लाडवा। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान केंद्र ने गांव बकाली में प्राकृतिक खेती और पोषण वाटिका पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें 50 ग्रामीण महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
वैज्ञानिकों ने बताया कि प्राकृतिक खेती उत्पादन लागत कम करती है। यह भूमि की उर्वरता, जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देती है। उन्होंने जीवामृत, घनजीवामृत, बीजामृत, मल्चिंग तथा जैविक कीट एवं रोग प्रबंधन जैसी तकनीकों पर जोर दिया। ललिता रानी ने महिलाओं से पोषण वाटिका विकसित करने का आह्वान किया। इससे परिवार को ताजी, पौष्टिक और रसायन-मुक्त सब्जियां मिलेंगी। मनोज कुमार सिंह ने टिकाऊ कृषि प्रणाली और कृषि में वृक्षों का महत्व बताया। फतेह सिंह ने प्राकृतिक तरीकों से फसलों में रोग एवं कीट प्रबंधन की जानकारी दी। प्रशिक्षण में सहजन, करौंदा, जामुन, एलोवेरा और तुलसी जैसे पौधों के गुणों पर भी चर्चा हुई।