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केयू में आरके सदन विवाद : 90 दिन बाद भी प्रोफेसर के खिलाफ चार्जशीट नहीं
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कुरुक्षेत्र। निलंबित प्रोफेसर अजायब सिंह।
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गौरव सागवाल
कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय (केयू) के हिंदी विभाग के प्रोफेसर अज़ायब सिंह को निलंबित हुए 108 दिन बीत चुके हैं। उन पर आरके सदन में हुए एक कार्यक्रम के दौरान संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का आरोप है। हरियाणा सिविल सेवा नियमों के अनुसार, निलंबित कर्मचारी को 90 दिन के भीतर आरोप पत्र दिया जाना चाहिए। हालांकि, विश्वविद्यालय प्रशासन ने अब तक प्रोफेसर के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल नहीं किया है।
प्रोफेसर अज़ायब सिंह को 17 अप्रैल को निलंबित किया गया था। उसी दिन उनके समेत 11 लोगों पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी। यह कार्रवाई सात अप्रैल को आरके सदन में हुए एक कार्यक्रम के बाद हुई थी। इस कार्यक्रम में छात्रों द्वारा कुर्सियां तोड़ी गई थीं। इससे विश्वविद्यालय की संपत्ति को नुकसान पहुंचा था। कार्यक्रम की अनुमति प्रोफेसर अज़ायब सिंह ने ली थी। इसमें दिग्विजय चौटाला और पंजाबी गायक अल्फाज भी शामिल हुए थे। घटना की वीडियो फुटेज भी पुलिस को सौंपी गई थी।
नियमों का उल्लंघन और निलंबन की स्थिति
हरियाणा सिविल सेवा (दंड एवं अपील) नियम, 2016 के तहत विभागीय जांच के लिए निलंबित कर्मचारी को 90 दिन के भीतर आरोप पत्र देना अनिवार्य है। यदि जांच पूरी करने के लिए अधिक समय चाहिए, तो सक्षम प्राधिकारी को 90 दिन पूरे होने से पहले लिखित कारण दर्ज करने होते हैं। उच्च स्तर से अनुमति लेना भी जरूरी होता है। कर्मचारी को भी इसकी जानकारी देना आवश्यक है। नियमों के अनुसार, आरोप पत्र के बिना निलंबन अधिकतम 180 दिन तक ही जारी रखा जा सकता है। प्रोफेसर अज़ायब सिंह के निलंबन को अब 108 दिन पूरे हो गए हैं। इस अवधि में आरोप पत्र दाखिल नहीं किया गया है। इससे विश्वविद्यालय की विभागीय कार्रवाई और नियमों के पालन को लेकर सवाल उठ रहे हैं। संवाद
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विश्वविद्यालय प्रशासन का पक्ष
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार प्रोफेसर वीरेंद्र पाल ने इस मामले पर अपनी बात रखी है। उन्होंने बताया कि पूरे मामले की समीक्षा की जा रही है। प्रोफेसर पाल ने कहा कि प्रोफेसर अज़ायब सिंह के खिलाफ बहुत जल्द आरोप पत्र दायर किया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल प्रोफेसर का निलंबन जारी है। विभागीय कार्रवाई नियमानुसार आगे बढ़ाई जा रही है। केयू प्रशासन जल्द ही इस मामले पर आरोप पत्र पेश करेगा।
प्रोफेसर अज़ायब सिंह ने प्राथमिकी में शामिल तथ्यों पर सवाल उठाए
प्रोफेसर अज़ायब सिंह ने अपने खिलाफ दर्ज प्राथमिकी में शामिल तथ्यों पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि प्राथमिकी में अन्य लोगों के नाम हिंदी में दर्ज हैं। जबकि केवल उनका नाम अंग्रेजी में लिखा गया है। उन्होंने यह भी बताया कि प्राथमिकी में सीएसओ की ओर से पुलिस को सौंपी गई पेन ड्राइव के आधार पर उन्हें कार्यक्रम में मौजूद बताया गया है। प्रोफेसर अज़ायब सिंह के अनुसार, वे छह और सात अप्रैल को विश्वविद्यालय की स्वीकृति से अवकाश पर थे। वे एक कार्यक्रम के सिलसिले में विश्वविद्यालय से बाहर गए हुए थे। उन्होंने कहा कि उन दिनों वे विश्वविद्यालय परिसर में थे ही नहीं। इसलिए कार्यक्रम में उनकी उपस्थिति का सवाल ही नहीं उठता।
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कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय (केयू) के हिंदी विभाग के प्रोफेसर अज़ायब सिंह को निलंबित हुए 108 दिन बीत चुके हैं। उन पर आरके सदन में हुए एक कार्यक्रम के दौरान संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का आरोप है। हरियाणा सिविल सेवा नियमों के अनुसार, निलंबित कर्मचारी को 90 दिन के भीतर आरोप पत्र दिया जाना चाहिए। हालांकि, विश्वविद्यालय प्रशासन ने अब तक प्रोफेसर के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल नहीं किया है।
प्रोफेसर अज़ायब सिंह को 17 अप्रैल को निलंबित किया गया था। उसी दिन उनके समेत 11 लोगों पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी। यह कार्रवाई सात अप्रैल को आरके सदन में हुए एक कार्यक्रम के बाद हुई थी। इस कार्यक्रम में छात्रों द्वारा कुर्सियां तोड़ी गई थीं। इससे विश्वविद्यालय की संपत्ति को नुकसान पहुंचा था। कार्यक्रम की अनुमति प्रोफेसर अज़ायब सिंह ने ली थी। इसमें दिग्विजय चौटाला और पंजाबी गायक अल्फाज भी शामिल हुए थे। घटना की वीडियो फुटेज भी पुलिस को सौंपी गई थी।
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नियमों का उल्लंघन और निलंबन की स्थिति
हरियाणा सिविल सेवा (दंड एवं अपील) नियम, 2016 के तहत विभागीय जांच के लिए निलंबित कर्मचारी को 90 दिन के भीतर आरोप पत्र देना अनिवार्य है। यदि जांच पूरी करने के लिए अधिक समय चाहिए, तो सक्षम प्राधिकारी को 90 दिन पूरे होने से पहले लिखित कारण दर्ज करने होते हैं। उच्च स्तर से अनुमति लेना भी जरूरी होता है। कर्मचारी को भी इसकी जानकारी देना आवश्यक है। नियमों के अनुसार, आरोप पत्र के बिना निलंबन अधिकतम 180 दिन तक ही जारी रखा जा सकता है। प्रोफेसर अज़ायब सिंह के निलंबन को अब 108 दिन पूरे हो गए हैं। इस अवधि में आरोप पत्र दाखिल नहीं किया गया है। इससे विश्वविद्यालय की विभागीय कार्रवाई और नियमों के पालन को लेकर सवाल उठ रहे हैं। संवाद
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विश्वविद्यालय प्रशासन का पक्ष
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार प्रोफेसर वीरेंद्र पाल ने इस मामले पर अपनी बात रखी है। उन्होंने बताया कि पूरे मामले की समीक्षा की जा रही है। प्रोफेसर पाल ने कहा कि प्रोफेसर अज़ायब सिंह के खिलाफ बहुत जल्द आरोप पत्र दायर किया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल प्रोफेसर का निलंबन जारी है। विभागीय कार्रवाई नियमानुसार आगे बढ़ाई जा रही है। केयू प्रशासन जल्द ही इस मामले पर आरोप पत्र पेश करेगा।
प्रोफेसर अज़ायब सिंह ने प्राथमिकी में शामिल तथ्यों पर सवाल उठाए
प्रोफेसर अज़ायब सिंह ने अपने खिलाफ दर्ज प्राथमिकी में शामिल तथ्यों पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि प्राथमिकी में अन्य लोगों के नाम हिंदी में दर्ज हैं। जबकि केवल उनका नाम अंग्रेजी में लिखा गया है। उन्होंने यह भी बताया कि प्राथमिकी में सीएसओ की ओर से पुलिस को सौंपी गई पेन ड्राइव के आधार पर उन्हें कार्यक्रम में मौजूद बताया गया है। प्रोफेसर अज़ायब सिंह के अनुसार, वे छह और सात अप्रैल को विश्वविद्यालय की स्वीकृति से अवकाश पर थे। वे एक कार्यक्रम के सिलसिले में विश्वविद्यालय से बाहर गए हुए थे। उन्होंने कहा कि उन दिनों वे विश्वविद्यालय परिसर में थे ही नहीं। इसलिए कार्यक्रम में उनकी उपस्थिति का सवाल ही नहीं उठता।