैं। ऐसे में हमें ऐसे बीज और पौध सामग्री विकसित करनी होगी जो कम पानी में अधिक उत्पादन दें, रोग प्रतिरोधक हों, अधिक पोषक हो और बदलती जलवायु के अनुरूप हो।
एआई, फामेशी सेंसर टेक्नोलॉजी से आएगा परिवर्तन
सीएम ने कहा कि टिश्यू कल्चर, माइक्रो-प्रोपेगेशन, जर्मप्लाज्म संरक्षण, वायरस-फ्री प्लांटिंग मैटेरियल, हाई-यील्डिंग वैरायटी और जैविक पौध संरक्षण तकनीकों पर लगातार शोध हो रहा है। आने वाले समय में एआई, फारमेशी सेंसर टेक्नोलॉजी और बायोटेक्नोलॉजी बागवानी क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन लाने वाले हैं। इन तकनीकों का लाभ किसान तक पहुंचाना होगा।
10 हजार रुपये तक बढ़ेगी मुआवजे की राशि
मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना के अंतर्गत प्राकृतिक आपदाओं से फलों की फसल खराब होने पर मिलने वाले मुआवजे को 40 हजार रुपए से बढ़ाकर 50 हजार रुपये प्रति एकड़ करने का निर्णय लिया है। इसी प्रकार सब्जियों व मसालों के लिए मिलने वाले मुआवजे को 30 हजार से बढ़ाकर 40 हजार रुपये प्रति एकड़ किया जाएगा। - टिश्यू कल्चर के माध्यम से पैदा किए गए आलू बीज की श्रृंखला का प्रमाणीकरण करने के लिए एक हरियाणा आलू बीज अधिनियम लाया जाएगा। अधिनियम के माध्यम से प्रतिवर्ष लगभग 7.5 लाख क्विंटल उच्च गुणवत्ता युक्त बीज आलू का उत्पादन सुनिश्चित होगा।
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करनाल। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि बागवानी फसलों का लगभग 20 प्रतिशत उत्पादन कटाई के बाद खराब होता है। यदि हम गुणवत्तायुक्त पौध सामग्री, वैज्ञानिक प्रबंधन और आधुनिक सप्लाई चेन पर ध्यान दें, तो यह नुकसान आय में बदल सकता है।
मुख्यमंत्री महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय व लेफ्टिनेंट अमित मेमोरियल फाउंडेशन की ओर से आयोजित सीएसएसआरआई के सभागार में आयोजित चार दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में पहुंचे थे। अमृतकाल में बागवानी फसलों के लिए गुणवत्ता युक्त बीज एवं रोपण सामग्री का रणनीतिक प्रतिमान विषय पर हुए सेमिनार में सीएम ने कहा कि आज पूरी दुनिया इस बात को स्वीकार कर रही है कि गुणवत्तायुक्त बीज और पौध से कृषि उत्पादकता में 15 से 25 प्रतिशत तक वृद्धि संभव है। रोग मुक्त एवं प्रमाणित पौध सामग्री बागवानी फसलों में उत्पादन और गुणवत्ता दोनों को 30 से 40 प्रतिशत तक बढ़ा सकती है।
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हरियाणा ने हरित क्रांति में नेतृत्व किया। वैज्ञानिकों के अनुसंधान ने देश को खाद्यान्न में आत्मनिर्भर बनाया लेकिन आज समय की मांग बदल रही है। छोटी भूमि जोतों, घटते जल स्तर, जलवायु परिवर्तन और बढ़ती लागतों के बीच केवल पारंपरिक खेती से किसानों की आय में वृद्धि संभव नहीं है। इसलिए फसल विविधीकरण और बागवानी आधारित कृषि मॉडल, भविष्य में किसानों की खुशहाली का रास्ता बनकर उभर रहे हैं।
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चुनौतियों में कम पानी में अधिक उत्पादन वाले बीज तैयार करने होंगे
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज दुनिया क्लाइमेट स्मार्ट एग्रीकल्चर की बात कर रही है। जलवायु परिवर्तन का सबसे अधिक प्रभाव कृषि और बागवानी पर पड़ रहा है। तापमान में वृद्धि, अनियमित वर्षा, नए रोग और कीट, मिट्टी की उर्वरता में गिरावट, ये सभी चुनौतियां कृषि उत्पादन को प्रभावित कर रही हैं। ऐसे में हमें ऐसे बीज और पौध सामग्री विकसित करनी होगी जो कम पानी में अधिक उत्पादन दें, रोग प्रतिरोधक हों, अधिक पोषक हो और बदलती जलवायु के अनुरूप हो।
एआई, फामेशी सेंसर टेक्नोलॉजी से आएगा परिवर्तन
सीएम ने कहा कि टिश्यू कल्चर, माइक्रो-प्रोपेगेशन, जर्मप्लाज्म संरक्षण, वायरस-फ्री प्लांटिंग मैटेरियल, हाई-यील्डिंग वैरायटी और जैविक पौध संरक्षण तकनीकों पर लगातार शोध हो रहा है। आने वाले समय में एआई, फारमेशी सेंसर टेक्नोलॉजी और बायोटेक्नोलॉजी बागवानी क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन लाने वाले हैं। इन तकनीकों का लाभ किसान तक पहुंचाना होगा।
10 हजार रुपये तक बढ़ेगी मुआवजे की राशि
मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना के अंतर्गत प्राकृतिक आपदाओं से फलों की फसल खराब होने पर मिलने वाले मुआवजे को 40 हजार रुपए से बढ़ाकर 50 हजार रुपये प्रति एकड़ करने का निर्णय लिया है। इसी प्रकार सब्जियों व मसालों के लिए मिलने वाले मुआवजे को 30 हजार से बढ़ाकर 40 हजार रुपये प्रति एकड़ किया जाएगा। - टिश्यू कल्चर के माध्यम से पैदा किए गए आलू बीज की श्रृंखला का प्रमाणीकरण करने के लिए एक हरियाणा आलू बीज अधिनियम लाया जाएगा। अधिनियम के माध्यम से प्रतिवर्ष लगभग 7.5 लाख क्विंटल उच्च गुणवत्ता युक्त बीज आलू का उत्पादन सुनिश्चित होगा।