सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Kurukshetra News ›   Sankashti Chaturthi today, the belief of fasting along with worship of Lord Ganesha

Kurukshetra News: संकष्टी चतुर्थी आज, गणेश जी की पूजा के साथ व्रत रखने की मान्यता

संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र Updated Fri, 06 Mar 2026 02:09 AM IST
विज्ञापन
Sankashti Chaturthi today, the belief of fasting along with worship of Lord Ganesha
विज्ञापन
कुरुक्षेत्र। धर्मनगरी में शुक्रवार को गणेश जी को समर्पित संकष्टी चतुर्थी जिलेभर में मनाई जाएगी। चतुर्थी पर घरों और मंदिरों में पूजा पाठ का सिलसिला चलता रहेगा। पंडितों और ज्योतिषाचार्याें ने भी संकष्टी चतुर्थी का विशेष महत्व बताया है।
Trending Videos

भारतीय पंचांग के अनुसार, चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि शुक्रवार छह मार्च को सायं 5:53 बजे से शुरू होगी और समापन शनिवार 7 मार्च को सायं 7:17 बजे होगा। संकष्टी चतुर्थी व्रत के नियमानुसार चंद्रोदय के समय चतुर्थी तिथि विद्यमान होनी चाहिए, क्योंकि व्रत चंद्र दर्शन के बाद ही पूर्ण माना जाता है। चंद्रोदय छह मार्च की रात में होगा और उस समय चतुर्थी तिथि रहेगी। इसलिए व्रत छह मार्च को ही रखा जाएगा। इसी दिन चंद्रोदय रात 9:14 बजे होगा। भद्रा काल सुबह 6:41 बजे से शुरू होकर सायं 5:53 बजे तक रहेगा। हालांकि भद्रा का वास पाताल लोक में बताया गया है। इसलिए पूजा-पाठ और धार्मिक कार्यों में किसी प्रकार की बाधा नहीं मानी जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

अनुष्ठान ही नहीं, धैर्य और विश्वास का भी महत्व : पंडित पवन शर्मा
ज्योतिषाचार्य पंडित पवन शर्मा ने बताया कि यह व्रत केवल अनुष्ठान तक ही सीमित नहीं, बल्कि धैर्य और विश्वास का भी महत्व रखता है। भालचंद्र शब्द संस्कृत के दो शब्दों से मिलकर बना है - भाल और चंद्र। भाल यानी शीश और चंद्र से तात्पर्य चांद। यह भालचंद्र गणेश के उस रूप को संदर्भित करता है, जो अपने माथे पर अर्ध चंद्र धारण करते हैं। ज्योतिष के अनुसार चंद्रमा मन का कारक होता है, जिसकी कलाएं जीवन के उतार-चढ़ाव को दर्शाती हैं। यह स्वरूप मनुष्य को विशेष संदेश देता है कि मन और भावनाओं पर काबू रख स्वयं को स्थिर शक्ति का स्रोत बनाकर रखें। भालचंद्र चतुर्थी पर व्रत पूजन से होते संकट दूर होते हैं।

संकष्टी चतुर्थी गणेश जी का विशेष दिन : आचार्य दीपेंद्र
आचार्य दीपेंद्र पंडित ने बताया कि संकष्टी चतुर्थी गणेश जी का विशेष दिन है। इस दिन रखा गया व्रत चंद्रमा को अर्घ्य देकर खाेला जाता है। गणेश जी का पूजन घर परिवार में सुख-समृद्धि वैभव प्रदान करता है। छह मार्च को व्रत रखना शुभ फलदायी रहेगा। भारतीय वैदिक परंपरा में चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन भक्तजन व्रत रखकर भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा करते हैं। भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी का व्रत चंद्रमा के दर्शन और अर्घ्य देने के बाद ही पूर्ण माना जाता है। इस दिन गणपति जी की पूजा अर्चना करने से जीवन के सभी तरह के कष्ट दूर हो जाते हैं। घर में धन संपत्ति का वास होता है।
इन बातों का रखें विशेष ध्यान
भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी के दिन प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थान की सफाई कर चौकी पर लाल वस्त्र बिछाएं और उस पर भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। गणेश जी को हल्दी, रोली और अक्षत से तिलक कर दीपक जलाकर पुष्प, माला अर्पित करें।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed