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Kurukshetra News: समाज के हर क्षेत्र की उन्नति में योगदान दे रही श्री विश्वकर्मा पांचाल धर्मशाला
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कुरुक्षेत्र। श्री विश्वकर्मा पांचाल धर्मशाला का बोर्ड।
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कुरुक्षेत्र। छोटे रेलवे स्टेशन के पीछे नरकातारी-शेख चेहली रोड पर स्थित श्री विश्वकर्मा पांचाल समाज सुधार सभा धर्मनगरी में समाज के उत्थान के लिए सकारात्मक कार्य करते हुए विशेष पहचान बना रही है। सभा पिछले 48 वर्षों से धर्मशाला निर्माण व रखरखाव कर समाज को आगे बढ़ाने में लगी है। साल 1988 से शुरू हुई धर्मशाला आज 50 कमरों तक पहुंच गई है।
प्रबंधक सतपाल पांचाल ने बताया कि लगभग दो एकड़ में फैले परिसर में भगवान विश्वकर्मा के मंदिर में सुबह उठते ही धूप-आरती और पूजा-अर्चना का सिलसिला शुरू हो जाता है। धर्मशाला में विद्यार्थियों के लिए मामूली फीस के साथ रहने और खाने-पीने की सुविधा प्रदान की जाती है। साल 1988 से अब तक तीन मंजिला तक भवनों में यहां 50 कमरों का निर्माण हो चुका है। एक लाइब्रेरी भी है जिसमें विभिन्न विषयों की पुस्तकें हैं। दूसरे राज्यों से आए पर्यटकों को कमरे बेहद कम फीस या फिर नि:शुल्क भी मुहैया करा दिए जाते हैं। खासकर सेवानिवृत्त कर्मियों और बुजुर्गों के लिए धर्मशाला में खाट, पलंग, मंजे-बिस्तरे और तख्त आदि की व्यवस्था की गई है। एकसाथ भोजन के लिए विशाल हॉल बनवाया गया है। धर्मशाला की अपनी लगभग आठ दुकानें भी हैं।
सबसे लंबे समय छह साल तक प्रधान रहे रामजी लाल : सोमदत्त
विश्वकर्मा मंदिर सभा कुरुक्षेत्र के पूर्व प्रधान सोमदत्त पांचाल ने कहा कि श्री विश्वकर्मा पांचाल धर्मशाला के प्रधान साहब सिंह खरींडवा के नेतृत्व में निरंतर प्रगति जारी है। हालांकि इन दिनों वे स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे हैं। बावजूद इसके धर्मशाला में बेहतर व्यवस्था व सुविधाएं मुहैया कराने की दिशा में प्रयासरत हैं। उन्होंने बताया कि सबसे पहले प्रधान पूर्णचंद बारना 1988 से 1989 तक रहे। उनके बाद रसाला राम हजवाना 1989 से 1990 तक, पुन्नू राम 1990 से 1992 तक, बालक राम खूखनी 1992 से 1994 तक, बाबूराम रायपुर 1994 से 1998 तक, जयसिंह नरवाना 1998 से 2000 तक, जयप्रकाश तरावड़ी 2000 से 2004 तक, जयपाल बाबैन 2004 से 2006 तक, अशोक असंध 2006 से 2008 तक, सुरेंद्र पांचाल समालखा 2008 से 2011 तक, कृष्णचंद पांचाल 2011 से 2013 तक, रामजी लाल 2013 से 2019 तक, वेदप्रकाश ढांड 2019 से 2023, साहब सिंह खरींडवा 2023 से अब तक प्रधान रहे। सबसे लंबे समय तक प्रधान पद की कमान छह साल तक रामजी लाल ने संभाली।
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प्रबंधक सतपाल पांचाल ने बताया कि लगभग दो एकड़ में फैले परिसर में भगवान विश्वकर्मा के मंदिर में सुबह उठते ही धूप-आरती और पूजा-अर्चना का सिलसिला शुरू हो जाता है। धर्मशाला में विद्यार्थियों के लिए मामूली फीस के साथ रहने और खाने-पीने की सुविधा प्रदान की जाती है। साल 1988 से अब तक तीन मंजिला तक भवनों में यहां 50 कमरों का निर्माण हो चुका है। एक लाइब्रेरी भी है जिसमें विभिन्न विषयों की पुस्तकें हैं। दूसरे राज्यों से आए पर्यटकों को कमरे बेहद कम फीस या फिर नि:शुल्क भी मुहैया करा दिए जाते हैं। खासकर सेवानिवृत्त कर्मियों और बुजुर्गों के लिए धर्मशाला में खाट, पलंग, मंजे-बिस्तरे और तख्त आदि की व्यवस्था की गई है। एकसाथ भोजन के लिए विशाल हॉल बनवाया गया है। धर्मशाला की अपनी लगभग आठ दुकानें भी हैं।
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सबसे लंबे समय छह साल तक प्रधान रहे रामजी लाल : सोमदत्त
विश्वकर्मा मंदिर सभा कुरुक्षेत्र के पूर्व प्रधान सोमदत्त पांचाल ने कहा कि श्री विश्वकर्मा पांचाल धर्मशाला के प्रधान साहब सिंह खरींडवा के नेतृत्व में निरंतर प्रगति जारी है। हालांकि इन दिनों वे स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे हैं। बावजूद इसके धर्मशाला में बेहतर व्यवस्था व सुविधाएं मुहैया कराने की दिशा में प्रयासरत हैं। उन्होंने बताया कि सबसे पहले प्रधान पूर्णचंद बारना 1988 से 1989 तक रहे। उनके बाद रसाला राम हजवाना 1989 से 1990 तक, पुन्नू राम 1990 से 1992 तक, बालक राम खूखनी 1992 से 1994 तक, बाबूराम रायपुर 1994 से 1998 तक, जयसिंह नरवाना 1998 से 2000 तक, जयप्रकाश तरावड़ी 2000 से 2004 तक, जयपाल बाबैन 2004 से 2006 तक, अशोक असंध 2006 से 2008 तक, सुरेंद्र पांचाल समालखा 2008 से 2011 तक, कृष्णचंद पांचाल 2011 से 2013 तक, रामजी लाल 2013 से 2019 तक, वेदप्रकाश ढांड 2019 से 2023, साहब सिंह खरींडवा 2023 से अब तक प्रधान रहे। सबसे लंबे समय तक प्रधान पद की कमान छह साल तक रामजी लाल ने संभाली।

कुरुक्षेत्र। श्री विश्वकर्मा पांचाल धर्मशाला का बोर्ड।

कुरुक्षेत्र। श्री विश्वकर्मा पांचाल धर्मशाला का बोर्ड।