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Kurukshetra News: छात्रों को घर भेज एनआईटी में करवाया हवन, देर रात छात्रावास पहुंचकर बीओजी चेयरमैन ने जानी छात्रों की समस्याएं
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कुरुक्षेत्र। एनआईटी परिसर में बीओजी चेयरमैन तेजस्विनी अनंत कुमार व प्रोफेसर हवन में आहुती डालते
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कुरुक्षेत्र। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) कुरुक्षेत्र की बोर्ड ऑफ गवर्नेंस (बीओजी) चेयरमैन तेजस्विनी अनंत कुमार ने हाल में चार विद्यार्थियों द्वारा आत्महत्या व एक के प्रयास करने की घटना के बाद रविवार को परिसर में विद्यार्थियों की आत्मिक शांति, सर्वकल्याण तथा सद्बुद्धि की कामना से हवन करवाया। हवन के समय परिसर में विद्यार्थी उपस्थित नहीं थे। प्रशासन ने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए रविवार को लगभग सभी छात्रों को उनके घर भेज दिया था।
चेयरमैन तेजस्विनी अनंत कुमार शनिवार देर रात करीब 11 बजे एनआईटी पहुंची और रात 1:30 बजे तक छात्रावास में रुके हुए विद्यार्थियों से मिली और उनकी व्यक्तिगत समस्याओं तथा कठिनाइयों को जानने का प्रयास किया। रविवार सुबह उन्होंने सबसे पहले पुराने प्रशासनिक भवन के समक्ष सभी प्रोफेसरों के साथ हवन करवाया। इसके बाद दोपहर 12 बजे प्रोफेसरों के साथ विस्तृत बैठक की। बैठक में विद्यार्थियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए चेयरमैन ने निर्णय लिया कि अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों की परीक्षा निर्धारित समय पर यानी मई के अंतिम सप्ताह और जून के पहले सप्ताह में ही आयोजित की जाएंगी। इन परीक्षाओं को किस मोड में करवाया जाए, इस संबंध में एक विशेष कमेटी गठित की जाएगी जो इस पर विचार कर निर्णय लेगी। बाकि विद्यार्थियों की परीक्षाओं का निर्णय परिसर में माहौल पूरी तरह शांत और सामान्य होने के बाद ही लिया जाएगा।
साथ ही उन्होंने हाल में हुई आत्महत्या की घटनाओं की बारीकी से जानकारी ली गई और उनके पीछे के संभावित कारणों का विश्लेषण किया गया। चेयरमैन ने यह भी पूछा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासन किन-किन कदमों को उठाने जा रहा है। उन्होंने पिछली बैठक में लिए गए निर्णयों की प्रगति रिपोर्ट भी तलब की।
प्रोफेसर बोले, चार से पांच विद्यार्थियों में दिखा तनाव
बैठक में चेयरपर्सन ने यह जानना चाहा कि प्रत्येक प्रोफेसर ने कितने विद्यार्थियों की काउंसलिंग की है और काउंसलिंग के दौरान छात्रों ने क्या-क्या समस्याएं रखी। अधिकांश प्रोफेसरों ने बताया कि उन्होंने किसी भी विद्यार्थी में गंभीर तनाव या आत्महत्या जैसे संकेतों को नहीं देखा। उन्होंने यह भी कहा कि काउंसलिंग के दौरान किसी छात्र ने ऐसी कोई गंभीर समस्या उनके सामने नहीं रखी। हालांकि तीन प्रोफेसरों ने बताया कि उन्होंने चार-पांच विद्यार्थियों को काउंसलर के पास भेजा था, जो फिलहाल स्थिर हैं और उनके तनाव में कमी देखी गई है।
हर छात्र को फैकल्टी मेंबर से जोड़ा :प्रो. ब्रह्मजीत
इस पर कार्यकारी निदेशक प्रो. ब्रह्मजीत सिंह ने बताया कि विद्यार्थियों की समस्या को गंभीरता से लिया जा रहा है। सबसे पहले हर छात्र को एक फैकल्टी मेंबर से जोड़ा गया है। वो फैकल्टी मेंबर उस छात्र से नियमित बात करेगा। अगर कोई समस्या है तो उसे समझने की कोशिश करेगा और उसे सुलझाएगा।
विद्यार्थी की समस्याएं हल करने के लिए तीन कमेटियां बनाई गई है। पहली कमेटी में वार्डन रोज छात्रावास जाते हैं और विद्यार्थियों से बात करते हैं। दूसरी कमेटी फैकल्टी को-ऑर्डिनेटर या मेंटरशिप की है। इसमें 20-25 छात्रों के साथ एक मेंटर जुड़ा है। वो रोज फोन पर भी बात करते हैं। तीसरी कमेटी में हर छात्रावास के लिए दो फैकल्टी मेंबर्स। उन्हाेंने बताया कि विद्यार्थियों की आत्महत्या को देखते हुए जांच के लिए पांच सदस्य कमेटी बनाई गई है। डीन स्टूडेंट वेलफेर प्रो. लीली दीवान इस कमेटी की अध्यक्ष हैं। साथ ही प्रो. जेके कपूर, प्रो. प्रवीण अग्रवाल, डॉ. संदीप सिंघल और डॉ. मनोज सिन्हा भी जांच कमेटी में शामिल है।
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चेयरमैन तेजस्विनी अनंत कुमार शनिवार देर रात करीब 11 बजे एनआईटी पहुंची और रात 1:30 बजे तक छात्रावास में रुके हुए विद्यार्थियों से मिली और उनकी व्यक्तिगत समस्याओं तथा कठिनाइयों को जानने का प्रयास किया। रविवार सुबह उन्होंने सबसे पहले पुराने प्रशासनिक भवन के समक्ष सभी प्रोफेसरों के साथ हवन करवाया। इसके बाद दोपहर 12 बजे प्रोफेसरों के साथ विस्तृत बैठक की। बैठक में विद्यार्थियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए चेयरमैन ने निर्णय लिया कि अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों की परीक्षा निर्धारित समय पर यानी मई के अंतिम सप्ताह और जून के पहले सप्ताह में ही आयोजित की जाएंगी। इन परीक्षाओं को किस मोड में करवाया जाए, इस संबंध में एक विशेष कमेटी गठित की जाएगी जो इस पर विचार कर निर्णय लेगी। बाकि विद्यार्थियों की परीक्षाओं का निर्णय परिसर में माहौल पूरी तरह शांत और सामान्य होने के बाद ही लिया जाएगा।
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साथ ही उन्होंने हाल में हुई आत्महत्या की घटनाओं की बारीकी से जानकारी ली गई और उनके पीछे के संभावित कारणों का विश्लेषण किया गया। चेयरमैन ने यह भी पूछा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासन किन-किन कदमों को उठाने जा रहा है। उन्होंने पिछली बैठक में लिए गए निर्णयों की प्रगति रिपोर्ट भी तलब की।
प्रोफेसर बोले, चार से पांच विद्यार्थियों में दिखा तनाव
बैठक में चेयरपर्सन ने यह जानना चाहा कि प्रत्येक प्रोफेसर ने कितने विद्यार्थियों की काउंसलिंग की है और काउंसलिंग के दौरान छात्रों ने क्या-क्या समस्याएं रखी। अधिकांश प्रोफेसरों ने बताया कि उन्होंने किसी भी विद्यार्थी में गंभीर तनाव या आत्महत्या जैसे संकेतों को नहीं देखा। उन्होंने यह भी कहा कि काउंसलिंग के दौरान किसी छात्र ने ऐसी कोई गंभीर समस्या उनके सामने नहीं रखी। हालांकि तीन प्रोफेसरों ने बताया कि उन्होंने चार-पांच विद्यार्थियों को काउंसलर के पास भेजा था, जो फिलहाल स्थिर हैं और उनके तनाव में कमी देखी गई है।
हर छात्र को फैकल्टी मेंबर से जोड़ा :प्रो. ब्रह्मजीत
इस पर कार्यकारी निदेशक प्रो. ब्रह्मजीत सिंह ने बताया कि विद्यार्थियों की समस्या को गंभीरता से लिया जा रहा है। सबसे पहले हर छात्र को एक फैकल्टी मेंबर से जोड़ा गया है। वो फैकल्टी मेंबर उस छात्र से नियमित बात करेगा। अगर कोई समस्या है तो उसे समझने की कोशिश करेगा और उसे सुलझाएगा।
विद्यार्थी की समस्याएं हल करने के लिए तीन कमेटियां बनाई गई है। पहली कमेटी में वार्डन रोज छात्रावास जाते हैं और विद्यार्थियों से बात करते हैं। दूसरी कमेटी फैकल्टी को-ऑर्डिनेटर या मेंटरशिप की है। इसमें 20-25 छात्रों के साथ एक मेंटर जुड़ा है। वो रोज फोन पर भी बात करते हैं। तीसरी कमेटी में हर छात्रावास के लिए दो फैकल्टी मेंबर्स। उन्हाेंने बताया कि विद्यार्थियों की आत्महत्या को देखते हुए जांच के लिए पांच सदस्य कमेटी बनाई गई है। डीन स्टूडेंट वेलफेर प्रो. लीली दीवान इस कमेटी की अध्यक्ष हैं। साथ ही प्रो. जेके कपूर, प्रो. प्रवीण अग्रवाल, डॉ. संदीप सिंघल और डॉ. मनोज सिन्हा भी जांच कमेटी में शामिल है।
