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Mahendragarh-Narnaul News: जेल में गूंजेगी रेडियो की आवाज, कैदी बनेंगे रेडियो जॉकी
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फोटो नंबर-13जिला कारागार नारनौल।
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प्रेम प्रकाश शर्मा
नारनौल। जिला जेल नारनौल में कैदियों के मानसिक सुधार और मनोरंजन के लिए एक नई पहल शुरू की जा रही है। जेल प्रशासन की ओर से जल्द ही जेल परिसर में रेडियो स्टेशन स्थापित किया जाएगा। इसके तहत कैदियों को ही रेडियो जॉकी (आरजे) के रूप में तैयार किया जाएगा। इसका उद्देश्य कैदियों को सकारात्मक दिशा में प्रेरित करना और उनके व्यक्तित्व विकास में मदद करना है।
इस पर 5.41 लाख रुपये खर्च होंगे। रेडियो स्टेशन की स्थापना के लिए आवश्यक उपकरणों की सप्लाई, इंस्टॉलेशन, टेस्टिंग और कमीशनिंग की प्रक्रिया जल्द शुरू होगी। इसके बाद जेल के अंदर ही एक छोटा रेडियो स्टूडियो तैयार किया जाएगा जहां से कार्यक्रम प्रसारित किए जाएंगे।
रेडियो कार्यक्रमों में गीत-संगीत, प्रेरणादायक कहानियां, सामाजिक संदेश और कैदियों के अनुभव शामिल होंगे। इससे कैदियों को अपनी भावनाएं व्यक्त करने का मंच मिलेगा और उनका आत्मविश्वास भी बढ़ेगा।
इस पहल के तहत चयनित कैदियों को आरजे बनने के लिए प्रशिक्षण भी दिया जाएगा ताकि वे बेहतर तरीके से कार्यक्रम प्रस्तुत कर सकें। इस तरह की गतिविधियां कैदियों के मानसिक तनाव को कम करेंगी और उन्हें समाज की मुख्यधारा में वापस लाने में मददगार साबित होंगी। इसके अलावा बंदी व कैदी अपने मनपसंद के गानों की भी फरमाइश कर सकेंगे। संवाद
वर्जन
जिला जेल में रेडियो स्टेशन खोला जाएगा। इस पर करीब 5.41 लाख रुपये खर्च होंगे। इसको लेकर टेंडर भी जारी कर दिया है। -संजय बांगड़, जेल अधीक्षक नसीबपुर जेल।
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नारनौल। जिला जेल नारनौल में कैदियों के मानसिक सुधार और मनोरंजन के लिए एक नई पहल शुरू की जा रही है। जेल प्रशासन की ओर से जल्द ही जेल परिसर में रेडियो स्टेशन स्थापित किया जाएगा। इसके तहत कैदियों को ही रेडियो जॉकी (आरजे) के रूप में तैयार किया जाएगा। इसका उद्देश्य कैदियों को सकारात्मक दिशा में प्रेरित करना और उनके व्यक्तित्व विकास में मदद करना है।
इस पर 5.41 लाख रुपये खर्च होंगे। रेडियो स्टेशन की स्थापना के लिए आवश्यक उपकरणों की सप्लाई, इंस्टॉलेशन, टेस्टिंग और कमीशनिंग की प्रक्रिया जल्द शुरू होगी। इसके बाद जेल के अंदर ही एक छोटा रेडियो स्टूडियो तैयार किया जाएगा जहां से कार्यक्रम प्रसारित किए जाएंगे।
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रेडियो कार्यक्रमों में गीत-संगीत, प्रेरणादायक कहानियां, सामाजिक संदेश और कैदियों के अनुभव शामिल होंगे। इससे कैदियों को अपनी भावनाएं व्यक्त करने का मंच मिलेगा और उनका आत्मविश्वास भी बढ़ेगा।
इस पहल के तहत चयनित कैदियों को आरजे बनने के लिए प्रशिक्षण भी दिया जाएगा ताकि वे बेहतर तरीके से कार्यक्रम प्रस्तुत कर सकें। इस तरह की गतिविधियां कैदियों के मानसिक तनाव को कम करेंगी और उन्हें समाज की मुख्यधारा में वापस लाने में मददगार साबित होंगी। इसके अलावा बंदी व कैदी अपने मनपसंद के गानों की भी फरमाइश कर सकेंगे। संवाद
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जिला जेल में रेडियो स्टेशन खोला जाएगा। इस पर करीब 5.41 लाख रुपये खर्च होंगे। इसको लेकर टेंडर भी जारी कर दिया है। -संजय बांगड़, जेल अधीक्षक नसीबपुर जेल।