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सार्थक जीवन जीने की प्रेरणा देती हैं वेदों की शिक्षाएं : आचार्य देवव्रत
Tue, 18 Aug 2026 02:40 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
Updated Tue, 18 Aug 2026 02:40 AM IST
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कुरुक्षेत्र। वेद प्रचार संगोष्ठी को संबाेधित करते राज्यपाल आचार्य देवव्रत। संस्थान
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कुरुक्षेत्र। आज के तनावपूर्ण और प्रतिस्पर्धी दौर में वेदों की शिक्षाएं दिशाहीनता को दूर कर एक संतुलित, अनुशासित और सार्थक जीवन जीने की प्रेरणा देती हैं। वेदों को केवल पढ़ने तक सीमित न रखें, बल्कि उनके संदेशों को आचरण में उतारें। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर उठकर राष्ट्र और समाज के कल्याण के लिए कार्य करना ही सच्ची प्रगति है। परस्पर सहयोग और सद्भाव ही एक स्वस्थ समाज की नींव है। ये विचार गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने व्यक्त किए। वे सोमवार को गुरुकुल कुरुक्षेत्र में वेद प्रचार संगोष्ठी में लोगों को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने मिट्टी की गुणवत्ता और पर्यावरण संरक्षण के लिए रसायनों से मुक्त प्राकृतिक खेती अपनाने और भारतीय कृषि परंपराओं को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में प्राकृतिक खेती ही मानव जीवन को बचा सकती है। यूरिया, डीएपी, कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग से हमारी भूमि बंजर हो गई है। पानी दूषित और भोजन भी विषैला हो गया है। यदि अभी भी किसानों ने प्राकृतिक खेती को नहीं अपनाया तो आने वाली पीढ़ी को न पीने योग्य पानी मिलेगा और न ही खाने योग्य भोजन। उन्होंने सभी किसानों से अपील की कि वे प्राणी मात्र के कल्याण के लिए प्राकृतिक खेती को अपनाएं।
कार्यक्रम में आर्य प्रतिनिधि सभा हरियाणा के प्रधान धर्मवीर आर्य, उप प्रधान उमेद शर्मा, महामंत्री विजयपाल आर्य, कोषाध्यक्ष मोहित आर्य, वेद प्रचार अधिष्ठाता स्वामी सच्चिदानन्द, वैदिक विद्वान् डॉ. राजेंद्र विद्यालंकार सहित वेद प्रचार विभाग गुरुकुल के अधिष्ठाता रामनिवास आर्य सहित अन्य लोगों ने भी भाग लिया। संगोष्ठी में आर्य प्रतिनिधि सभा हरियाणा एवं वेद प्रचार विभाग गुरुकुल कुरुक्षेत्र संयुक्त प्रयासों से कुरुक्षेत्र, कैथल, यमुनानगर, अंबाला, जींद और पानीपत जिला में गठित किए गए वेद प्रचार मंडल के सभी वरिष्ठ पदाधिकारी पहुंचे।
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वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ सांस्कृतिक और वैदिक विरासत को भी समझें युवा
राज्यपाल ने युवाओं से अपील की कि वे आधुनिक शिक्षा और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक और वैदिक विरासत को भी समझें। उन्होंने कहा कि गुरुकुल शिक्षा पद्धति को मात्र किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण, अनुशासन और संस्कारों के विकास का मुख्य केंद्र है। अत्यंत उत्साहपूर्ण वातावरण में कार्यक्रम का समापन हुआ। उपस्थित लोगों ने वेदों के ज्ञान और पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली को अपने जीवन में अपनाने और समाज के व्यापक वर्ग तक पहुंचाने का संकल्प लिया।
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उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में प्राकृतिक खेती ही मानव जीवन को बचा सकती है। यूरिया, डीएपी, कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग से हमारी भूमि बंजर हो गई है। पानी दूषित और भोजन भी विषैला हो गया है। यदि अभी भी किसानों ने प्राकृतिक खेती को नहीं अपनाया तो आने वाली पीढ़ी को न पीने योग्य पानी मिलेगा और न ही खाने योग्य भोजन। उन्होंने सभी किसानों से अपील की कि वे प्राणी मात्र के कल्याण के लिए प्राकृतिक खेती को अपनाएं।
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कार्यक्रम में आर्य प्रतिनिधि सभा हरियाणा के प्रधान धर्मवीर आर्य, उप प्रधान उमेद शर्मा, महामंत्री विजयपाल आर्य, कोषाध्यक्ष मोहित आर्य, वेद प्रचार अधिष्ठाता स्वामी सच्चिदानन्द, वैदिक विद्वान् डॉ. राजेंद्र विद्यालंकार सहित वेद प्रचार विभाग गुरुकुल के अधिष्ठाता रामनिवास आर्य सहित अन्य लोगों ने भी भाग लिया। संगोष्ठी में आर्य प्रतिनिधि सभा हरियाणा एवं वेद प्रचार विभाग गुरुकुल कुरुक्षेत्र संयुक्त प्रयासों से कुरुक्षेत्र, कैथल, यमुनानगर, अंबाला, जींद और पानीपत जिला में गठित किए गए वेद प्रचार मंडल के सभी वरिष्ठ पदाधिकारी पहुंचे।
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वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ सांस्कृतिक और वैदिक विरासत को भी समझें युवा
राज्यपाल ने युवाओं से अपील की कि वे आधुनिक शिक्षा और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक और वैदिक विरासत को भी समझें। उन्होंने कहा कि गुरुकुल शिक्षा पद्धति को मात्र किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण, अनुशासन और संस्कारों के विकास का मुख्य केंद्र है। अत्यंत उत्साहपूर्ण वातावरण में कार्यक्रम का समापन हुआ। उपस्थित लोगों ने वेदों के ज्ञान और पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली को अपने जीवन में अपनाने और समाज के व्यापक वर्ग तक पहुंचाने का संकल्प लिया।