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Mahendragarh-Narnaul News: पति के देहांत के बाद जननी बनी जांबाज, स्टॉल लगाकर पूरी की बच्चों की पढ़ाई
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फोटो संख्या:54 शहर के गोशाला रोड पर स्टॉल पर महिला को कुकिंग प्रक्रिया सिखाती राधिका। संवाद
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महेंद्रगढ़। दुर्गा माता को संसार की जननी कहा जाता है और दुर्गा भी परिस्थितियों के अनुसार विभिन्न रूप धारण करती हैं। इसी तरह शहर निवासी राधिका ने भी पति के देहांत के बाद के जननी से जांबाज का रूप धारण कर लिया। अब पांच साल से आत्मनिर्भरता की राह पर चल रही हैं।
मध्यप्रदेश से सात साल पहले पति और तीन बच्चों के साथ महेंद्रगढ़ आई राधिका एक साधारण गृहिणी थीं। उनके पति मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते थे जबकि राधिका घर संभालती थीं लेकिन पांच साल पहले अचानक हार्ट अटैक से पति के निधन ने उनकी जिंदगी को पूरी तरह बदल दिया।
इस कठिन परिस्थिति में राधिका ने हार नहीं मानी, बल्कि खुद को मजबूत बनाते हुए परिवार की जिम्मेदारी संभाल ली। उन्होंने जीवनयापन के लिए हर संभव काम किया। कभी दुकान पर काम, कभी मजदूरी, तो कभी शोरूम में नौकरी। लगातार चार साल तक संघर्ष करने के बाद उन्होंने आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम बढ़ाया।
आज राधिका महेंद्रगढ़ के गोशाला रोड पर अपना फास्ट फूड स्टॉल चलाती हैं और सम्मानजनक जीवन जी रही हैं। उनकी मेहनत का ही परिणाम है कि उन्होंने अपने तीनों बच्चों की पढ़ाई पूरी करवाई और पिछले वर्ष दो बच्चों की शादी भी कर दी। उनकी छोटी बेटी अब बारहवीं कक्षा की परीक्षा दे रही है।
राधिका की खास बात यह है कि उन्होंने केवल खुद को ही नहीं संभाला, बल्कि अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया। वे उन्हें फास्ट फूड बनाना सिखाकर रोजगार के अवसर भी प्रदान कर रही हैं।
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मध्यप्रदेश से सात साल पहले पति और तीन बच्चों के साथ महेंद्रगढ़ आई राधिका एक साधारण गृहिणी थीं। उनके पति मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते थे जबकि राधिका घर संभालती थीं लेकिन पांच साल पहले अचानक हार्ट अटैक से पति के निधन ने उनकी जिंदगी को पूरी तरह बदल दिया।
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इस कठिन परिस्थिति में राधिका ने हार नहीं मानी, बल्कि खुद को मजबूत बनाते हुए परिवार की जिम्मेदारी संभाल ली। उन्होंने जीवनयापन के लिए हर संभव काम किया। कभी दुकान पर काम, कभी मजदूरी, तो कभी शोरूम में नौकरी। लगातार चार साल तक संघर्ष करने के बाद उन्होंने आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम बढ़ाया।
आज राधिका महेंद्रगढ़ के गोशाला रोड पर अपना फास्ट फूड स्टॉल चलाती हैं और सम्मानजनक जीवन जी रही हैं। उनकी मेहनत का ही परिणाम है कि उन्होंने अपने तीनों बच्चों की पढ़ाई पूरी करवाई और पिछले वर्ष दो बच्चों की शादी भी कर दी। उनकी छोटी बेटी अब बारहवीं कक्षा की परीक्षा दे रही है।
राधिका की खास बात यह है कि उन्होंने केवल खुद को ही नहीं संभाला, बल्कि अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया। वे उन्हें फास्ट फूड बनाना सिखाकर रोजगार के अवसर भी प्रदान कर रही हैं।