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Kurukshetra News: पर्यटकों की संख्या घटने से सूना पड़ रहा पिपली का लघु चिड़ियाघर

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 23 Feb 2026 02:55 AM IST
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Pipli's mini zoo is becoming deserted due to the decrease in the number of tourists.
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कुरुक्षेत्र। हरे भरे पार्क, पेड़ पौधों, भांति भांति के जंगली जीवों के साथ कुदरत की अनूठी सुंदरता से परिपूर्ण चंडीगढ़-दिल्ली नेशनल हाईवे से सटा पिपली लघु चिड़ियाघर इन दिनों पर्यटकों की कमी से जूझ रहा है। आमतौर पर जो परिसर प्रतिदिन औसतन 500 से 700 तक वन्य जीव प्रेमियों से भरा रहता था, आजकल वह संख्या घटकर रविवार को छोड़कर अन्य दिनों में 150 से 250 के आसपास ही रह गई। वयस्कों में ही कमी नहीं आई, बल्कि बच्चे भी नाम मात्र ही रुचि लेते दिखाई दे रहे हैं।
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चिड़ियाघर के शाम चार बजे तक के समय में वीरवार दोपहर एक बजे तक केवल 36 टिकटें ही बिक पाई। लगभग यही स्थिति उससे अगले दिन शुक्रवार को भी बनी रही। रविवार को संख्या में जरूर इजाफा हुआ। अन्यथा अमूमन कई दिनों से संख्या कम आंकड़े तक सिमटी हुई है। बता दें कि चिड़ियाघर के अंदर प्रकृति एवं वन्य प्राणियों से सीधे जुड़ाव, नर-मादा की गतिविधियां और शिशु अवस्था में लंगूरों सहित अन्य प्रजातियों के बच्चों की अठखेलियां दिखाने के लिए वन विभाग द्वारा बेहतर इंतजाम किया गया है। इनमें शेर शेरनी, नर मादा पैंथर, दो लक्कड़बग्घे, 16 गीदड़, चार घड़ियाल, पांच मगरमच्छ, 15 काले हिरण, आठ सांबर, नर मादा दरियाई घोड़ा, छह लंगूर, मोर, तीतर, लाल जंगली मुर्गे, कलीज सहित अन्य छोटे बड़े 14 प्रजातियों के 31 मेल, 32 फीमेल, 11 बच्चे आदि 74 वन्य जीव शामिल हैं।
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पिछले एक वर्ष के दौरान मुख्य गेट से प्रवेश करते ही विशेष प्रकार के रंग-बिरंगे फूल पौधों तथा रोमांच पैदा करने वाले गोरिल्ला, चीता आदि जंगली जीवों के स्कल्पचर से चिड़ियाघर की शोभा भी बढ़ाई गई। बावजूद इसके कम संख्या को गति देना स्थानीय प्रशासन के साथ ठेकेदार के लिए भी चुनौती बना हुआ है। टिकट काउंटर टीम के साथ बतौर सहयोगी सेवाएं दे रहे एक कर्मचारी ने बताया कि साल में डेढ़ दो महीने ऐसे होते हैं, जिनमें बहुत कम लोग घूमने आते हैं। आजकल वही समय चल रहा है। बच्चों की परीक्षा का दौर है। इसका असर टिकटों के माध्यम से होने वाली कमाई पर भी पड़ा है। वन्य प्रेमियों के आने से बारह से पंद्रह हजार तक रोजाना की कमाई हो जाती थी। फिलहाल कमाई प्रभावित हो रही है, लेकिन जल्द ही इसकी पूर्ति हो जाएगी। विद्यार्थी, शिक्षकों, माता पिता, अभिभावकों की संख्या में एक माह बाद अच्छा खासा इजाफा देखने को मिलेगा।

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रोमाचंक अहसास, प्रकृति से जुड़ाव, वन्य प्राणियों का संग्रह स्थल है चिड़ियाघर : देवेंद्र

चिड़ियाघर प्रभारी एवं निरीक्षक देवेंद्र कुमार ने कहा कि दर्शकों की संख्या घटती बढ़ती रहती है। बच्चों की परीक्षाओं के चलते भी इन दिनों संख्या कम है। क्षेत्र में अन्य कोई ऐसा स्थान नहीं है, जहां इतने जंगली जीवों की एकसाथ व्यवस्था हो। वन्य प्राणियों के संग्रह स्थल पर वक्त बिताना प्रकृति से जोड़ने में मदद करता है। यह जगह रोमांचक अहसास के साथ स्वस्थ मनोरंजन का भी हिस्सा है। कई प्रजातियों के वन्य जीवों को निहारने के लिए क्षेत्रवासियों को कुछ समय जरूर निकालना चाहिए। विभाग के उच्चाधिकारियों के निर्देश पर टिकट फीस भी पॉकेट फ्रेंडली ही रखी गई है, जो कि विद्यार्थियों के लिए बीस और वयस्कों के लिए मात्र तीस रुपये तय की गई है। सप्ताह में एक दिन सोमवार को चिड़ियाघर बंद रहता है।
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