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Kurukshetra News: पिहोवा तीर्थ सहित 20 किलोमीटर तक सरस्वती नदी का होगा जीर्णोद्धार, चार विभाग तैयार कर रहे मास्टर प्लान
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कुरुक्षेत्र। सरकार ने सरस्वती तीर्थ पिहोवा और सरस्वती नदी के पुनर्विकास के लिए बड़ी पहल की है। पिहोवा तीर्थ से करीब 20 किलोमीटर तक सरस्वती नदी के जीर्णोद्धार और सुंदरीकरण का मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है। कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड को पूरे विकास कार्य के डिजाइन का जिम्मा सौंपा गया है।
इस योजना के लिए कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड, सरस्वती हैरिटेज बोर्ड और पिहोवा नगर प्रशासन के अधिकारियों ने मंथन किया। डिजाइन तैयार होने के बाद निर्माण कार्य चरणबद्ध तरीके से शुरू होगा। मास्टर प्लान में अरुनाय से सतोड़ा तक नदी के दोनों तटों पर स्टोन पिचिंग की जाएगी। इससे नदी का कटाव रोका जा सकेगा। श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए दोनों ओर करीब 10 फीट चौड़े पैदल पथ बनेंगे। इन पाथ वे के किनारे सुरक्षा के लिए ग्रिल भी लगाई जाएगी। सरस्वती तीर्थ परिसर में दूसरे घाट पर आरती स्थल विकसित होगा। श्रद्धालुओं की आवाजाही सुगम बनाने के लिए ओपन कॉरिडोर भी तैयार होगा।
मास्टर प्लान में अरुनाय से सतोड़ा तक स्थित 13 प्रमुख तीर्थों का सुंदरीकरण भी होगा। इन तीर्थों पर मूलभूत सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। धार्मिक और पर्यटन महत्व को ध्यान में रखकर विकास कार्य होंगे। सन्निहित सरोवर की तर्ज पर महिमा पट्ट भी स्थापित किए जाएंगे। श्रद्धालुओं के लिए शेड, नवीनीकृत शौचालय और नई सुविधाएं भी मिलेंगी।
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मुख्यमंत्री के ओएसडी की अध्यक्षता में केडीबी कार्यालय में किया मास्टर प्लान पर मंथन
मुख्यमंत्री नायब सैनी के ओएसडी भारत भूषण भारती की अध्यक्षता में शुक्रवार को सरस्वती तीर्थ पिहोवा व इसके साथ प्राची तीर्थ से त्रिवेणी तक, त्रिवेणी से पश्चिमी दिशा में ड्रेन तक व पूर्वी ओर संधोली तक सरस्वती नदी पर स्टोन पिचिंग व मास्टर प्लान के अनुसार अन्य कार्यों पर करीब ढाई घंटे तक गहन मंथन किया गया।। इसमें केडीबी के मानद सचिव उपेंद्र सिंघल, सीईओ पंकज सेतिया, सरस्वती हैरिटेज बोर्ड की ओर से कुमार सु प्रवीन, 48 कोस तीर्थ निगरानी समिति के चेयरमैन रविंद्र सांगवान, नगर पालिका पिहोवा व अन्य सभी संबंधित विभाग एवं बोर्ड के एक्सएईएन, एसडीओ व जेई तक शामिल रहे।
नदी व सरस्वती तीर्थ को मिल जाएगा नया स्वरूप : सिंघल
केडीबी मानद सचिव उपेंद्र सिंघल का कहना है कि मास्टर प्लान का डिजाइन जल्द तैयार कर लिया जाएगा, जिसके अनुसार अन्य सभी संबंधित विभागों के तालमेल के साथ काम सौंपा जाएगा। मुख्यमंत्री के खास निर्देशन में यह कार्य किया जा रहा है, जिसके बाद सरस्वती नदी व सरस्वती तीर्थ को नया स्वरूप मिल जाएगा। इससे क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को खास बढ़ावा मिलेगा।
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इस योजना के लिए कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड, सरस्वती हैरिटेज बोर्ड और पिहोवा नगर प्रशासन के अधिकारियों ने मंथन किया। डिजाइन तैयार होने के बाद निर्माण कार्य चरणबद्ध तरीके से शुरू होगा। मास्टर प्लान में अरुनाय से सतोड़ा तक नदी के दोनों तटों पर स्टोन पिचिंग की जाएगी। इससे नदी का कटाव रोका जा सकेगा। श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए दोनों ओर करीब 10 फीट चौड़े पैदल पथ बनेंगे। इन पाथ वे के किनारे सुरक्षा के लिए ग्रिल भी लगाई जाएगी। सरस्वती तीर्थ परिसर में दूसरे घाट पर आरती स्थल विकसित होगा। श्रद्धालुओं की आवाजाही सुगम बनाने के लिए ओपन कॉरिडोर भी तैयार होगा।
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मास्टर प्लान में अरुनाय से सतोड़ा तक स्थित 13 प्रमुख तीर्थों का सुंदरीकरण भी होगा। इन तीर्थों पर मूलभूत सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। धार्मिक और पर्यटन महत्व को ध्यान में रखकर विकास कार्य होंगे। सन्निहित सरोवर की तर्ज पर महिमा पट्ट भी स्थापित किए जाएंगे। श्रद्धालुओं के लिए शेड, नवीनीकृत शौचालय और नई सुविधाएं भी मिलेंगी।
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मुख्यमंत्री के ओएसडी की अध्यक्षता में केडीबी कार्यालय में किया मास्टर प्लान पर मंथन
मुख्यमंत्री नायब सैनी के ओएसडी भारत भूषण भारती की अध्यक्षता में शुक्रवार को सरस्वती तीर्थ पिहोवा व इसके साथ प्राची तीर्थ से त्रिवेणी तक, त्रिवेणी से पश्चिमी दिशा में ड्रेन तक व पूर्वी ओर संधोली तक सरस्वती नदी पर स्टोन पिचिंग व मास्टर प्लान के अनुसार अन्य कार्यों पर करीब ढाई घंटे तक गहन मंथन किया गया।। इसमें केडीबी के मानद सचिव उपेंद्र सिंघल, सीईओ पंकज सेतिया, सरस्वती हैरिटेज बोर्ड की ओर से कुमार सु प्रवीन, 48 कोस तीर्थ निगरानी समिति के चेयरमैन रविंद्र सांगवान, नगर पालिका पिहोवा व अन्य सभी संबंधित विभाग एवं बोर्ड के एक्सएईएन, एसडीओ व जेई तक शामिल रहे।
नदी व सरस्वती तीर्थ को मिल जाएगा नया स्वरूप : सिंघल
केडीबी मानद सचिव उपेंद्र सिंघल का कहना है कि मास्टर प्लान का डिजाइन जल्द तैयार कर लिया जाएगा, जिसके अनुसार अन्य सभी संबंधित विभागों के तालमेल के साथ काम सौंपा जाएगा। मुख्यमंत्री के खास निर्देशन में यह कार्य किया जा रहा है, जिसके बाद सरस्वती नदी व सरस्वती तीर्थ को नया स्वरूप मिल जाएगा। इससे क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को खास बढ़ावा मिलेगा।